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कढ़ी

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कढ़ी (Kadhi) भारत का एक लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से दही और बेसन से तैयार किया जाता है. यह देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से बनाई जाती है. कई जगह इसे चावल के साथ परोसा जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में लोग इसे रोटी, पराठे या बाजरे की रोटी के साथ भी खाना पसंद करते हैं. कढ़ी भारतीय घरों के रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा होने के साथ-साथ कई विशेष अवसरों और पारिवारिक आयोजनों में भी बनाई जाती है.

कढ़ी बनाने के लिए सबसे पहले दही और बेसन का घोल तैयार किया जाता है. इसके बाद इसमें पानी मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. पकने के दौरान इसमें हल्दी, नमक और अन्य मसाले डाले जाते हैं. अंत में तेल या घी में राई, जीरा, मेथी, करी पत्ता, सूखी लाल मिर्च, हींग और अन्य मसालों का तड़का लगाया जाता है. कई जगह इसमें पकौड़े भी डाले जाते हैं, जिन्हें बेसन से तैयार किया जाता है.

भारत के अलग-अलग राज्यों में कढ़ी का स्वाद और बनाने का तरीका अलग हो सकता है. राजस्थान की कढ़ी अपेक्षाकृत पतली होती है, जबकि पंजाब में पकौड़े वाली कढ़ी अधिक प्रचलित है. गुजरात की कढ़ी में हल्की मिठास होती है. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी कढ़ी की अपनी-अपनी स्थानीय शैली देखने को मिलती है. हर क्षेत्र में स्थानीय मसालों और पारंपरिक तरीकों के अनुसार इसमें बदलाव किए जाते हैं.

कढ़ी को आमतौर पर दोपहर या रात के भोजन में परोसा जाता है. इसके साथ सादा चावल, जीरा राइस, खिचड़ी या विभिन्न प्रकार की रोटियां भी परोसी जाती हैं. कई परिवार इसे मौसमी सब्जियों या अन्य पारंपरिक व्यंजनों के साथ भी भोजन का हिस्सा बनाते हैं.

समय के साथ कढ़ी की कई नई वैरायटी भी सामने आई हैं. आजकल पालक कढ़ी, सिंधी कढ़ी, गुजराती कढ़ी, पंजाबी कढ़ी, राजस्थानी कढ़ी और बिना पकौड़े वाली कढ़ी जैसी कई प्रकार की रेसिपी बनाई जाती हैं. अलग-अलग राज्यों के भोजन में यह व्यंजन अपनी स्थानीय पहचान के साथ शामिल है.
 

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