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बिना सैलरी जिंदगी कैसी होती है? अच्छी-खासी नौकरी छोड़ युवक ने बताया अनुभव

दिल्ली के एक युवक ने मार्च में नौकरी छोड़ने के बाद अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि सैलरी छोड़ना किसी 'हार्ड ड्रग' को छोड़ने जैसा लगता है. उसकी पोस्ट पर कई प्रोफेशनल्स ने भी अपने अनुभव साझा किए और आर्थिक सुरक्षा बनाम मानसिक शांति को लेकर चर्चा छिड़ गई.

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60 दिन बिना सैलरी रहे दिल्ली के युवक ने साझा किया अनुभव (Photos: @attentionslop/Instagram)
60 दिन बिना सैलरी रहे दिल्ली के युवक ने साझा किया अनुभव (Photos: @attentionslop/Instagram)

आज के दौर में अच्छी नौकरी और हर महीने मिलने वाली तय सैलरी को ज्यादातर लोग सुरक्षा की गारंटी मानते हैं. लेकिन दिल्ली में रहने वाले एक युवक की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस सोच पर नई बहस छेड़ दी है. युवक ने बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद उसने 60 दिन बिना किसी आय के बिताए और इस दौरान उसे ऐसी बातें समझ आईं, जिनके बारे में लोग अक्सर खुलकर बात नहीं करते.

दो साल बाद छोड़ दी नौकरी

इंस्टाग्राम यूजर करण ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने मार्च के आखिर में उस कंपनी से इस्तीफा दे दिया, जहां वह लगभग दो साल से काम कर रहे थे. उनके मुताबिक, नौकरी छोड़ने का फैसला अचानक नहीं था. कई महीनों से वह अपने काम से खुश नहीं थे, लेकिन हर बार खुद को रुकने के लिए मना लेते थे.

करण ने लिखा कि वह अक्सर सोचते थे कि शायद अगला अप्रेजल बेहतर होगा, अगली तिमाही में हालात बदल जाएंगे या किसी महत्वपूर्ण बातचीत के बाद स्थिति सुधर जाएगी. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ.

'सैलरी छोड़ना हार्ड ड्रग छोड़ने जैसा है'

नौकरी छोड़ने के अनुभव ने करण को एक ऐसी बात समझाई, जिसने सोशल मीडिया पर हजारों लोगों का ध्यान खींचा. उन्होंने लिखा, "Salary is a hard drug to quit" यानी महीने की सैलरी एक ऐसी आदत की तरह है जिसे छोड़ना बेहद मुश्किल होता है.

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उनका कहना था कि नियमित सैलरी धीरे-धीरे इंसान की जिंदगी के लगभग हर हिस्से से जुड़ जाती है. घर का किराया, खर्च करने की आदतें, वीकेंड की योजनाएं, आत्मविश्वास और यहां तक कि सुरक्षा का एहसास भी उसी पर निर्भर होने लगता है.

नौकरी छोड़ने के बाद सामने आती हैं नई चिंताएं

करण ने बताया कि जब कोई व्यक्ति नौकरी छोड़ता है, तो उसे कई ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिनके बारे में लोग खुलकर चर्चा नहीं करते. उन्होंने लिखा कि दोबारा माता-पिता से आर्थिक मदद लेना कई बार अपराधबोध पैदा करता है.

इसके अलावा बैंक खाते का बैलेंस बार-बार चेक करना, छोटी-छोटी खरीदारी पर भी दो बार सोचना और भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस करना आम बात है. उनके अनुसार, यही वजह है कि कई लोग ऐसी नौकरी में भी बने रहते हैं जिससे वे खुश नहीं होते.

देखें पोस्ट

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

करण की पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. कुछ यूजर्स ने बताया कि उन्होंने भी नौकरी छोड़ने के बाद कई महीने बिना सैलरी के बिताए थे. आर्थिक चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन उन्हें लंबे समय बाद मानसिक शांति का एहसास हुआ.

वहीं कुछ लोगों ने माना कि वे अभी भी ऐसी नौकरियों में काम कर रहे हैं जो उन्हें पसंद नहीं हैं, लेकिन वे इस उम्मीद में टिके हुए हैं कि शायद आने वाले समय में हालात बेहतर हो जाएं.

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बिना दूसरी नौकरी के इस्तीफा देने वालों ने भी साझा किए अनुभव

कई यूजर्स ने यह भी बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी तय किए बिना ही इस्तीफा दे दिया था. हालांकि शुरुआत में अनिश्चितता और डर था, लेकिन बाद में उसी फैसले ने उन्हें अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने और नए अवसर तलाशने का मौका दिया.उनका कहना था कि कभी-कभी करियर में आगे बढ़ने के लिए जोखिम उठाना भी जरूरी होता है.

करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चर्चा

इस वायरल पोस्ट के बाद चर्चा केवल नौकरी छोड़ने तक सीमित नहीं रही. लोगों ने करियर संतुष्टि, आर्थिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी.कई यूजर्स का मानना था कि अच्छी आय जरूरी है, लेकिन अगर नौकरी लगातार तनाव और असंतोष का कारण बन रही हो तो व्यक्ति को अपने विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

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