उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति डबल आइडेंटिटी बनाकर भारत और मलेशिया दोनों देशों की सुविधाओं का फायदा उठा रहा था. पुलिस ने इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं.
कार्रवाई आजमगढ़ के निजामाबाद थाना क्षेत्र में की गई. आरोपी की पहचान मो. कुद्दूस उर्फ कुद्दूस के रूप में हुई है, जो मूल रूप से ग्राम सुराई का रहने वाला है. जांच में सामने आया कि वह बचपन से ही मलेशिया में रह रहा था और वहां की नागरिकता भी हासिल कर चुका था. लेकिन इसके बावजूद उसने भारत में अपनी अलग आइडेंटिटी रखी थी.
आरोप है कि कुद्दूस ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपना नाम बदल लिया और मोहम्मद कुद्दूस बिन रज्जाग शाह के नाम से मलेशिया का पासपोर्ट बनवा लिया. इसके साथ ही उसने ओसीआई (ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया) कार्ड भी बनवा लिया, जिससे वह भारत में रहने और आने-जाने की सुविधा ले सकता था. हैरानी की बात यह है कि ओसीआई कार्ड धारक होने के बावजूद उसने भारत में खुद को मतदाता के रूप में भी दर्ज करा लिया.

यह भी पढ़ें: मिजोरम में NIA का बड़ा ऑपरेशन सात विदेशी नागरिक गिरफ्तार म्यांमार लिंक की जांच तेज सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने ग्राम सुराई की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाया और भारतीय नागरिक बनकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेता रहा. इतना ही नहीं, उसने सरकारी अस्पतालों में भी सुविधाओं का फायदा उठाया. जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चल रहा था, तब भी उसने खुद को वोटर साबित करने के लिए फॉर्म भरा और अपनी असली पहचान छिपाने की कोशिश की.
इस मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब आरोपी विदेश जाने की तैयारी में था. वह एयरपोर्ट पहुंच चुका था, लेकिन खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस ने उस पर नजर रखी और उसे बाहर जाने से पहले ही पकड़ लिया. पूछताछ के दौरान उसके पास से दो पासपोर्ट, ओसीआई कार्ड, भारतीय वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए.
इस मामले में आजमगढ़ के अपर पुलिस अधीक्षक विवेक त्रिपाठी ने बताया कि आरोपी ने तथ्यों को छिपाकर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत और मलेशिया दोनों जगह नागरिकता बनाए रखी थी. उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस तरह के और लोग तो नहीं हैं, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे दोहरी पहचान बनाकर सरकारी सुविधाओं का गलत फायदा उठा रहे हैं.