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आपका सिम मिसयूज हो रहा, डिजिटल अरेस्ट...', नोएडा में रिटायर्ड बैंक मैनेजर से ठगे 1.29 करोड़

दिल्ली-NCR के शहर ग्रेटर नोएडा से साइबर ठगी का एक नया केस सामने आया है, जहां एक शख्स को 1.29 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया है. विक्टिम रिटायर्ड बैंक मैनेजर हैं. पहले विक्टिम को अनजान नंबर से कॉल किया, डिजिटल अरेस्ट किया और फोन कॉल पर कोर्ट रूम दिखाया. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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विक्टिम को सिम कार्ड झांसे में फंसाया (File Photo: Unsplash.com)
विक्टिम को सिम कार्ड झांसे में फंसाया (File Photo: Unsplash.com)

साइबर ठगी का एक नया केस सामने आया है, जहां विक्टिम रिटायर्ड बैंक मैनेजर हैं और उनके बैंक खाते से 1.29 करोड़ रुपये उड़ा लिए गए हैं. पहले विक्टिम को डिजिटल अरेस्ट किया गया और फिर उनको फोन पर ही कोर्ट रूम दिखाया. इसके बाद वे घबरा गए और आखिर में  जिंदगीभर की कमाई गंवा बैठे. 

शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में FIR दर्ज हो चुकी है. पुलिस ने बताया है कि रिटायर्ड बैंक मैनेजर को सबसे पहले एक अनजान नंबर से कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद की पहचान टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) में काम करने वाले ऑफिसर के रूप में बताई. 

यह मामला ग्रेटर नोएडा का है. कॉलर ने विक्टिम को सबसे पहले बताया है कि उनके के नाम से एक सिम कार्ड जारी हुआ है. उस सिम कार्ड का यूज गैरकानूनी कामों में हो रहा है. 

विक्टिम को इसके बाद फर्जी केस का हवाला दिया जाता और गिरफ्तारी के नाम पर उसको डराया जाता है. विक्टिम को डिजिटल कोर्ट में पेश होने को कहा. 

डिजिटल अरेस्ट और फोन पर दिखाया कोर्ट रूम

विक्टिम को डिजिटल अरेस्ट किया और वीडियो कॉल पर फर्जी कोर्ट रूम भी दिखाया गया. साथ ही कहा कि अगर वह जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो उनको गिरफ्तार कर लिया जाएगा. 

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रिटायर्ड बैंक मैनेजर को करीब 2 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इसके बाद जांच के नाम पर उनसे ढेरों सवाल किए गए और बैंक डिटेल्स मांगी. साथ ही पूछा गया है कि बैंक खाते में कितना रुपया मौजूद है. 

जांच के नाम पर मांगे सभी पैसे और वापस करने का वादा 

साइबर ठगों ने विक्टिम को झूठा दिलासा दिया. साइबर ठगों ने कहा कि जांच के लिए उनको अपना रुपया एक दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा,  जिसको सरकारी एजेंसी का अकाउंट बताया. 

विक्टिम को भरोसा दिया कि अगर वह निर्दोष हैं तो उनकी रकम उनके बैंक खाते में वापस ट्रांसफर कर दी जाएगी. इसके बाद विक्टिम ने जब रुपये ट्रांसफर कर दिए तो कुछ दिन बाद उनको पता चला कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं. 

डिजिटल अरेस्ट क्या है? 

साइबर ठग भोले-भाले लोगों को डिजिटल अरेस्ट करते हैं. डिजिटल अरेस्ट में विक्टिम को ऑनलाइन मोड पर रहते हुए पूछताछ में शामिल होने को कहा जाता है. इसके बाद सामने वाला शख्स फर्जी जांच के नाम पर अलग-अलग सवाल करते हैं और यहां तक कि बैंक डिटेल्स तक हासिल कर लेते हैं. इस दौरान विक्टिम को फर्जी कोर्ट, जज, वकील और पुलिस आदि भी दिखाए जा सकते हैं.  

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यह भी पढ़ें: शख्स से 1 करोड़ 50 लाख की ठगी, ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर बनाया शिकार

ऐसे रहें साइबर ठगों से दूर 

साइबर ठगी से बचाव के लिए जरूरी है कि अनजान नंबर से आने वाले कॉल्स पर भरोसा ना करें. साइबर ठग फेक सिम, फेक पार्सल और आधार कार्ड की फोटोकॉपी आदि का फायदा उठाकर ठगी का शिकार बना सकते हैं. बचाव के लिए जरूरी है कि बैंक डिटेल्स किसी भी शख्स को ना दें भले ही सामने वाला शख्स खुद को बैंक कार्मचारी या पुलिस वाला बताए. 

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