सतीश महाना (Satish Mahana) उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं. वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के 18वें अध्यक्ष के तौर पर साल 2022 से जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह लगातार आठ बार विधायक चुने गए हैं. उनकी चुनावी राजनीति की शुरुआत कानपुर कैंट विधानसभा सीट से हुई थी. बाद में उन्होंने कानपुर की महाराजपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना शुरू किया.
साल 2009 में सतीश महाना ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर कानपुर लोकसभा सीट से आम चुनाव भी लड़ा था. उत्तर प्रदेश की 16वीं विधानसभा में वह भाजपा के उप नेता रहे.
साल 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में आवास और शहरी विकास राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी. उन्होंने 27 अक्टूबर 1997 से 8 मार्च 2002 तक इस पद पर काम किया. साल 2012 के बाद से वह महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सतीश महाना ने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मनोज कुमार शुक्ला को 91,826 वोटों के अंतर से हराया था. मार्च 2017 में उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था. उनके पास औद्योगिक विकास विभाग की जिम्मेदारी रही.
साल 2025 में पुणे में आयोजित 14वें भारतीय छात्र संसद कार्यक्रम में उन्हें आदर्श विधानसभा अध्यक्ष पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
उनका जन्म 14 अक्टूबर 1960 को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था. उनके पिता का नाम राम अवतार महाना था. सतीश महाना का परिवार हिंदू खत्री परिवार से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कानपुर के सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल की.
सतीश महाना ने साल 1981 में अनीता महाना से शादी की. उनके परिवार में एक बेटा करण महाना और एक बेटी नेहा महाना हैं.
उत्तर प्रदेश के विधानसभा में राम मंदिर के चंदा चोरी के मुद्दे पर सपा और विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा है, जिसे लेकर मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ. सपा विधायकों के तेवर से विधानसभा स्पीकर सतीश महाना काफी आहत नजर आए और उन्होंने कहा कि मैं इस पद के काबिल भी हूं या नहीं, सोचूंगा.
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बयान से सियासत गरमा गई है. महाना ने कहा कि जिसे लगता है कि उसका दान चोरी हुआ, संभव है उसने सच्ची श्रद्धा से दान न दिया हो. इस पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को कटघरे में खड़ा करने के बजाय मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.