बर्फीले तूफान (Winter Storm) तब बनते हैं जब नम हवा वायुमंडल में ऊपर उठती है, जिससे जमीन के पास कम दबाव बनता है और हवा में बादल छा जाते हैं. पहाड़ों पर ऐसी हवाओं को ऊपर की ओर जाने में मदद मिलती जिसके कारण तेज हवा के साथ बड़ी मात्रा में बर्फ गिरती है. बर्फीले तूफान में 2 इंच बर्फ से ही यातायात और परिवहन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि चिकनी सड़कों पर गाड़ियों को चलाने में कठिनाई आती है और फिसलने का डर होता है. अगर बर्फीले तूफान के कारण 6 इंच से अधिक की बर्फबारी विघटनकारी होती है.
America के north-east में बर्फीले तूफान का कहर. 10,000+ flights cancel, 5.7 लाख घरों की बिजली गुल और कई शहरों में emergency घोषित. जानें full impact.
पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है. लगातार एक्टिव हो रहे दो पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के चलते जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल में भारी बर्फबारी और बारिश की संभावना है, जिसका सीधा असर उत्तर भारत के तापमान और दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण स्तर पर भी देखने को मिलेगा.
जापान में रिकॉर्ड तोड़ भारी बर्फबारी से हालात गंभीर हैं. विंटर स्टॉर्म से मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई, जबकि 100 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित आओमोरी और सप्पोरो हैं, जहां छत साफ करते समय गिरने से ज्यादातर मौतें हुईं. रविवार के आम चुनाव पर भी असर पड़ सकता है.
जापान के होक्काइडो में भयंकर बर्फीले तूफान से सड़कें बंद हो गई हैं. न्यू चितोसे एयरपोर्ट पर दर्जनों फ्लाइट्स कैंसल हुई. 7000 यात्री रातभर फंसे रहे. अमोरी शहर में जनवरी में 167 सेमी बर्फ गिरी. 81 साल का रिकॉर्ड टूटा है. सी ऑफ जापान इफेक्ट और ग्लोबल वार्मिंग से भारी बर्फबारी बढ़ी है.
उत्तर और मध्य भारत में पश्चिमी विक्षोभ का कहर जारी है. हिमालयी इलाकों में भारी बर्फबारी और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है. वहीं, राजस्थान के कोटा में करंट से एक युवक की मौत हो गई और मध्य प्रदेश के खरगोन में ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है.
जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी के कारण पुंछ जिले में मुगल रोड को बंद कर दिया गया है. बर्फ जमने से सड़क पर फिसलन भी हो गई है. प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि मौसम साफ होने और जरुरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकले.
हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी और बारिश से 1,250 से ज्यादा सड़कें बंद हैं. सड़कों की बहाली के लिए 3,500 मशीनें लगाई गई हैं. कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी है.
बर्फीले तूफान के कारण अमेरिका में टेनेसी, मिसिसिपी और लुइसियाना में सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हैं. टेक्सास, केंटकी, जॉर्जिया, वेस्ट वर्जीनिया और अलबामा में इसका काफी असर है.
इस बार जम्मू कश्मीर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड ने पर्यटकों की संख्या में वृद्धि कर दी है. जनवरी के अंत तक तीनों राज्यों में झमाझम बर्फबारी देखी गई है. पहाड़ी रास्तों पर लंबी कतारें और होटल बुकिंग फुल होना आम बात हो गई है. बर्फबारी से पोखर, नदियां जमी हुई हैं और प्राकृतिक सौंदर्य ने पर्यटकों को आकर्षित किया है. हालांकि, स्थानीय लोगों को रास्तों में जाम और गाड़ियों के फंसने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
अमेरिका, रूस, यूरोप में जनवरी आफत वाली सर्दी ला रही है. उत्तरी ध्रुव पर बनने वाले पोलर वॉर्टेक्स की वजह से ये हो रहा है. जेट स्ट्रीम भी बिगड़ी हुई है, जिससे बर्फबारी को मदद मिल रही है. आर्कटिक हवा नीचे आ रही है. मैक्सिको की खाड़ी से नमी मिल रही है. इसलिए बर्फीली बारिश भी हो रही है.
जनवरी का महीना बीत रहा है, और बीतते जनवरी में पहाड़ों पर जोरदार बर्फबारी हो रही है, दो तीन दिन पहले तक लग रहा था कि सर्दियां खत्म होने को हैं और इस बार सीजन में बर्फबारी न के बराबर हुई है, मगर सर्दियां फिर से लौटी हैं. गुजरता जनवरी भारी बर्फबारी की गवाही दे रहा है. देश के अलग अलग हिस्सों से आई तस्वीरों से पता चल रहा है कि पहाड़ों पर इन दिनों अद्भुत छटा है. सबसे ज्यादा बर्फबारी जम्मू कश्मीर में रिकॉर्ड की गई है, वहां के तमाम हिल स्टेशन सफेद चादर से ढंक चुके हैं, भारी बर्फबारी के बीच तमाम इलाके जन्नत बन चुके हैं. इस बर्फबारी के मौसम का एनज्वॉय करने के लिए देश के कोने-कोने से लोग घाटी में पहुंचे हैं.
अमेरिका में भीषण विंटर स्टॉर्म का कहर देखने को मिला है. हज़ारों उड़ानें रद्द कर दी गईं और 1 लाख से ज्यादा लोग बिजली संकट से जूझ रहे हैं. तूफ़ान की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका है और कई दिनों तक बिजली गुल रह सकती है.
Indian Army Day 2026: द्रास (कारगिल) में LOC पर -25 डिग्री या इससे भी ज्यादा ठंड में भारतीय सेना के जवान ड्यूटी डटे रहते हैं. आइए जानते हैं वो कैसे सर्दी सहन कर पाते हैं.
कड़कड़ाती ठंड में दिल्ली बर्फीली हवाओं से जूझ रही है. सोमवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली वालों को तीन डिग्री का टॉर्चर झेलना पड़ा. अगले दो से तीन दिन में हालात इससे भी बदतर होने वाले हैं. मौसम विभाग के मुताबिक पारा अभी और गिरेगा. 15 जनवरी के बाद बर्फ और बारिश दोनों मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं. दिल्ली ठंड से बेहाल है तो वहीं राजस्थान से लेकर हिमाचल तक पारा माइनस में पहुंच गया है. हालात ये हैं कि नदी-नाले-झरने सब जम गए हैं. यहां तक कि नलों में आने वाला पानी भी जम गया है.
न्यूयॉर्क में क्रिसमस के बाद आए विंटर स्टॉर्म से 4.3 इंच बर्फ गिरी. सेंट्रल पार्क समेत पार्क और घरों पर मोटी बर्फ की चादर जम गई, जो आइस एज जैसा नजारा दे रही है. हल्की बर्फीली बारिश से सतहें चमकदार हुईं. फ्लाइट्स प्रभावित हुईं, लेकिन शहर जल्द सामान्य हो गया. वायरल तस्वीरें खूबसूरत दृश्य दिखा रही हैं.
न्यूयॉर्क में बर्फीले तूफान के कारण आपातकाल घोषित कर दिया गया है. गवर्नर ने तूफान की चेतावनी दी है जबकि नेशनल वेदर सर्विस ने पांच से आठ इंच तक बर्फबारी की संभावना जताई है. दक्षिणी कैलिफोर्निया में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है. तेज हवाओं और बारिश से दो लोगों की मृत्यु हुई है. देखें US टॉप-10.
सऊदी अरब के रेगिस्तान में दुर्लभ बर्फबारी ने जलवायु परिवर्तन की बड़ी चेतावनी दी है. ताबुक जैसे इलाकों में बर्फ से ढके पहाड़ और ऊंट वायरल हो रहे हैं. ऊंट ठंड में भी आराम से जीवित रहते हैं. भारत के लिए यह संकेत है कि अजीब मौसम से निपटने के लिए सख्त नियम जरूरी है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने चीन दौरे पर है, जहां वह चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिंग से मुलाकात करेंगे और यूक्रेन युद्ध विराम, व्यापार और अन्य मुद्दों पर चर्चा करेंगे.वहीं अमेरिका के नॉर्थ ईस्ट में बर्फीलें तूफान का कहर बर्पा है, जिसके चलते न्यू हैम्पशायर में यातायात काफी प्रभावित हुए साथ ही स्कूल, कॉलेज सब बंद कर दिए गए है.
दुनिया का मौसम इस समय पूरी तरह बेकाबू हो चुका है. जमीन से 20-30 km ऊपर बहने वाली हवा यानी QBO नवंबर में ही पलट गई, जो आमतौर पर जनवरी-फरवरी में बदलती है. भारत समेत पूरी दुनिया पर 2025-26 में इसका भयंकर असर पड़ेगा. यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब भी बाढ़, ठंड और सूखे की दोहरी मार झेल रहे हैं. यह कोई स्थानीय मौसम नहीं, पूरा ग्लोबल सिस्टम टूटने की शुरुआत है.
अटलांटिक महासागर की समुद्री धारा खत्म हो रही है. आइसलैंड ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा घोषित किया. क्योंकि यह धारा यूरोप को गर्म रखती है. खत्म होने पर यूरोप में हिमयुग आ जाएगा. अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका में बारिश का पैटर्न बिगड़ सकता है. किसानों को नुकसान होगा. वैज्ञानिक चेताते हैं- अगले दशकों में ये संकट जरूर आएगा.
अक्टूबर में उत्तर भारत के मौसम में महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किया गया है. कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में रिकॉर्ड बर्फबारी हुई है, जबकि मैदानी इलाकों में बेमौसम बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है. इस मौसमी बदलाव के कारण सेब और मक्के की फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं और कई महत्वपूर्ण मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं.