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पारले

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पारले (Parle Products) भारत की एक बड़ी और पुरानी फूड कंपनी है, जो बिस्किट और कन्फेक्शनरी उत्पाद बनाने के लिए जानी जाती है। इसका सबसे प्रसिद्ध ब्रांड Parle-G है, जिसे दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट ब्रांड्स में गिना जाता है. कंपनी का मुख्यालय मुंबई में स्थित है.

पारले की शुरुआत साल 1929 में चौहान परिवार ने की थी. कंपनी के संस्थापक मोहनलाल चौहान थे, जो मूल रूप से गुजरात के वलसाड जिले के पास स्थित पर्डी क्षेत्र से थे. बेहतर रोजगार की तलाश में वह मुंबई आए थे. शुरुआत में उन्होंने सिलाई का काम किया, लेकिन उसमें ज्यादा फायदा नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने खाने-पीने के व्यवसाय में कदम रखा और स्नैक्स बेचने लगे. बाद में उन्होंने एक बेकरी शुरू की, जहाँ ब्रेड, बन, रस्क, स्कोन, नानखटाई और दूसरे बेकरी उत्पाद बनाए जाते थे.

मोहनलाल चौहान के पांच बेटे थे, मानेकलाल, पितांबर, नरोत्तम, कांतिलाल और जयंतीलाल. सभी भाई अपने पिता के साथ मिलकर कारोबार संभालते थे.

कंपनी ने 1939 में बिस्किट बनाना शुरू किया. उस समय उन्हें केवल ब्रिटिश सेना को बिस्किट सप्लाई करने का लाइसेंस मिला था. भारत की आजादी के बाद 1947 में पारले ने अपने ग्लूकोज बिस्किट को ब्रिटिश बिस्किट के भारतीय विकल्प के रूप में प्रचारित किया. इसके बाद Parle-G धीरे-धीरे पूरे देश में लोकप्रिय हो गया.

समय के साथ कंपनी ने कई दूसरे उत्पाद भी लॉन्च किए, जिनमें 20-20, Magix, Milkshakti, Melody, Mango Bite, Poppins, Kismi, Monaco और KrackJack जैसे ब्रांड शामिल हैं.

1977 में जब मोरारजी देसाई सरकार ने Coca-Cola को भारत छोड़ने के लिए कहा, तब चौहान परिवार ने इसे एक अवसर के रूप में देखा और कोल्ड ड्रिंक के व्यवसाय में उतर गए. इस दौरान Gold Spot, Thums Up और Frooti जैसे ब्रांड लोकप्रिय हुए.

बाद में मूल पारले कंपनी परिवार के अलग-अलग हिस्सों में बंट गई. जयंतीलाल चौहान अपने चार बड़े भाइयों से अलग हो गए. चार बड़े भाइयों के पास बिस्किट व्यवसाय रहा, जबकि जयंतीलाल ने पेय पदार्थ (बेवरेज) का कारोबार संभाला. आगे चलकर यह कारोबार भी उनके दोनों बेटों के बीच विभाजित हुआ.

आज “Parle” नाम से तीन अलग-अलग कंपनियां काम करती हैं. पहली है Parle Products, जो बिस्किट और कन्फेक्शनरी उत्पाद बनाती है. दूसरी है Parle Agro, जो Frooti और Appy जैसे पेय पदार्थ ब्रांड संभालती है. तीसरी कंपनी Parle Bisleri है, जिसे जयंतीलाल चौहान के छोटे बेटे रमेश चौहान संभालते हैं.

हालांकि कंपनियां अलग-अलग हैं, लेकिन आज भी तीनों कंपनियां “Parle” नाम का इस्तेमाल करती हैं.

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