घेवर (Ghevar) भारत की पारंपरिक मिठाइयों में शामिल एक लोकप्रिय व्यंजन है, जिसे खास तौर पर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में बनाया और खाया जाता है. इसका संबंध विशेष रूप से सावन और तीज जैसे त्योहारों से माना जाता है. रक्षाबंधन के समय भी कई घरों में घेवर की खरीदारी की जाती है और इसे रिश्तेदारों तथा परिचितों को उपहार के रूप में दिया जाता है.
घेवर का आकार आमतौर पर गोल और चक्र जैसा होता है. इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से मैदा, घी, पानी और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है. पारंपरिक तरीके में मैदे का पतला घोल तैयार किया जाता है. इसके बाद इसे गर्म घी में धीरे-धीरे डालकर पकाया जाता है. घोल की परतें एक-दूसरे के ऊपर जमती जाती हैं और इससे घेवर की जालीदार बनावट तैयार होती है.
घेवर तैयार होने के बाद इसे चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है. इसके बाद अलग-अलग तरीके से सजाकर परोसा जाता है. कई जगहों पर इसके ऊपर मलाई, रबड़ी, सूखे मेवे या केसर भी डाला जाता है. हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे बनाने की विधि और सजावट में अंतर देखने को मिलता है.
घेवर की कई किस्में बाजार में मिलती हैं. सादा घेवर के अलावा मलाई घेवर और रबड़ी घेवर भी काफी प्रचलित हैं. कुछ दुकानों पर घेवर को अलग आकार और स्वाद के साथ तैयार किया जाता है. त्योहारों के मौसम में मिठाई की दुकानों पर इसकी मांग बढ़ जाती है.
राजस्थान में घेवर को पारंपरिक खानपान से जोड़ा जाता है. समय के साथ यह मिठाई उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी लोकप्रिय हुई. अब इसे स्थानीय मिठाई की दुकानों के साथ-साथ कई बड़े बाजारों और ऑनलाइन माध्यमों से भी खरीदा जा सकता है.
घेवर को आमतौर पर त्योहारों और विशेष अवसरों पर परोसा जाता है. सावन के महीने में इसकी बिक्री बढ़ जाती है. तीज और रक्षाबंधन के दौरान भी बाजारों में विभिन्न प्रकार के घेवर देखने को मिलते हैं. इस तरह घेवर उत्तर भारत की पारंपरिक मिठाइयों और त्योहारों से जुड़ा एक जाना-पहचाना व्यंजन है.