मैसूर पाक (Mysore Pak) दक्षिण भारत की पारंपरिक मिठाइयों में शामिल एक प्रसिद्ध मिठाई है. समय के साथ यह मिठाई कर्नाटक के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी लोकप्रिय हुई है. मैसूर पाक का नाम भी मैसूर शहर से जुड़ा हुआ है, जहां से इसकी पहचान बनी.
मैसूर पाक बनाने में मुख्य रूप से बेसन, घी और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है. इन सामग्रियों को एक निश्चित तरीके से मिलाकर पकाया जाता है. मिश्रण को लगातार चलाते हुए तैयार किया जाता है, जिससे इसमें बेसन अच्छी तरह पक जाए. इसके बाद तैयार मिश्रण को एक थाली या चौड़े बर्तन में फैलाकर जमने के लिए रखा जाता है. जमने के बाद इसे छोटे या चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है.
मैसूर पाक की बनावट बनाने की विधि और सामग्री के अनुपात पर निर्भर करती है. कुछ जगहों पर इसे नरम और घी से भरपूर बनाया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर इसकी बनावट थोड़ी सख्त रखी जाती है. घरों और मिठाई की दुकानों में इसे बनाने की अलग अलग विधियां भी देखने को मिलती हैं.
मैसूर पाक के इतिहास को मैसूर के राजघराने से भी जोड़ा जाता है. इससे जुड़ी प्रचलित जानकारी के अनुसार यह मिठाई मैसूर पैलेस की रसोई में तैयार की गई थी. कहा जाता है कि राजमहल की रसोई में काम करने वाले रसोइये काकासुरा मडप्पा ने इसे तैयार किया था. बाद में यह मिठाई लोगों के बीच पहुंची और मैसूर की पहचान से जुड़ गई.
दक्षिण भारत में मैसूर पाक त्योहारों, पारिवारिक कार्यक्रमों और विशेष अवसरों पर भी बनाया और खरीदा जाता है. दीपावली, दशहरा, विवाह और अन्य समारोहों में मिठाई के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है. कर्नाटक के कई शहरों में मिठाई की दुकानों पर मैसूर पाक आसानी से मिल जाता है.
आज मैसूर पाक पारंपरिक मिठाई के साथ साथ दक्षिण भारतीय खानपान की एक पहचान के रूप में भी जाना जाता है. इसे लोग घर पर बनाने के अलावा मिठाई की दुकानों से भी खरीदते हैं. अलग अलग स्थानों पर इसकी विधि और स्वाद में थोड़ा अंतर मिल सकता है, लेकिन इसका मूल आधार बेसन, घी और चीनी ही रहता है.