लोबिया (Lobia) एक प्रमुख दलहनी फसल है, जिसे भारत के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर उगाया और खाया जाता है. इसे अलग-अलग क्षेत्रों में चौला, चवला या बरबटी के नाम से भी जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Vigna unguiculata है. लोबिया की खेती मुख्य रूप से इसके पौष्टिक दानों और हरी फलियों के लिए की जाती है. भारत के अलावा अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अमेरिका के कई देशों में भी इसका उत्पादन और उपयोग किया जाता है.
लोबिया प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फोलेट और कई आवश्यक विटामिनों का अच्छा स्रोत माना जाता है. शाकाहारी भोजन में यह प्रोटीन की पूर्ति करने वाली महत्वपूर्ण फसलों में शामिल है. इसके दानों में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए लाभदायक माना जाता है, जबकि आयरन और फोलेट शरीर में रक्त निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
भारत में लोबिया की खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में की जाती है. इसकी खेती खरीफ, रबी और कुछ क्षेत्रों में जायद मौसम में भी की जाती है. यह फसल गर्म जलवायु में अच्छी तरह बढ़ती है तथा कम पानी और अपेक्षाकृत कम उपजाऊ मिट्टी में भी उत्पादन देने की क्षमता रखती है.
लोबिया का पौधा मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) में भी सहायक होता है. इसकी जड़ों में पाए जाने वाले जीवाणु वातावरण की नाइट्रोजन को मिट्टी में उपलब्ध कराने में मदद करते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बनाए रखने में योगदान मिलता है. इसी कारण इसे फसल चक्र (Crop Rotation) में भी शामिल किया जाता है.
खाद्य उपयोग की बात करें तो लोबिया से दाल, सब्जी, करी, सलाद, सूप, पुलाव और विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. इसकी हरी फलियां भी सब्जी के रूप में खाई जाती हैं. कई क्षेत्रों में अंकुरित लोबिया का उपयोग भी किया जाता है.
Benefits Of Cowpeas lobia: प्रोटीन में हाई, यह मांसपेशियों के निर्माण और वेट लॉस में सहायता करता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन में सुधार करता है और गट हेल्थ को सपोर्ट करता है, जबकि इसके एंटीऑक्सीडेंट इम्यूनिटी और त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं. लोबिया आंखों की हेल्थ और मजबूत हड्डियों के लिए भी फायदेमंद है. गर्भवती महिलाओं को इससे आयरन और फोलिक एसिड मिलता है.
इसरो ने शनिवार को कहा कि पीएसएलवी-सी60 पीओईएम-4 प्लेटफॉर्म पर अंतरिक्ष में भेजे गए लोबिया के बीज मिशन के लॉन्च के चार दिनों के अंदर माइक्रोग्रैविटी परिस्थितियों में अंकुरित हो गए हैं. पीएसएलवी-सी 60 पीओईएम-4 पर वीएसएससी के क्रॉप्स प्रयोग में 4 दिनों में लोबिया के बीजों को सफलतापूर्वक अंकुरित किया है. जल्द ही इनमें पत्तियां निकलने की उम्मीद है.