scorecardresearch
 

रेलवे का नया रेल टेक पोर्टल लॉन्च, मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान, AI और टेक स्टार्टअप्स को सरकार देगी फंडिंग

रेल मंत्री ने रेल टेक पोर्टल लॉन्च कर दिया है. इसे AI इनोवेटर्स को फायदा तो मिलेगा ही, साथ ही आगे चल कर आम यात्रियों को भी इसका फायदा मिलेगा. सरकार को अगर स्टार्टअप्स के आईडियाज पसंद आते हैं तो उन्हें ग्रांट्स भी मिल सकते हैं.

Advertisement
X
रेल टेक पोर्टल लॉन्च करते हुए रेल मंत्री (Photo: Ashwini Vaishnav/X)
रेल टेक पोर्टल लॉन्च करते हुए रेल मंत्री (Photo: Ashwini Vaishnav/X)

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने Rail Tech Portal और e-RCT को लॉन्च किया. सरकार का कहना है कि इससे रेलवे में इनोवेशन को तेज किया जाएगा और क्लेम से जुड़ी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा.

यह कदम रेलवे सुधारों के बड़े पैकेज का हिस्सा है, जिसमें सिस्टम को ज्यादा तेज, पारदर्शी और टेक-फ्रेंडली बनाने की बात कही जा रही है.

Rail Tech Portal का मकसद रेलवे की रोजमर्रा की समस्याओं को सीधे टेक कंपनियों, स्टार्टअप और रिसर्च टीमों से जोड़ना है. अब इनोवेटर अपने सॉल्यूशन सीधे पोर्टल पर डाल सकेंगे. रेलवे उन आइडियाज को चुनकर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टेस्ट करेगा.

अगर नतीजे ठीक रहे तो उन्हें बड़े लेवल पर लागू किया जाएगा. इससे नई टेक को अपनाने में लगने वाला वक्त कम हो सकता है.

AI से हो सकेगी मॉनिटरिंग

इस पहल में AI, सेफ्टी, ट्रैक मॉनिटरिंग, कोच में आग से जुड़ी चेतावनी सिस्टम, एनर्जी सेविंग और मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों पर फोकस रखा गया है.

रेलवे लंबे समय से इन समस्याओं पर काम कर रहा है, लेकिन नए समाधान जमीन पर आने में वक्त लगता है. Rail Tech Portal को इसी गैप को कम करने का तरीका बताया जा रहा है.

Advertisement

इस पोर्टल से इनोवेटर्स को सिर्फ मौका ही नहीं, बल्कि फंडिंग तक पहुंच भी मिल सकती है. रेलवे पहले से स्टार्टअप और रिसर्च टीमों को प्रोटोटाइप बनाने और टेस्ट करने के लिए आर्थिक मदद देता रहा है.

नए सिस्टम में चुने गए आइडियाज को रेलवे के साथ मिलकर पायलट करने का मौका मिलेगा. इसके लिए डेवलपमेंट और ट्रायल के खर्च में रेलवे की तरफ से मदद दी जा सकती है.

इनोवेटर्स को मिलेंगे ग्रांट्स

सरकार का कहना है कि इससे छोटे स्टार्टअप और नए इनोवेटर्स के लिए रेलवे के साथ काम करना आसान होगा. हालांकि यह पैसा सीधे हाथ में मिलने वाला फंड नहीं है. यह प्रोजेक्ट-आधारित सपोर्ट है, जो चुने गए सॉल्यूशन पर निर्भर करेगा.

इसका मतलब यह है कि Rail Tech Portal स्टार्टअप के लिए कोई स्कीम या सब्सिडी प्लेटफॉर्म नहीं है. यहां वही सॉल्यूशन आगे बढ़ पाएंगे जो रेलवे की जरूरतों से जुड़े होंगे और टेस्ट में खरे उतरेंगे.

अगर कोई टेक रेलवे के लिए काम की साबित होती है, तभी उसे आगे सपोर्ट मिलेगा. इससे फालतू या सिर्फ कागजों पर बने आइडियाज को बढ़ावा मिलने की संभावना कम होगी.

यात्रियों के लिए इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से दिखेगा. अगर सेफ्टी, ट्रैक मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस से जुड़ी टेक जमीन पर लागू होती है तो ट्रेन हादसों का खतरा कम हो सकता है.

Advertisement

कोच में तकनीकी खराबी या आग जैसी घटनाओं की पहचान पहले हो सकेगी. मेंटेनेंस बेहतर होने से ट्रेन लेट होने जैसी दिक्कतें भी घट सकती हैं. हालांकि यह असर धीरे-धीरे दिखेगा, क्योंकि टेक को बड़े नेटवर्क पर लागू करने में वक्त लगता है.

e-RCT होगा फास्ट

साथ ही Railway Claims Tribunal की प्रक्रिया को e-RCT के जरिए डिजिटल किया गया है. अब क्लेम से जुड़ी फाइलिंग और ट्रैकिंग ऑनलाइन होगी. इससे आम यात्रियों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे. केस का स्टेटस मोबाइल या कंप्यूटर से देखा जा सकेगा. सरकार का दावा है कि इससे प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी, लेकिन असली फर्क तब दिखेगा जब केस निपटाने की स्पीड भी जमीन पर बढ़ेगी.

रेलवे में पहले भी कई डिजिटल पहल हुई हैं. कुछ कामयाब रहीं और कुछ का असर सीमित रहा. ऐसे में इस नई पहल की असली परीक्षा जमीन पर होगी. अगर Rail Tech Portal पर चुने गए सॉल्यूशन समय पर लागू होते हैं और e-RCT में केस निपटाने की रफ्तार सच में बढ़ती है, तो इसे रेलवे सुधार की ठोस शुरुआत माना जाएगा. वरना यह भी एक और पोर्टल बनकर रह सकता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement