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Photos: जंग में पाक के नीले ड्रम वाला धंधा चौपट, ऐसा है ईरानी पेट्रोल की तस्करी का गेम!

1 करोड़ लीटर सप्लाई पर लगा ब्रेक
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सोशल मीडिया पर इस खबर की चर्चा है कि ईरान में जारी संघर्ष का असर पाकिस्तान, खासकर बलोचिस्तान तक पहुंच गया है. बॉर्डर पर बढ़ी सुरक्षा और सख्ती के कारण ईरान से पेट्रोल-डीजल की तस्करी में भारी गिरावट आई है और कई जगहों पर यह लगभग ठप हो गई है.

(Photo:AFP)

जंग का असर: ईरान से फ्यूल तस्करी ठप
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पाकिस्तान के बलोचिस्तान में ईरान से सस्ते पेट्रोल-डीजल की तस्करी कई सालों से चल रही थी और यह स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती थी. लेकिन ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद यह नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ और तस्करी का कारोबार लगभग ठप हो गया.
(Photo:AFP)

हजारों परिवारों की रोजी पर असर सस्ते फ्यूल से चलता था पूरा सिस्टम
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोजाना आने वाला करीब 1 करोड़ लीटर सस्ता ईरानी फ्यूल अब लगभग बंद हो चुका है. इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है. बलोचिस्तान के हजारों परिवार बेरोजगार हो गए हैं और अब लोगों को महंगा पाकिस्तानी पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है.

(Photo:AFP)

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हजारों परिवारों की रोजी पर असर सस्ते फ्यूल से चलता था पूरा सिस्टम
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इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बॉर्डर पर बढ़ी सख्ती है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी है. कई क्रॉसिंग्स बंद या नियंत्रित हैं, जिससे तस्करी के रास्ते लगभग खत्म हो गए हैं.

(Photo:AFP)

हजारों परिवारों की रोजी पर असर सस्ते फ्यूल से चलता था पूरा सिस्टम
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बलोचिस्तान के मकरान, ग्वादर, केच, पंजगुर और चागी जैसे इलाकों में हजारों लोग इस काम से जुड़े थे. वे मोटरसाइकिल, पिकअप और मिनी ट्रकों से ईरान से फ्यूल लाकर बेचते थे. यह उनके लिए मुख्य रोजी-रोटी का जरिया था.

(Photo:AFP)

हजारों परिवारों की रोजी पर असर सस्ते फ्यूल से चलता था पूरा सिस्टम
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इसका असर पूरे पाकिस्तान पर पड़ रहा है. होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग प्रभावित होने से तेल आयात पर दबाव बढ़ा है. सरकार ईंधन बचाने की अपील कर रही है. पहले इस तस्करी में प्रति लीटर 40-100 रुपये तक मुनाफा होता था, जो अब लगभग खत्म हो गया है.

(Photo:PTI)

हजारों परिवारों की रोजी पर असर सस्ते फ्यूल से चलता था पूरा सिस्टम
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2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना करीब 10 मिलियन लीटर ईरानी फ्यूल जमीन और समुद्री रास्तों से पाकिस्तान पहुंचता था. यह सस्ता ईंधन स्थानीय ट्रांसपोर्ट, रिक्शा और ट्रकों को चलाता था और पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखता था.

(Photo:AP)

हजारों परिवारों की रोजी पर असर सस्ते फ्यूल से चलता था पूरा सिस्टम
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28 फरवरी 2026 के बाद हालात तेजी से बदले. सीमा पर सख्ती बढ़ी और तस्करी नेटवर्क टूट गया. क्वेटा के तस्कर अब्दुल रऊफ के मुताबिक, पहले 300 लीटर आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब एक गैलन तक जुटाना मुश्किल हो गया है.

(Photo:AP)

हजारों परिवारों की रोजी पर असर सस्ते फ्यूल से चलता था पूरा सिस्टम
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सस्ते फ्यूल की कमी से स्थानीय कारोबार प्रभावित हो गए हैं. ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ है और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ गए हैं. कई परिवार बेरोजगारी की कगार पर हैं और आर्थिक हालात लगातार खराब हो रहे हैं.

(ईरान पर हुए हमले की एक तस्वीर-AP)

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