फैसल बिन फरहान अल सऊद (Faisal bin Farhan Al Saud) सऊदी अरब के राजनेता और प्रिंस हैं. वह अक्टूबर 2019 से सऊदी अरब के विदेश मंत्री के पद पर हैं. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती है, क्योंकि वह अमेरिका, यूरोप, ईरान, चीन और दूसरे देशों के साथ सऊदी अरब के रिश्तों को लेकर लगातार सक्रिय नजर आते हैं.
12 और 13 सितंबर 2026 को भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026 India) में फैसल बिन फरहान अल सऊद शामिल हुए.
प्रिंस फैसल का जन्म 1 नवंबर 1974 को पश्चिम जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में हुआ था. उनका बचपन और युवावस्था का कुछ समय जर्मनी में बीता. इसी वजह से उन्हें जर्मन भाषा का अच्छा ज्ञान है. उनकी पढ़ाई अमेरिका में हुई और बाद में उन्होंने किंग सऊद यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की.
सरकारी और राजनयिक जिम्मेदारियों में आने से पहले फैसल बिन फरहान ने कारोबार और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. वह सऊदी अरब की सैन्य उद्योग कंपनी Saudi Arabian Military Industries यानी SAMI से भी जुड़े रहे. इसके अलावा उन्होंने अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी Boeing के साथ सऊदी-अमेरिकी संयुक्त उपक्रम की अध्यक्षता भी की. इस अनुभव ने उन्हें रक्षा, कारोबार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बारीकियों को समझने में मदद की.
साल 2017 से 2019 के बीच उन्होंने अमेरिका में सऊदी अरब के दूतावास में सलाहकार के तौर पर काम किया. इसके बाद मार्च 2019 में उन्हें जर्मनी में सऊदी अरब का राजदूत बनाया गया. हालांकि इस पद पर उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं रहा. अक्टूबर 2019 में सऊदी अरब के शाह सलमान के शाही आदेश के बाद उन्हें देश का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया.
विदेश मंत्री के रूप में फैसल बिन फरहान ने कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सऊदी अरब का पक्ष सामने रखा है. खास तौर पर ईरान के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में उनकी भूमिका चर्चा में रही. दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव के बाद 2023 में चीन की मध्यस्थता से राजनयिक संबंध बहाल करने की घोषणा हुई. इस प्रक्रिया में सऊदी और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण रही.
फैसल बिन फरहान पश्चिम एशिया के साथ-साथ रूस, चीन और यूरोपीय देशों के साथ भी लगातार संपर्क में रहे हैं. 2023 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में BRICS देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की.
इजरायल और फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी फैसल का रुख साफ रहा है. उन्होंने कहा है कि सऊदी अरब और इजरायल के बीच सामान्य संबंधों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए फिलिस्तीनी मुद्दे का समाधान जरूरी है. यूक्रेन युद्ध को लेकर भी उन्होंने बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर जोर दिया है.
2025 में सऊदी अरब में अमेरिका और रूस के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में भी फैसल बिन फरहान की भूमिका रही. चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ उनकी मुलाकात ने यह भी दिखाया कि सऊदी अरब अपनी विदेश नीति में दुनिया की अलग-अलग बड़ी शक्तियों के साथ संपर्क बनाए रखने पर जोर दे रहा है.
कुल मिलाकर, प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद आज सऊदी अरब की विदेश नीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. उनका राजनयिक अनुभव, पश्चिमी देशों से परिचय और मध्य पूर्व के जटिल राजनीतिक मामलों की समझ उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर सऊदी अरब के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि बनाती है.