आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) भारतीय राजनीति और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े सार्वजनिक व्यक्ति हैं. वह लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े रहे और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं. कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था.
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश की संभल सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था. इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली. इसके बाद वर्ष 2019 में उन्होंने लखनऊ लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा. इस चुनाव में भी वह जीत हासिल नहीं कर सके, लेकिन उन्हें करीब 1.8 लाख वोट मिले थे.
आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस की उत्तर प्रदेश सलाहकार परिषद का भी हिस्सा रहे थे. यह परिषद प्रियंका गांधी वाड्रा की उत्तर प्रदेश में पार्टी की जिम्मेदारियों के दौरान उनकी सहायता के लिए बनाई गई थी. बाद में पार्टी के साथ उनके मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे.
कांग्रेस ने फरवरी 2024 में आचार्य प्रमोद कृष्णम को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था.
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले में आयोजित कल्कि धाम के शिलान्यास कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आमंत्रित किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी 2024 को कल्कि धाम की आधारशिला रखी थी.
कांग्रेस के साथ मतभेदों के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राम मंदिर निर्माण और अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी थी.
आचार्य प्रमोद कृष्णम का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश की संभल और लखनऊ लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने तथा कांग्रेस के साथ उनके लंबे जुड़ाव के कारण चर्चा में रहा है.
‘पंचायत आजतक’ में आचार्य प्रमोद कृष्णम, आचार्य बद्रीश जी महाराज और स्वामी चक्रपाणि महाराज ने मंदिरों के इतिहास, सनातन आस्था और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों पर अपनी राय रखी.
'पंचायत आजतक' मथुरा के सेशन 'संभल, मथुरा, काशी: हिंदुत्व की झांकी' में पीठाधीश्वर श्री कल्कि धाम, संभल के आचार्य प्रमोद कृष्णम, हिंदू महासभा के महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज और भागवत भ्रमर एवं कथावाचक आचार्य बद्रीश जी महाराज ने शिरकत की. इस दौरान संतों ने धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों पर चर्चा की.