केरल की कोच्चि वॉटर मेट्रो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में कुछ यात्री चलती नाव के अंदर गरबा करते नजर आते हैं. जहां कुछ लोगों ने इसे संस्कृति और खुशी का खूबसूरत पल बताया, वहीं कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या सार्वजनिक परिवहन में इस तरह का डांस करना सही है?
यह वीडियो इंस्टाग्राम यूजर क्रिस्टिन ने शेयर किया है. उन्होंने बताया कि वह फोर्ट कोच्चि जा रहे थे, तभी वॉटर मेट्रो का शांत सफर अचानक संगीत और गरबा की धुनों से भर गया. उन्होंने कैप्शन में लिखा कि यह एक यादगार पल था, लेकिन साथ ही लोगों से सवाल भी पूछा कि क्या इसे सिर्फ एक खुशनुमा पल माना जाए या फिर सार्वजनिक परिवहन के नियमों का उल्लंघन?
चलती नाव में शुरू हो गया गरबा
वायरल वीडियो में कुछ यात्री वॉटर मेट्रो के अंदर गरबा करते दिखाई देते हैं. बाकी यात्री अपनी सीटों पर बैठे हुए यह नजारा देखते नजर आते हैं. कुछ लोग इस पल का आनंद लेते दिखे, जबकि वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी.
सिविक सेंस पर उठे सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन सभी यात्रियों के लिए होता है, इसलिए वहां ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे दूसरे लोग असहज महसूस करें.एक यूजर ने लिखा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट साझा जगह है, स्टेज नहीं. अपनी अभिव्यक्ति के साथ-साथ साझा जगह का सम्मान करना भी जरूरी है.दूसरे यूजर ने कहा कि अगर डांस या जश्न मनाना है तो प्राइवेट बोट या क्रूज किराये पर लेना चाहिए. सार्वजनिक परिवहन निजी संपत्ति नहीं है. वहीं किसी ने कहा आखिर हम भारतीय लोग कब सिविक सेंस सीखेंगे.
कुछ यूजर्स ने इसे लेकर तीखी टिप्पणियां भी कीं, जबकि कई लोगों ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर भी नागरिक जिम्मेदारी और दूसरों की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए.
देखें वायरल वीडियो
कुछ लोगों ने किया समर्थन
हालांकि, हर कोई इस वीडियो का विरोध करता नजर नहीं आया. कुछ यूजर्स का कहना था कि अगर इससे किसी को परेशानी नहीं हुई, तो इसमें गलत क्या है? उनके मुताबिक, ऐसे सहज और अनियोजित पल ही यात्रा को यादगार बना देते हैं.
VIDEO ने छेड़ी नई बहस
यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है. सवाल सिर्फ गरबा का नहीं, बल्कि यह भी है कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की आजादी और दूसरों की सुविधा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. आप इस वीडियो को देखकर क्या सोचते हैं? क्या चलती वॉटर मेट्रो में गरबा करना सही है या फिर सार्वजनिक जगहों के नियमों का पालन करना ज्यादा जरूरी?