देश में रोज़ स्पैम कॉल और मैसेज से लोग परेशान हैं. इसी को कम करने के लिए TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया AI का इस्तेमाल बढ़ाना चाहता है. स्पैम कॉल्स की वजह से कई तरह के साइबर फ्रॉड होते हैं जिससे कई बार लोगों की कमाई भी झटके में स्वाहा हो जाती है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूज करने के पीछे आइडिया यह है कि AI सिस्टम पहले ही संदिग्ध स्पैम नंबर पहचान ले. फिर उन पर एक्शन लिया जाए. मकसद यूजर को बिना शिकायत किए भी राहत देना है.
TRAI का प्लान यह है कि जो नंबर लगातार स्पैम जैसा बिहेव करे, उसे AI फ्लैग कर दे. अगर पैटर्न लंबे समय तक वैसा ही रहे, तो उस नंबर पर कार्रवाई हो सकती है. मतलब स्पैम करने वालों पर जल्दी लगाम लगे. यूजर को कम डिस्टर्बेंस हो.
Airtel, Jio और VI ने विरोध क्यों किया?
Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea ने TRAI से कहा है कि नेटवर्क लेवल पर सीधे नंबर ब्लॉक करना रिस्की हो सकता है. AI हमेशा 100% सही नहीं होता. गलत फ्लैगिंग का खतरा रहता है. ऐसे में किसी असली यूजर का नंबर भी ब्लॉक हो सकता है.
टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि अगर गलती से नंबर बंद हो गया, तो यूजर के लिए उसे वापस पाना आसान नहीं होगा. KYC और लंबा प्रोसेस झेलना पड़ेगा. छोटे बिज़नेस और फील्ड वर्क करने वालों को ज्यादा नुकसान हो सकता है.
क्या आपका नंबर ब्लॉक हो सकता है?
अभी तक TRAI ने कोई ऐसा नियम लागू नहीं किया है जिसमें ऑटोमैटिक नंबर ब्लॉकिंग शुरू हो गई हो. लेकिन प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई नंबर लगातार कई दिनों तक AI सिस्टम में स्पैम जैसा बिहेव दिखाता है, तो उस पर एक्शन लिया जा सकता है.
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी नंबर से बहुत ज्यादा आउटगोइंग कॉल जा रही हैं. बार-बार अनजान नंबरों पर कॉल हो रही हैं. कॉल के बाद यूजर शिकायत कर रहा है या AI पैटर्न में वह नंबर प्रमोशनल या फ्रॉड कॉल जैसा दिख रहा है. ऐसे केस में सिस्टम उस नंबर को स्पैम के तौर पर फ्लैग कर सकता है.
TRAI और टेलीकॉम कंपनियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि क्या सिर्फ AI फ्लैगिंग के आधार पर नंबर ब्लॉक करना सही होगा या पहले वेरिफिकेशन और चेतावनी देना जरूरी होना चाहिए. फिलहाल यही चिंता है कि बिना पुख्ता जांच के किसी असली यूजर का नंबर बंद न हो जाए.
TRAI का स्टैंड अभी क्या है
TRAI ने कहा है कि यह फैसला तुरंत लागू नहीं होगा. पहले सभी स्टेकहोल्डर्स की राय ली जाएगी. रेगुलेटर मानता है कि AI से स्पैम पहचान में मदद मिलती है. लेकिन सीधे ब्लॉकिंग से पहले सिस्टम को और टेस्ट करना जरूरी है.
यूजर्स के लिए फायदा और रिस्क
अगर AI से स्पैम नंबर पहले ही पकड़ लिए गए, तो डेली कॉल और मैसेज की टेंशन कम हो सकती है. यह यूजर्स के लिए अच्छा है. लेकिन रिस्क भी है. अगर AI ने किसी असली नंबर को स्पैम मान लिया, तो उस यूजर की कनेक्टिविटी बंद हो सकती है. इससे जरूरी कॉल मिस हो सकती हैं.
पहले से क्या किया जा रहा है?
टेलीकॉम कंपनियां पहले से AI टूल्स से स्पैम कॉल और मैसेज पहचान रही हैं. DND जैसे सिस्टम से यूजर खुद भी रिपोर्ट कर सकता है. फिर भी शिकायत आधारित सिस्टम में देरी होती है. इसी वजह से TRAI अब इसे ऐक्टिवली देख रहा है. क्योंकि स्पैम कॉल्स की वजह से लोगों के पैसे का भी नुकसान हो रहा है.
स्पैम कंट्रोल के लिए टेक्नोलॉजी जरूरी है. AI इसमें मदद कर सकता है. लेकिन नेटवर्क लेवल पर नंबर ब्लॉक करना बड़ा कदम है. यहां बैलेंस जरूरी है. एक तरफ यूजर को स्पैम से राहत चाहिए. दूसरी तरफ किसी असली यूजर का नंबर गलती से बंद नहीं होना चाहिए. TRAI और टेलीकॉम कंपनियों की बहस इसी बैलेंस को ढूंढने को लेकर है.