सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) प्राचीन दक्षिण एशिया की एक महत्वपूर्ण कांस्य युग (Bronze Age) सभ्यता थी. इसका विकास लगभग 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व के बीच हुआ, जबकि इसका सबसे विकसित काल 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व माना जाता है. यह सभ्यता आज के पाकिस्तान, उत्तर-पश्चिम भारत और उत्तर-पूर्व अफगानिस्तान के बड़े हिस्से में फैली हुई थी. क्षेत्रफल के लिहाज से यह प्राचीन मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं से भी अधिक विस्तृत थी.
इस सभ्यता का नाम सिंधु नदी (Indus River) के नाम पर रखा गया है, क्योंकि इसके शुरुआती पुरातात्विक स्थल सिंधु नदी के आसपास खोजे गए थे. इसे हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization) भी कहा जाता है, क्योंकि हड़प्पा इसका पहला प्रमुख स्थल था जिसकी खुदाई 20वीं सदी की शुरुआत में की गई थी. बाद में मोहनजोदड़ो सहित कई अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की खोज हुई.
सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगरों में हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धोलावीरा, राखीगढ़ी और गणेरीवाला शामिल हैं. इनमें से मोहनजोदड़ो और धोलावीरा को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा प्राप्त है. माना जाता है कि मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे शहरों में हजारों लोग रहते थे और अपने समय में ये बड़े शहरी केंद्र थे.
इस सभ्यता की शुरुआत उससे पहले की नवपाषाण (Neolithic) संस्कृतियों से जुड़ी मानी जाती है, जिनमें मेहरगढ़ सबसे प्रसिद्ध है. समय के साथ यह सभ्यता विकसित होकर एक बड़े शहरी समाज में बदल गई. हालांकि बाद में जलवायु परिवर्तन और क्षेत्र में पानी की उपलब्धता कम होने के कारण इसका धीरे-धीरे पतन शुरू हुआ और आबादी पूर्वी क्षेत्रों की ओर फैल गई.
अब तक सिंधु घाटी सभ्यता के एक हजार से अधिक स्थलों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से लगभग सौ स्थलों की खुदाई हो चुकी है. इस सभ्यता की भाषा और लिपि आज भी पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है. सिंधु लिपि (Indus Script) अब भी शोध का विषय बनी हुई है और इसके बारे में विद्वानों के अलग-अलग मत हैं.
आज सिंधु घाटी सभ्यता को मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन सभ्यताओं में गिना जाता है, जिसने दक्षिण एशिया के शुरुआती शहरी विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
पाकिस्तान सिंधु घाटी सभ्यता पर अपना दावा नई ताकत से कर रहा है. यह उस देश के लिए एक अहम शिफ्ट है जो 712 ईसवी में बिन कासिम द्वारा सिंध की विजय को अपनी नींव का क्षण मानता था. पाकिस्तान को अचानक हड़प्पा और मोहन जोदड़ो से इतना लगाव क्यों हो गया है?
सिंधु जल संधि विवाद के बीच पाकिस्तान सिंधु घाटी सभ्यता, हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की विरासत पर नया जोर दे रहा है. जानिए पानी के विवाद, ऐतिहासिक दावों और पाकिस्तान के बदलते नैरेटिव के पीछे की कहानी. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिंधु जल का मुद्दा मौजूदा संधियों, जल उपलब्धता और दोनों देशों की जरूरतों से जुड़ा विषय है.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने कहा कि सिंधु नदी न केवल उनके देश के लिए पानी का एकमात्र प्रमुख स्रोत है, बल्कि यहां के लोगों के संपूर्ण इतिहास से भी गहराई से जुड़ी हुई है.
दुनिया में कई भाषाएं बनीं और खत्म भी हो गईं. इस बीच प्राचीन वक्त की कई लिपियों को ठीक-ठाक पढ़ लिया गया कि उनमें क्या लिखा है, लेकिन सिंधु घाटी स्क्रिप्ट अब भी अबूझ है. हाल में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने इसे डीकोड करने वालों को बड़ा पुरस्कार देने का एलान किया. अब तक इसे समझने की सैकड़ों कोशिशें बेकार हो चुकीं.
ऑस्कर विनिंग फिल्म RRR के डायरेक्टर एसएस राजामौली ने बताया है कि उन्हें सिंधु घाटी सभ्यता पर फिल्म बनाने का एक बेहतरीन आईडिया आया था. लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान की वजह से वो इस आईडिया को आगे डेवलप नहीं कर पाए. राजामौली का आईडिया जानने के बाद ट्विटर की जनता उनसे काफी इम्प्रेस नजर आई.
एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 की पुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध डांसिंग गर्ल प्रतिमा की तस्वीर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कुछ इतिहासकारों और विशेषज्ञों ने प्रतिमा के प्रस्तुतीकरण पर सवाल उठाए हैं, जबकि एनसीईआरटी का कहना है कि इसे अलग नजरिए से देखा जा रहा है. इस मुद्दे ने इतिहास, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है.
NCERT ने मामले की जांच के बाद डिजिटल संस्करण में सुधार करने और भविष्य के मुद्रित संस्करणों में मूल तस्वीर शामिल करने का निर्णय लिया है.