बिश्केक (Bishkek) किर्गिस्तान की राजधानी और देश का सबसे बड़ा शहर है. यह चुय क्षेत्र की राजधानी भी है. शहर किर्गिस्तान के उत्तरी हिस्से में कजाकिस्तान की सीमा के पास स्थित है. वर्ष 2024 के आंकड़ो के अनुसार बिश्केक की आबादी करीब 12 लाख थी. वर्तमान में यह देश के प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है.
बिश्केक का पुराना नाम पिशपेक था. कोकंद खानते ने वर्ष 1825 में यहां पिशपेक नाम का एक किला बनवाया था. इस किले का इस्तेमाल स्थानीय कारवां मार्गों पर नियंत्रण रखने और किर्गिज कबीलों से कर वसूलने के लिए किया जाता था. 4 सितंबर 1860 को रूसी सेना ने किले पर हमला किया और उसे नष्ट कर दिया. इस अभियान का नेतृत्व कर्नल अपोलोन जिमरमान ने किया था. आज किले के अवशेष जिबेक जोलु स्ट्रीट के उत्तर में देखे जा सकते हैं.
वर्ष 1868 में किले की जगह पर रूसी बस्ती बसाई गई. उस समय इसका नाम पिशपेक ही रखा गया था. यह क्षेत्र रूसी तुर्केस्तान के सेमिरेच्ये क्षेत्र के प्रशासन के अंतर्गत था.
वर्ष 1925 में कारा-किर्गिज स्वायत्त क्षेत्र बनाया गया और पिशपेक को उसकी राजधानी बनाया गया. वर्ष 1926 में सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी ने शहर का नाम बदलकर फ्रुंजे कर दिया. यह नाम सोवियत सैन्य नेता मिखाइल फ्रुंजे के नाम पर रखा गया था. उनका जन्म इसी शहर में हुआ था. वर्ष 1936 में फ्रुंजे किर्गिज सोवियत समाजवादी गणराज्य की राजधानी बना.
सोवियत संघ के विघटन के समय वर्ष 1991 में किर्गिस्तान स्वतंत्र देश बना. इसी वर्ष किर्गिस्तान की संसद ने शहर का नाम फिर बदलकर बिश्केक कर दिया. यह नाम पिशपेक के पुराने नाम से जुड़ा हुआ है.
बिश्केक समुद्र तल से करीब 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. शहर किर्गिज आला-तू पर्वत श्रृंखला के उत्तरी किनारे के पास है. यह पर्वत श्रृंखला तियान शान पर्वत प्रणाली का हिस्सा है. आसपास के पर्वत करीब 4895 मीटर तक ऊंचे हैं. शहर के उत्तर में कजाकिस्तान की ओर उपजाऊ और हल्की ढ़लान वाला मैदानी क्षेत्र फैला हुआ है. चुय नदी इस क्षेत्र के जल निकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
बिश्केक तुर्केस्तान-साइबेरिया रेलवे से एक शाखा रेल लाइन के जरिए जुड़ा हुआ है. शहर की सड़के काफी हद तक ग्रिड के आकार में बनी हैं. यहां चौड़े मार्ग, सोवियत काल की इमारते, अपार्टमेंट परिसर और निजी मकान दिखाई देते हैं. कई सड़कों के किनारे सिंचाई के लिए छोटी नहरें बनी हैं. इन नहरों के जरिए शहर के पेड़ों तक पानी पहुंचाया जाता है. गर्मियों के मौसम में ये पेड़ सड़कों और आसपास के इलाकों में छाया प्रदान करते हैं.
पीएम मोदी ने बिश्केक में पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरा तो SCO के मंच पर पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती हुई. SCO शिखर सम्मेलन में 3 ताकतों को मिलन हुआ, मोदी, पुतिन और जिनपिंग यानी कूटनीति के ये 3 किंग एक साथ आते हैं तो दुनिया में इसकी धमक भी दिखाई पड़ती है. बिश्केक से पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के हाथ मिलाने की तस्वीरें आईं तो वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक तहलका मच गया. किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की महामुलाकात के मायने क्या हैं?
किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ग्रुप फोटो को उनके कार्यालय द्वारा क्रॉप कर शेयर करने पर सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया गया.
किर्गिस्तान में हुए शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन यानी एससीओ के शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी समेत सदस्य देशों के तमाम नेता फैमिली फोटो में नजर आए. पीएम मोदी ने पूरी तस्वीर शेयर की, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने उसी फोटो का क्रॉप्ड वर्जन शेयर किया, जिसमें मोदी समेत कई नेता नजर नहीं आए. इस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर मजे लिए.
किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन की फैमिली फोटो को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सोशल मीडिया पर नया विवाद छिड़ गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी तस्वीर साझा की, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्रॉप की गई तस्वीर पोस्ट की, जिसमें मोदी नजर नहीं आए. तस्वीर सामने आते ही यूजर्स ने पाकिस्तान पीएमओ पर सवाल उठाए और दोनों देशों के नेताओं की मौजूदगी चर्चा में आ गई
बिश्केक में SCO समिट के बीच पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई है... प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की ये तीसरी आमने-सामने की मुलाकात है. ऐसे में इस मुलाकात में दोनों के बीच क्या बात हुई, दुनिया ये जानना और समझना चाहती है. देखते हैं, बिश्वेक में मोदी और पुतिन की महामुलाकात के मायने क्या हैं?
पीएम मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं से हुई मुलाकातें भारत की बड़ी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं. यह उस समय हो रहा है जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच एक नया रक्षा समझौता हुआ है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से द्विपक्षीय बैठक की. दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हालिया संघर्षों पर चर्चा की.
पिछले साल बिश्केक में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक साथ देखा था, तो उन्होंने तुरंत बयान दे दिया कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के पाले में गंवा दिया है. लेकिन इस बार बाजी कहीं ज्यादा बड़ी है। कूटनीति में आज बात करेंगे... बिश्केक सम्मेलन, ईरान पर अमेरिकी पाबंदियों और मोदी, पुतिन तथा जिनपिंग के रुख की. बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में पुतिन, जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान एक मंच पर मौजूद थे, जहां पीएम नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. जब वाशिंगटन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है, तो सवाल उठता है कि क्या चीन और रूस मिलकर ईरान को अमेरिकी पाबंदियों से बचा सकते हैं .
बिश्केक में गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात हुई. बातचीत में रूस और यूक्रेन जंग का भी मुद्दा उठा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध मानवता के लिए खतरा है और भारत शांति का पक्षधर है. साथ ही उन्होनें कहा कि रूस और भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले आधे घंटे से अधिक समय तक बैठक की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, आर्थिक सहयोग, यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की.
पीएम मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेता गले मिले. इसके बाद द्विपक्षीय बैठक में पुतिन से पीएम मोदी ने कहा, युद्ध मानवता के लिए खतरा है. भारत शांति का पक्षधर. देखें वीडियो.