अशोक लवासा (Ashok Lavasa) भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. उनका जन्म 21 अक्टूबर 1957 को हुआ था. वे 1980 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं. अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार में विभिन्न पदों पर काम किया. वे भारत के वित्त सचिव, नागरिक उड्डयन सचिव और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन सचिव के पद पर भी रहे. इसके अलावा, उन्होंने भारत के चुनाव आयुक्त के रूप में काम किया और एशियाई विकास बैंक में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली.
अशोक लवासा की प्रारंभिक शिक्षा बेलगाम मिलिट्री स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की. उनकी शैक्षणिक योग्यता में ऑस्ट्रेलिया की सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी से प्रबंधन में स्नातकोत्तर की डिग्री भी शामिल है. इसके अलावा, उन्होंने रक्षा एवं रणनीतिक अध्ययन में एमफिल की उपाधि प्राप्त की.
भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने से पहले अशोक लवासा ने दिल्ली विश्वविद्यालय में साहित्य पढ़ाया. इसके बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक में परिवीक्षाधीन अधिकारी के रूप में भी काम किया. वर्ष 1980 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के बाद उनका प्रशासनिक करियर शुरू हुआ.
हरियाणा सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई विभागों और संस्थानों में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं. वे जींद और गुड़गांव जिलों में उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट के पद पर रहे. इसके अलावा, उन्होंने हरियाणा पर्यटन निगम, हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम और सहकारी चीनी मिलों से जुड़े संस्थानों में भी काम किया. उन्होंने राज्य में बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और उद्योग से संबंधित विभागों में भी जिम्मेदारियां संभालीं.
केंद्र सरकार में अशोक लवासा ने गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय सहित विभिन्न विभागों में काम किया. दिसंबर 2013 में उन्हें केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव नियुक्त किया गया. उन्होंने 1 जनवरी 2014 को पदभार ग्रहण किया और अगस्त 2014 तक इस पद पर रहे. इसके बाद 29 अगस्त 2014 को उन्हें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन सचिव बनाया गया. उन्होंने अप्रैल 2016 तक इस पद पर काम किया.
अप्रैल 2016 में अशोक लवासा को व्यय सचिव नियुक्त किया गया. वित्त मंत्रालय में वरिष्ठतम सचिवों में शामिल होने के कारण मई 2016 में उन्हें वित्त सचिव का पदनाम दिया गया. उन्होंने 30 अक्टूबर 2017 को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति ली.
सेवानिवृत्ति के बाद जनवरी 2018 में उन्हें भारत के चुनाव आयुक्तों में से एक नियुक्त किया गया. उन्होंने 23 जनवरी 2018 को पदभार ग्रहण किया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर चुनाव आयोग के भीतर उनके असहमति संबंधी विचार चर्चा में रहे. कुछ मामलों में उन्होंने आयोग के अन्य सदस्यों के फैसलों से अलग राय रखी. बाद में उन्होंने आयोग की बैठकों में शामिल होना बंद कर दिया था. उन्होंने अपने विचारों को लेकर सार्वजनिक रूप से भी टिप्पणी की.
अक्टूबर 2019 में उनकी पत्नी नोवेल लवासा को आयकर विभाग की ओर से नोटिस भेजे जाने की खबर सामने आई थी. यह मामला उनकी आय संबंधी जानकारी और विदेशी मुद्रा से जुड़े विवरणों के संदर्भ में चर्चा में रहा.
अगस्त 2020 में अशोक लवासा एशियाई विकास बैंक के उपाध्यक्ष नियुक्त हुए. उन्होंने 31 अगस्त 2020 से 31 अगस्त 2023 तक इस पद पर काम किया. इस तरह उनका करियर भारतीय प्रशासनिक सेवा, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, चुनाव आयोग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था तक फैला रहा.
चुनाव आयोग में असहमति नई बात नहीं है, देश में चुनाव आयोग की शक्तियों को नए तरीके से परिभाषित करने वाले टीएन शेषन पर तो ये आरोप था कि वे अपने सहयोगी आयुक्तों को चुनाव आयुक्त की मीटिंग में बुलाते तक नहीं थे. एक दूसरे मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने अपने सहयोगी आयुक्त को हटाने की ही सिफारिश राष्ट्रपति से कर दी थी.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026 में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और SIR को लेकर अहम चर्चा हुई. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कई मुद्दों पर बेबाक राय रखी.