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1 करोड़ रुपये का पैकेज, लेकिन जेब में कितना? अमेरिकी टैक्स का पूरा गणित

न्यूयॉर्क में रहने वाले एक भारतीय युवक ने बताया कि अमेरिका में 1 करोड़ रुपये सालाना की सैलरी सुनने में भले बड़ी लगे, लेकिन टैक्स और किराए के बाद तस्वीर काफी अलग नजर आती है.

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विदेश में करोड़ों के पैकेज की खबरें अक्सर लोगों को आकर्षित करती हैं (Photo: Pexel)
विदेश में करोड़ों के पैकेज की खबरें अक्सर लोगों को आकर्षित करती हैं (Photo: Pexel)

विदेश में करोड़ों के पैकेज की खबरें अक्सर लोगों को आकर्षित करती हैं, लेकिन क्या वाकई इतनी सैलरी लग्जरी जिंदगी की गारंटी होती है? न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय युवक यश शर्मा ने एक वीडियो के जरिए बताया कि अमेरिका में 1 करोड़ रुपये सालाना कमाने के बावजूद लोगों की जेब पर टैक्स और महंगे किराए का कितना असर पड़ता है.

1 करोड़ की सैलरी में कितना जाता है टैक्स?

यश शर्मा ने वीडियो में बताया कि अमेरिका में कमाई पर फेडरल टैक्स, स्टेट टैक्स, न्यूयॉर्क सिटी टैक्स, सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसे कई टैक्स लगते हैं. उनके मुताबिक, 1 करोड़ रुपये के पैकेज का करीब 35 से 40 फीसदी हिस्सा सिर्फ टैक्स में चला जाता है.

किराया भी जेब पर डालता है भारी असर

यश ने कहा कि न्यूयॉर्क जैसे शहर में किसी अच्छे इलाके में रहने के लिए हर महीने 2 से 3 लाख रुपये तक किराया देना पड़ सकता है. उनका मानना है कि भारत में 25 से 30 लाख रुपये सालाना कमाने वाला व्यक्ति कई मामलों में न्यूयॉर्क में 1 करोड़ रुपये कमाने वाले व्यक्ति से ज्यादा आरामदायक जीवन जी सकता है.

उनका मानना है कि भारत में 25 से 30 लाख रुपये सालाना कमाने वाला व्यक्ति कई मामलों में न्यूयॉर्क में 1 करोड़ रुपये कमाने वाले व्यक्ति से ज्यादा आरामदायक और संतुष्ट जीवन जी सकता है.

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देखें वीडियो

 

अगर न्यूयॉर्क सिटी में किसी व्यक्ति का सालाना पैकेज 1 करोड़ रुपये (करीब 1.2 लाख डॉलर) है, तो फेडरल टैक्स, न्यूयॉर्क स्टेट टैक्स, न्यूयॉर्क सिटी टैक्स, सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी कटौतियों के बाद उसकी सैलरी का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा टैक्स में चला सकता है. ऐसे में 1 करोड़ रुपये के पैकेज में से करीब 60 से 65 लाख रुपये ही बचते हैं, यानी हाथ में लगभग 5 से 5.4 लाख रुपये प्रति माह आते हैं. हालांकि इसके बाद भी न्यूयॉर्क में 2 से 3 लाख रुपये मासिक किराया, हेल्थ इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्ट, ग्रोसरी और अन्य रोजमर्रा के खर्च अलग से उठाने पड़ते हैं, जिससे वास्तविक बचत काफी कम हो सकती है.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. एक यूजर ने लिखा कि लोग सिर्फ डॉलर को रुपये में बदलकर देखते हैं, खर्चों को नहीं. दूसरे ने कहा कि सैलरी से ज्यादा महत्वपूर्ण कॉस्ट ऑफ लिविंग होती है.

हालांकि कुछ लोगों ने यश की बात से असहमति भी जताई. एक यूजर ने लिखा कि अमेरिका में कई लोगों की जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है." वहीं कुछ लोगों ने कहा कि न्यूयॉर्क अमेरिका के सबसे महंगे शहरों में से एक है, इसलिए पूरे देश की तुलना सिर्फ इसी शहर के आधार पर नहीं की जा सकती.

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