पायसम (Payasam) भारतीय खानपान और पारंपरिक मीठा व्यंजन है. इसे खास तौर पर दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बनाया जाता है. पायसम का उल्लेख दक्षिण भारतीय भोजन परंपरा के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ है. अलग अलग क्षेत्रों में इसे बनाने की सामग्री और तरीका अलग होता है.
पायसम मुख्य रूप से दूध, चावल, गुड़ या चीनी और सूखे मेवों से तैयार किया जाता है. कुछ स्थानों पर चावल की जगह सेवई, साबूदाना, गेहूं, दाल या अन्य अनाज का उपयोग किया जाता है. नारियल के दूध से तैयार किया जाने वाला पायसम भी कई दक्षिण भारतीय घरों में बनाया जाता है. इसमें इलायची, काजू, किशमिश और नारियल जैसी सामग्री का इस्तेमाल क्षेत्रीय पसंद के अनुसार किया जाता है.
केरल में पायसम को विशेष अवसरों और पारंपरिक भोज के दौरान परोसा जाता है. यहां इसे सद्या के भोजन का एक हिस्सा माना जाता है. केरल में अडा प्रदमन, पाल पायसम और परिप्पु पायसम जैसी अलग अलग किस्में प्रचलित हैं. अडा प्रदमन में चावल से बनी अडा, गुड़ और नारियल के दूध का इस्तेमाल किया जाता है. पाल पायसम में दूध और चावल प्रमुख सामग्री होते हैं.
तमिलनाडु में पायसम को पायसम या पायस के नाम से जाना जाता है. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी इसे पारंपरिक मिठाई के रूप में तैयार किया जाता है. कर्नाटक में इसी तरह की तैयारी को पायसा कहा जाता है. उत्तर भारत में भी खीर के रूप में इससे मिलती जुलती मिठाई बनाई जाती है.
पायसम की तैयारी में सबसे पहले चुनी गई मुख्य सामग्री को पकाया जाता है. इसके बाद दूध, गुड़ या चीनी और अन्य सामग्री मिलाई जाती है. इसे धीमी आंच पर पकाकर गाढ़ा किया जाता है. अलग अलग व्यंजनों में पकाने का समय और सामग्री की मात्रा अलग रहती है.
पायसम का संबंध धार्मिक आयोजनों, त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और पारंपरिक भोज से भी है. कई दक्षिण भारतीय मंदिरों में इसे प्रसाद के रूप में भी तैयार किया जाता है. घरों में इसे जन्मदिन, पूजा और विशेष पारिवारिक अवसरों पर बनाया जाता है. क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार इसके स्वाद और सामग्री में बदलाव देखा जाता है.