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ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर को किया फोन, पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एस. जयशंकर और सैयद अब्बास अराघची के बीच फोन पर बातचीत हुई. ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद यह छठी बार है जब जयशंकर और अराघची के बीच बातचीत हुई है.

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ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर से पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की. (File Photo: PTI)
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर से पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की. (File Photo: PTI)

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बार अराघची ने रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बातचीत की. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने X हैंडल से पोस्ट करके यह जानकारी दी. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान अपने मित्र देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से तेहरान के खिलाफ तीखी बयानबाजी भी जारी है. ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद यह छठी बार है जब जयशंकर और अराघची के बीच बातचीत हुई है. इससे पहले 21 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच संवाद हुआ था.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने X पर लिखा, 'ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का मुझे फोन आया. उनके साथ पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई.' जयशंकर ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी चर्चा हुई. उन्होंने दोनों नेताओं के साथ क्षेत्रीय हालात पर विचार-विमर्श किया.

नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने भी X पर पोस्ट करके बताया कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर चर्चा हुई. यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर ईरान को सख्त चेतावनी दी है. फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि संभव है कल तक समझौता हो जाए और यह भी जोड़ा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया, तो अमेरिका सब कुछ तबाह करने और उसके तेल पर कब्जा करने पर विचार कर रहा है.

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होर्मुज, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी सप्लाई को संभालता है. ईरान द्वारा इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही सीमित किए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है. पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है, इसलिए इस क्षेत्र में स्थिरता और होर्मुज के जरिए निर्बाध आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है. यही कारण है कि कई प्रमुख देश इस जलमार्ग को पूरी तरह खोलने की मांग कर रहे हैं. तनाव के बीच ईरान ने भारत सहित अपने मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है. 

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