छाता (Chhata) उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित एक नगर और नगर पंचायत है. यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के प्रभाव वाले इलाकों में आता है और मथुरा जिले के महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में गिना जाता है. पहले इस नगर को छत्रवन के नाम से जाना जाता था. समय के साथ इसका नाम बदलकर छाता हो गया और आज यह प्रशासनिक तथा औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है.
यह नगर सड़क मार्ग से मथुरा, वृंदावन, अलीगढ़, खैर और दिल्ली सहित कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. राष्ट्रीय राजमार्ग के कारण यहां से आसपास के क्षेत्रों तक यात्रा करना आसान है.
भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार छाता की आबादी 19,836 थी. उस समय यहां पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक दर्ज की गई थी. साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से कम थी, जबकि छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 19 प्रतिशत थी.
राजनीतिक दृष्टि से छाता उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मी नारायण चौधरी यहां से विधायक चुने गए थे.
छाता के आसपास कई औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं. पैकेजिंग सामग्री बनाने वाली वैकमेट इंडिया के यहां कई उत्पादन संयंत्र हैं. इसके अलावा वरुण बेवरेजेज लिमिटेड (पेप्सी) और ब्रिंदावन एग्रो इंडस्ट्रीज (कोका-कोला फ्रेंचाइजी) के बॉटलिंग प्लांट भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं. वस्त्र उद्योग से जुड़ी कई कंपनियां, जैसे गिन्नी फिलामेंट्स लिमिटेड, पशुपति, शैमकेन और जैन कॉर्ड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड भी यहां कार्यरत हैं. वर्ष 1975 में स्थापित छाता शुगर मिल अब बंद हो चुकी है.
मथुरा स्थित छाता में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री पर छापेमारी कर 500 किलो दूषित पनीर को नष्ट कराया है. फैक्ट्री से भारी मात्रा में रिफाइंड सोयाबीन ऑयल और टीनोपाल केमिकल बरामद कर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.