अगर आप यह सोचते हैं कि नकली सामान सिर्फ मोबाइल, दवाइयों या ब्रांडेड कपड़ों तक ही सीमित है, तो यह खबर आपको चौंका सकती है. यूरोप में 2 लाख से ज्यादा ऐसे नकली कंडोम पकड़े गए हैं, जो चीन से भेजे गए थे.
सबसे हैरानी की बात यह है कि इन्हें खिलौना बताकर यूरोपीय संघ के सख्त सुरक्षा नियमों से बचाते हुए बाजार तक पहुंचाया गया. अधिकारियों का कहना है कि अगर ऐसे कंडोम लोगों तक पहुंचते हैं, तो इससे यौन संचारित संक्रमण (STI), अनचाही गर्भावस्था और स्वास्थ्य से जुड़े दूसरे गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं.
यूरोप की धोखाधड़ी रोधी एजेंसी यानी यूरोपियन एंटी-फ्रॉड ऑफिस (OLAF)ने इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है. जांच में पता चला कि चीन से 2 लाख से ज्यादा नकली कंडोम यूरोप भेजे गए थे. इनकी कुल कीमत 2 लाख यूरो से भी ज्यादा बताई गई है.
खिलौने बताकर पार कराई गई खेप
जांच में सामने आया कि इन कंडोम को आधिकारिक दस्तावेजों में 'टॉय' यानी खिलौना बताया गया था. ऐसा इसलिए किया गया ताकि यूरोपीय संघ के मेडिकल डिवाइस से जुड़े सख्त नियमों और गुणवत्ता जांच से बचा जा सके. इसी वजह से ये नकली उत्पाद बिना जरूरी टेस्टिंग के यूरोप पहुंच गए.
यूरोप में कंडोम पर होते हैं सख्त टेस्ट
यूरोप में कंडोम को मेडिकल डिवाइस माना जाता है. इसलिए बाजार में आने से पहले इन पर कई तरह की जांच होती है. इनमें बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्म जीवों की जांच, शरीर के लिए सुरक्षित होने की पुष्टि, लीकेज टेस्ट, सही आकार, एक्सपायरी और लंबे समय तक सुरक्षित रहने जैसी कई गुणवत्ता जांच शामिल हैं.
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लेकिन चीन से आए इन नकली कंडोम ने इन सभी सुरक्षा प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया. यूरो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय आयोग के एंटी-फ्रॉड ऑफिस के महानिदेशक पेट्र क्लेमेंट ने कहा कि नकली कंडोम बेहद खतरनाक होते हैं. इनकी न तो ठीक से जांच हुई होती है, न इन पर किसी तरह का गुणवत्ता नियंत्रण होता है और न ही ये सुरक्षित माने जा सकते हैं.
तीन देशों में हुई बड़ी कार्रवाई
जांच के दौरान रोमानिया, सर्बिया और स्पेन में इन नकली कंडोम की बड़ी खेप जब्त की गई.अधिकारियों के मुताबिक, इन्हें एक मशहूर ब्रांड के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके बेचा जा रहा था, ताकि लोग इन्हें असली समझकर खरीद लें.
हालांकि, जांच एजेंसी ने उस ब्रांड का नाम सार्वजनिक नहीं किया है. यह भी नहीं बताया गया कि ये कंडोम किन-किन देशों में बेचे गए या 2 लाख से ज्यादा कंडोम में से कितने लोगों तक पहुंच चुके थे.
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यूरोपियन एंटी-फ्रॉड ऑफिस का कहना है कि नकली सामान की तस्करी करने वाले गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करते हैं. ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कौन-सा नकली सामान किस ग्राहक तक पहुंचा. इसी वजह से उन लोगों को अलग-अलग चेतावनी देना भी लगभग नामुमकिन है, जिन्होंने इन्हें खरीदा हो सकता है.
चीन तक पहुंची जांच
यूरोपीय अधिकारियों ने चीन की एजेंसियों के साथ मिलकर जांच की और उन शिपमेंट्स के पीछे मौजूद निर्यातक की पहचान भी कर ली. हालांकि, जांच को ध्यान में रखते हुए उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है.