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इडली

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इडली (Idli) भारत का एक पारंपरिक व्यंजन है, जिसकी शुरुआत दक्षिण भारत से मानी जाती है. आज यह देश के लगभग हर हिस्से में आसानी से मिल जाती है. नाश्ते के अलावा कई लोग इसे दोपहर या रात के खाने में भी शामिल करते हैं. घरों से लेकर रेस्तरां, होटल, स्ट्रीट फूड स्टॉल और कैफेटेरिया तक, इडली की मौजूदगी आम है.

इडली मुख्य रूप से चावल और उड़द दाल के घोल से तैयार की जाती है. इसके लिए पहले चावल और दाल को अलग-अलग भिगोया जाता है. इसके बाद इन्हें पीसकर एक घोल बनाया जाता है और कुछ घंटों तक रखा जाता है ताकि इसमें प्राकृतिक रूप से खमीर (फर्मेंटेशन) आ सके. तैयार घोल को इडली के सांचे में डालकर भाप में पकाया जाता है.

इडली को आमतौर पर सांभर और अलग-अलग तरह की चटनियों के साथ परोसा जाता है. नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी, मूंगफली की चटनी और पुदीने की चटनी इसके साथ सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं. कई जगहों पर इडली के साथ मसालेदार पाउडर (मिलगई पोडी) और घी भी परोसा जाता है.

समय के साथ इडली की कई किस्में भी तैयार की जाने लगी हैं. इनमें रवा इडली, कांचीपुरम इडली, मिनी इडली, स्टफ्ड इडली, वेजिटेबल इडली और मिलेट इडली शामिल हैं. अलग-अलग राज्यों और शहरों में इसे स्थानीय स्वाद और परंपरा के अनुसार बनाया जाता है.

भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी भारतीय रेस्तरां के मेन्यू में इडली शामिल रहती है. विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच भी यह एक जाना-पहचाना व्यंजन है. कई फूड चेन और इंस्टेंट फूड ब्रांड इडली मिक्स भी उपलब्ध कराते हैं, जिससे इसे घर पर कम समय में तैयार किया जा सकता है.

इडली बनाने के लिए विशेष इडली स्टैंड और स्टीमर का उपयोग किया जाता है. आजकल इलेक्ट्रिक स्टीमर और मल्टी-कुकर में भी इसे बनाया जाता है. घरों के अलावा बड़े पैमाने पर होटल, कैटरिंग सेवाएं और फूड इंडस्ट्री भी इडली का उत्पादन करती हैं.

भारत में कई त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और दैनिक भोजन का हिस्सा बनने वाली इडली आज एक व्यापक रूप से पहचाना जाने वाला पारंपरिक व्यंजन है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी रेसिपी और परोसने का तरीका बदल सकता है, लेकिन इसकी मूल तैयारी भाप में पकाए गए चावल और उड़द दाल के घोल पर आधारित होती है.

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