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फोन, बैंक, ऐप… हर जगह सुरक्षा! सरकारी 'S4C' से साइबर ठगों की आएगी शामत

केंद्रीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह नई दिल्ली में आयोजित एक नेशनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे. इस दौरान वे ई-साइबर क्राइम ब्रांच का उद्घाटन करेंगे और I4C के S4C डैशबोर्ड की शुरुआत करेंगे. आइए जानते हैं कि S4C डैशबोर्ड और म्यूल अकाउंट क्या होते हैं?

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S4C एजेंसी की मदद से यूजर्स को बेतहर सिक्योरिटी मिलेगी. (Photo: Unplash.com)
S4C एजेंसी की मदद से यूजर्स को बेतहर सिक्योरिटी मिलेगी. (Photo: Unplash.com)

साइबर स्कैमर्स और उनके ईको सिस्टम को खत्म करने के लिए सरकार एक न्यू सिस्टम तैयार कर रही है, जिसका ऐलान आज होगा. केंद्रीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह नई दिल्ली में आयोजित एक नेशनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे. 

कॉन्फ्रेंस का आयोजन सेंट्रल ब्यूरो इनवेस्टीगेशन (CBI) कर रही है, इसमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) का सहयोग भी है. 

दो दिन चलने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस का नाम साइबर-सक्षम धोखाधड़ी से निपटना और इसके इकोसिस्टम को खत्म करना है. इस मौके पर गृह मंत्री ई-साइबर क्राइम ब्रांच का उद्घाटन करेंगे और I4C के S4C डैशबोर्ड की शुरुआत करेंगे. 

S4C डैशबोर्ड क्या है? 

PIB ने बताया कि केंद्रीय मंत्री आज स्टेट साइबर क्राइम कॉर्डिनेशनल सेंटर (S4C) डैशबोर्ड का उद्घानट करेंगे. यह डैशबोर्ड  गृह मंत्रालय की नोडल एजेंसी I4C ने तैयार किया है. S4C की मदद से स्मार्टफोन, बैंकिंग सिस्टम और ऐप्स को बेहतर सिक्योरिटी मिलेगी. हालांकि लॉन्चिंग के बाद  S4C के बारे में और ज्यादा डिटेल्स सामने आएंगी. 

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भारत में I4C एजेंसी का काम देश में साइबर क्राइम और उनके सिस्टम को रोकना और खत्म करना है. यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जांच में मदद, साइबर खतरों में विश्लेषण और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट्सिंग पोर्टल के जरिए शिकायतों को सुनना और सॉल्व करना है. 

Mule Account क्या होते हैं? 

म्यूल अकाउंट, असल में वे बैंक अकाउंट होते हैं, जिनका यूज साइबर स्कैमर्स रुपये ठगने के लिए करते हैं. ये अकाउंट किसी दूसरे के नाम पर होते हैं या कई बार फर्जी डॉक्यूमेंट का यूज करके बैंक अकाउंट को ओपन किया जाता है. 

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साइबर स्कैमर्स आम लोगों से लूटा हुआ पैसा म्यूल बैंक अकाउंट में मंगवाते हैं. इसके बाद ये पैसा अन्य म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर होता है. मनी ट्रांसफरिंग का ये सिलसिला कई बार होता है, जिसकी वजह से साइबर स्कैमर्स के अकाउंट तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.  

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