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US-इजरायल से जंग के बीच ईरान में फंसे अमेठी के स्टूडेंट्स, परिजनों ने लगाई PM मोदी से गुहार

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की शहादत और अमेरिका-इजरायल के साथ जारी युद्ध की खबरों ने अमेठी के भनौली गांव में कोहराम मचा दिया है. यहां के आधा दर्जन से अधिक छात्र और शोधकर्ता ईरान में फंसे हुए हैं, जिनसे परिजनों का संपर्क टूट चुका है और अब वतन वापसी की गुहार लगाई जा रही है.

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अमेठी के भनौली गांव में प्रदर्शन (Photo- ITG)
अमेठी के भनौली गांव में प्रदर्शन (Photo- ITG)

Uttar Pradesh News: अमेठी के मुसाफिरखाना कोतवाली अंतर्गत भनौली गांव के शिया समुदाय में ईरान के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई की मौत की खबर के बाद भारी आक्रोश व्याप्त है. ग्रामीणों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए ट्रंप और नेतन्याहू को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया और इसे कायरतापूर्ण कृत्य बताया है. वर्तमान युद्ध के हालातों के बीच भनौली गांव के आधा दर्जन से अधिक लोग, जिनमें पीएचडी छात्र और शोधकर्ता शामिल हैं, ईरान में फंसे हुए हैं. बीते कल से इन छात्रों का अपने परिवारों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे ग्रामीण और परिजन बेहद चिंतित हैं.

अपनों की सलामती के लिए उठी मांग

भनौली गांव के अब्बास अपनी पत्नी शाबिका के साथ ईरान में रिसर्च कर रहे हैं, जबकि जवाद हुसैन, इमाम अली, तहरीर फातिमा और सदफ फातिमा जैसे कई अन्य छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

परिजनों के अनुसार, कल दोपहर के बाद से बच्चों से कोई बात नहीं हो पाई है. इशरत हुसैन ने बताया कि उनके भतीजे और बहू सहित गांव के सात लोग वहां हैं. वहीं वारिश अली की बेटी वहां पीएचडी कर रही है, जिसने आखिरी बार हमले की सूचना दी थी.

प्रधानमंत्री से सुरक्षित वापसी की अपील

अमजद हुसैन का बेटा भी ईरान में है और परसों के बाद से संपर्क न होने के कारण परिवार सलामती की दुआएं मांग रहा है. युद्ध की विभीषिका के बीच परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है. गांव वालों की मांग है कि सरकार उनके बच्चों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के लिए जरूरी व्यवस्था करे. इस बीच, गांव में लोगों का आना-जाना लगा हुआ है और स्थानीय स्तर पर अमेरिका-इजराइल के खिलाफ गहरी नाराजगी देखी जा रही है.

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