झंडू कुमार (Jhandu Kumar) भारत के उभरते हुए पैरा पावरलिफ्टर हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीता. ग्लासगो में आयोजित खेलों में उन्होंने पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर भारत का पहला पदक दिलाया.
झंडू कुमार बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं. बचपन में ही उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी. घर का खर्च चलाने के लिए उनके परिवार ने लंबे समय तक सब्जी बेचने का काम किया. कोविड-19 महामारी के दौरान जब परिवार का कारोबार प्रभावित हुआ, तब झंडू कुमार ने घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए ई-रिक्शा भी चलाया.
आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई. दिन में काम करने के बाद वह नियमित रूप से जिम में अभ्यास करते थे. शुरुआती दिनों में उन्हें प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा. वर्ष 2023 में राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया था. हालांकि उस प्रतियोगिता में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखी.
उनके करियर में बड़ा मोड़ तब आया, जब राष्ट्रीय कोच राजिंदर सिंह राहेलू की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी. इसके बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण का अवसर मिला. यहां से उन्होंने लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया और कई पदक अपने नाम किए.
बिहार के झंडू कुमार ने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला मेडल हासिल किया.
झंडू कुमार की यह कहानी बस कांस्य पदक तक सीमित नहीं है. यह उस जिद की कहानी है, जिसने गरीबी को हराया, पोलियो को चुनौती दी और आखिरकार भारत का तिरंगा अंतरराष्ट्रीय मंच पर गर्व से लहरा दिया. ग्लासगो में जीता गया यह ब्रॉन्ज मेडल किसी गोल्ड से कम नहीं है.