इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में आज देशभर के शिक्षा विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे, जहां बदलते एजुकेशन ट्रेंड, नई चुनौतियों और आने वाले समय में शिक्षा प्रणाली को किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, इस पर विस्तार से चर्चा हुई. कॉन्क्लेव में देश की टॉप यूनिवर्सिटी और स्कूलों के कई प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने डिजिटल दुनिया, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलावों पर अपनी राय रखी.
दोपहर 1.25 बजे से 2 बजे तक आयोजित कीनोट एड्रेस 'लीडिंग विद परपज: स्ट्रैटेजीज फॉर स्कूल एक्सीलेंस'. में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन की प्रोफेसर नमिता रंगनाथन ने स्कूलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए क्या जरूरी है, इस पर विस्तार से बात की.इस सत्र की अध्यक्षता एजुकेशन टुडे की चीफ एजुकेशन ऑफिसर रेखा कृष्णन ने की.
प्रोफेसर नमिता रंगनाथन ने कहा कि स्कूलों को अब पुराने तरीकों से आगे बढ़कर नई सोच अपनानी होगी.स्कूल सिर्फ इमारत नहीं, एक 'यूनिवर्स' है..कॉन्क्लेव में उन्होंने जोर देकर कहा कि हर स्कूल एक छोटा समाज होता है, जहां बच्चे दुनिया को समझना शुरू करते हैं.स्कूल में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां बच्चा खुद को सुरक्षित भी महसूस करे और सीखने के लिए प्रेरित भी हो.
स्कूलिंग और एजुकेशन दो अलग बातें
प्रोफेसर रंगनाथन ने स्पष्ट कहा कि स्कूलिंग और एजुकेशन एक जैसी चीजें नहीं हैं.उनके अनुसार स्कूलिंग का मतलब है सोच, मूल्य, समझ और व्यक्तित्व का विकास है.
होलिस्टिक लर्निंग ही भविष्य का रास्ता
कॉन्क्लेव में निष्कर्ष साफ था कि स्कूल का असली आउटपुट सिर्फ अच्छे मार्क्स नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान तैयार करना है.बच्चों का भावनात्मक, सामाजिक और बौद्धिक विकास इन सबको साथ लेकर चलना ही भविष्य की असली शिक्षा होगी.
हम स्कूल के आउटपुट तक कैसे पहुंचें, इसे हमें दोबारा समझना होगा. स्कूलिंग के अंत में बच्चे की पहचान बनती है.आप एक बच्चे को व्यक्ति और इंसान बना रहे होते हैं. टीचर एजुकेशन में यह समझ शामिल होनी चाहिए कि स्कूल का उद्देश्य एक जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है.