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India Today Education Conclave 2026: कॉलेजों में हो रहे सुसाइड के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं: UGC चेयरमैन विनीत जोशी

India Today education Conclave 2026: इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के चेयरमैन विनीत जोशी ने हायर एजुकेशन को लेकर बात की.

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यूपीएससी के चेयरमैन विनीत जोशी ने हायर एजुकेशन को लेकर बात की. (Photo: ITG)
यूपीएससी के चेयरमैन विनीत जोशी ने हायर एजुकेशन को लेकर बात की. (Photo: ITG)

India Today Education Conclave 2026: इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के चेयरमैन विनीत जोशी ने हायर एजुकेशन को लेकर बात की. इस दौरान उन्होंने नई शिक्षा नीति पर बात की और उन्होंने बताया कि नई एजुकेशन पॉलिसी से हायर एजुकेशन में कितना बदलाव हो रहा है. इस दौरान उन्होंने हायर एजुकेशन में बढ़ रहे सुसाइड के मामलों को लेकर भी बात की. 

सुसाइड को लेकर उन्होंने कहा कि यह एक जटिल और कई कारणों पर आधारित समस्या है. इसके लिए किसी एक कारण या व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं. हो सकता है कि शिक्षक और कॉलेज के प्रशासन के बीच तालमेल की कमी हो, जिसकी वजह से यह ठीक से पता नहीं चल पाता कि बच्चा क्या कर रहा है. ऐसे में मुश्किल हो जाती है. 

साथ ही उन्होंने कहा कि संस्थानों में छात्रों की निगरानी और सहयोग के लिए एक कई लेवल की व्यवस्था है. इसके तहत एक साल सीनियर फ़ेलो को 6–7 छात्रों के एक समूह की जिम्मेदारी दी जाती है. साथ ही फैकल्टी गाइड सिस्टम होता है, जिसमें एक फ़ैकल्टी सदस्य लगभग 15–16 छात्रों के समूह का प्रभारी होता है. यह फ़ैकल्टी सीधे पढ़ाने के बजाय छात्रों की स्थिति, गतिविधियों और समस्याओं पर नज़र रखता है. इसके अलावा कई एक्सपर्ट भी इसे लेकर काम कर रहे हैं. कई संस्थानों में मिनिमम अटेंडेंस को अनिवार्य किया गया है, ताकि छात्रों के साथ नियमित संपर्क और उन पर निगरानी बनी रहे. 

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साथ ही उन्होंने बताया कि छात्रों पर मानसिक दबाव कम करने के लिए मूल्यांकन प्रणाली में भी बदलाव किए जा रहे हैं. व्यक्तिगत असाइनमेंट या अकेले परीक्षा देने की बजाय अब ओपन बुक परीक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है. उनका कहना है कि जब छात्र अकेले असाइनमेंट या परीक्षा देता है, तो उस पर अधिक दबाव पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था लाई जा रही है, जिसमें छात्रों का समूह मिलकर प्रोजेक्ट कर सके, ताकि पढ़ाई और मूल्यांकन की प्रक्रिया कम तनावपूर्ण हो.

उन्होंने कहा कि छात्र स्कूल एजुकेशन सिस्टम से होकर कॉलेजों में आते हैं और स्कूल स्तर पर भी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. उनका कहना था कि इस दिशा में सभी संबंधित पक्ष अपनी-अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं और किसी भी सूरत में किसी एक जीवन का खो जाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए. सभी स्तरों पर इस समस्या से निपटने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. 

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