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कटे हाथ-पैर, नींबू-मिर्च बंधी लाश मिली... गोताखोर ने बताया- नहरों का काला सच?

हमारे आसपास कोई न कोई नहर या नदी जरूर होती है. क्या कभी सोचा है कि इन नहरों और नदियों में सैकड़ों ऐसे राज दफन हैं, जो कभी सामने नहीं आ पाएंगे. किसी क्राइम इन्वेस्टिगेशन के सिलसिले में नहरों में गोता लगाकर शवों और लापता लोगों को खोजने वाले एक गोताखोर ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के इन नहरों का काला सच बताया. इनकी गहराईयों में अनगिनत राज डेडबॉडी के रूप में दफन हैं.

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दिल्ली और आसापास के इलाकों की नहरों में दफन है कई काले राज (Photo - ITG)
दिल्ली और आसापास के इलाकों की नहरों में दफन है कई काले राज (Photo - ITG)

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में नहरों की एक अलग ही रहस्यमय दुनिया है. इन नहरों से मिलने वाले कई मानव अवशेष आज भी अबुझ पहेली बनी हुई है.  क्योंकि इनसे ऐसी- ऐसी  लाश और मानव अवशेष मिले हैं. जिससे इनके पीछ हुए क्राइम का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है. 

इस रीजन के नहरों को इन्वेस्टिगेट करने और इनमें गोता लगाने वाले एक गोताखोर ने आजतक रेडियो के साथ जो अपना अनुभव शेयर किया, वो हैरान करने वाला है. तो चलिए जानते हैं आखिर इन नहरों और इनकी गहराईयों में दबी रहस्यमय दुनिया की क्या है कहानी? आखिर कैसे- कैसे काले सच छिपाकर इन नहरों ने रखा है. 

गोताखोर आशु मलिक ने बताया कि इन नहरों में हजारों डेड बॉडी डंप की जाती हैं. इनमें 10-12 साल की लड़कियों से रेप करके उनकी लाश को भी फेंका जाता है. तो  तांत्रिक क्रिया में बलि के लिए इस्तेमाल करके छोटे- छोटे बच्चों की बॉडी भी फेंक दी जाती है. कत्ल, अवैध संबंधों, बदला, लूटपाट, रेप और दूसरे क्राइम को छुपाने के लिए लाखों लोगों को मारकर इन नहरों में फेंक दिया जाता है. जिनकी लाश सालों साल गुमनामी के अंधेरे में इन नहरों के अंदर दबे रहते हैं. 

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 कुछ क्राइम तो ऐसे होते हैं, जिनसे जुड़े अवशेष दिल दहला देते हैं. कई ऐसे मौके आए हैं जब नहरों से एक साल, दो साल, 8 महीने, 10 साल ऐसे- ऐसे उम्र के बच्चों के क्षत- विक्षत शव मिले हैं. इन बच्चों को तांत्रिक क्रिया में इस्तेमाल करके उनके शवों पर नींबू- मिर्च बांधकर और सिंदूर वगैरह लगाकर नहरों में प्रवाहित कर दिया जाता है. 

आशु ने बताया कि 2012 में एक बॉडी मुझे ऐसी मिली जिसका गहरा प्रभाव मेरे दिमाग पर पड़ा. वैसे मैं डेड बॉडियों से कभी नहीं डरता. क्योंकि, मेरा काम ही नदियों और नहरों से ऐसी लाशों को बाहर निकालना है. उन्होंने बताया कि मेरी दो शादियां हुई है. मेरी पहली पत्नी कैंसर से मर गई थी. उसके इलाज के लिए मैंने अपना सबकुछ बेच दिया. उस वक्त भी मैं इतना नहीं टूटा और परेशान हुआ, जितना एक डेड बॉडी के मिलने से हुआ था. 

इस डेड बॉडी ने मेरे दिमाग पर छोड़ दी ऐसी छाप
मुझे एक बार एक बच्ची की डेड बॉडी मिली. वह एक साल की बच्ची थी. उसके सिर और दोनों कंधों पर कील ठुकी हुई थी और पूरे शरीर में नींबू मिर्ची लिपटी हुई थी. उसके दोनों हाथ- पैर काट दिए गए थे. वह बच्ची जिसने दुनिया को जाना भी नहीं था. दुनिया देखी भी नहीं थी और उसके साथ ऐसा वहशीपना किया गया. 

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आशु ने बताया कि मैंने वो दौर देखा है, जब राजस्थान की नदियों और नहरों से एक बार में 5-5, 6-6 डेड बॉडियां निकाली जाती थी. उनका पंचनामा तक नहीं होता था और उन्हें किनारे में लाकर आग लगा दी जाती थी. मैंने ऐसे दृश्य देखे हैं कि नहरों से डेड बॉडियों को निकालकर पुल पर रख दिया गया है. एक- दो नहीं, एक साथ 25 बॉडी नहर से निकालकर पुल पर रखी देखी हैं मैंने. 

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उन्होंने बताया कि इन नहरों के अंदर आज भी हजारों डेड बॉडी दफन हैं, जो अंतिम संस्कार के लिए तरस रही हैं. नहरों के अंदर हजारों कार और बाइक पड़ी हुई हैं. ऐसे कई राज नहरों के अंदर दफन हैं, जिनके बारे में दुनिया कभी नहीं जान सकेगी. एक- एक पुल पर हजारों 

26 साल बाद एक परिवार कार सहित नहर से मिला
2000 से 2026 तक एक परिवार के चार लोगों के शव 26 साल बाद मिले. सोचिए 26 साल तक एक पूरे परिवार की डेड बॉडी नहीं मिल पाई. यह पंजाब के रोपड़ के पास की घटना है. परिवार एक शादी से आ रहा था और उनकी कार एक नहर में चली गई. इतने दिनों बाद एक दूसरी डेड बॉडी की खोज हो रही थी. उस वक्त 26 साल पुराने मामले से जुड़ी लाशें और गाड़ी मिली. आज इतने साल बाद जब पूछताछ शुरू हुई तब पता चला कि यहां से 26 साल पहले कार सहित एक परिवार गायब हुआ था. 

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इसी तरह की घटना पटियाला में हुई. एक शख्स की कंकाल नहर से कार सहित मिली, जो स्टीयरिंग पकड़े बैठा हुआ था. उसके शरीर के मांस गल गए थे और सिर्फ कंकाल बचा था और वह सीट पर बैठे अपने स्टीयरिंग पकड़े हुए था. जब उसे निकाला गया तो पता चला कि वह कोतवाली थाना पटियाला से 8 साल पहले लापता है. 

लाखों लापता लोगों के शव नहरों में दफन हैं...
ऐसे लाखों लोग हैं, जो पंजाब से, हरियाणा से, दिल्ली से लापता है. इन लोगों के शव आज भी किसी न किसी नहर में पड़े होंगे, लेकिन हम उसका पता नहीं लगा पाए हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अबतक 8 लाख लोग इस रीजन से लापता हुए हैं और ऐसे ही लोगों के शव नहरों से मिलते हैं. ये आंकड़े तो वो हैं जो थाने में दर्ज हुए हैं.

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 इसके अलावा कई ऐसे हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है. इनमें अनाथ बच्चे, सड़कों पर मांगने वाले, साधु, फुटपाथ पर सोने वाले ऐसे कई लोग गायब हुए हैं, जिनके लापता होने की कभी किसी ने सूचना ही दर्ज नहीं कराई. वे भी ऐसे ही किसी नहरों में पड़े होंगे. जब ऐसी डेड बॉडी मिलती है तो उनकी शिनाख्त तक नहीं हो पाती. 

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