लद्दाख की ऊंची, ठंडी पहाड़ियों से एक ऐसा दृश्य सामने आया है जिसने वन्यजीव प्रेमियों को रोमांचित कर दिया. गहरी बर्फ़ में एक साथ चलते तीन स्नो लेपर्ड दिखाई दिए. ये वही लेपर्ड हैं जिन्हें उनकी छुपने की क्षमता के कारण 'पहाडों के भूत' भी कहा जाता है. इस दुर्लभ क्षण को बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया और वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया.
वीडियो में क्या दिखा
वीडियो में ये तीनों स्नो लेपर्ड बर्फीली ढलान पर एक-दूसरे के करीब चलते दिखाई देते हैं. उनके फूले हुए ग्रे-सफेद फर बर्फ की सफेदी के बीच एक अलग ही चमक पैदा करते हैं. एक लेपर्ड पहाड़ी की तरफ बढ़ता है जबकि बाकी दो उसके पीछे-पीछे चलते हैं. अंत में एक लेपर्ड धीरे-धीरे ढलान से नीचे उतरता दिखता है. पूरा दृश्य इतना शांत और सुंदर है कि इसे बार-बार देखने का मन करता है.BRO ने वीडियो के कैप्शन में लिखा कि हाई हिमालयाज में दिखा एलूसिव स्नो लेपर्ड. विकास और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं.
वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी उतनी ही शानदार रहीं. कई यूज़र्स ने इसे “शानदार” और “दुर्लभ” बताया. एक यूजर ने लिखा कि हमारी बायोडायवर्सिटी वाकई अद्भुत है. दूसरे ने कहा कि क्यूट कैट्स हैं. गले लगाने का मन करता है, लेकिन पता है कि खतरनाक हैं.” कुछ ने BRO के काम की तारीफ करते हुए कहा कि इतनी ऊंचाई पर सड़कें बनाना और उनका मेंटेनेंस करना बेहद चुनौतीपूर्ण है.
देखें वायरल वीडियो
भारत में कितने हैं स्नो लेपर्ड
स्नो लेपर्ड भारत के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में पाए जाते हैं जिनमें लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं. SPAI 2024 की रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल 718 स्नो लेपर्ड दर्ज किए गए. इनमें सबसे अधिक 477 स्नो लेपर्ड लद्दाख में पाए गए.
कैसे किया गया आकलन
लद्दाख में इन बिल्लियों के निवास को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने दो चरणों में अध्ययन किया. पहले चरण में उन्होंने 6,000 किमी से अधिक पैदल चलते हुए स्कैट, पंजों के निशान और स्क्रैप मार्क्स जैसी सूचनाएं जुटाईं. दूसरे चरण में 956 कैमरा ट्रैप लगाए गए जिनमें 26,000 से अधिक स्नो लेपर्ड की तस्वीरें कैद हुईं.