
वेनेजुएल को लगातार दो भंयकर भूकंप का सामना करना पड़ा. दोनों ही भूकंप की तीव्रता 7 रिक्टर स्केल से ऊपर थी. भूकंप आने से कुछ सेकेंड पहले गूगल की तरफ से सभी को अलर्ट भेजा गया, जो लाइट की स्पीड से जाता है. जिसकी जानकारी कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके भी शेयर की है.
पहला भूकंप 7.4 रिक्टर स्केल पर आया और दूसरा भूकंप 40 सेकेंड बाद 7.2 रिक्टर स्केल पर आया. दोनों भूकंप ने भारी तबाही मचाई है, जहां कई इमारते धराशायी हो गईं और यहां तक कि इंटरनेट ठप हुआ. मलबे में कई लोगों की फंस होने की आशंका जताई गई है. साथ ही हजारों मौतों की आशंका है.
X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर एर यूजर्स ने गूगल की तरह से आने वाले भूकंप के नोटिफिकेशन अलर्ट का स्क्रीनशॉट्स शेयर क्या है. भूकंप अलर्ट में बताया है कि करीब 6.2 रिक्टर स्केल के तहत भूकंप आ रहा है, 341 किलोमीटर दूर है.
बड़ी ही खास है गूगल की सर्विस
गूगल की एक सर्विस है, जिसमें वह कुछ स्मार्टफोन की मदद से भूकंप की गति और दिशा का पता लगाता है. इसके बाद वह प्रकाश की गति से आसपास के स्मार्टफोन पर भूकंप का अलर्ट भेजता है.

फोन के एक्स्लरोमीटर का होता है इस्तेमाल
मॉडर्न स्मार्टफोन एक्स्लरोमीटर के साथ आते हैं, जो आमतौर पर स्मार्टफोन की रोटेशन को डिटेक्ट करते हैं. इसके बाद मोबाइल स्क्रीन को लैंडस्कैप मोड और नॉर्मल मोड में कन्वर्ट करता है. साथ ही यह वाइब्रेशन को भी डिटेक्ट करने का काम करता है.
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फोन के वाइब्रेशन से भूकंप का पता
गूगल का सिस्टम इस सेंसर की मदद से भूकंप और फोन वाइब्रेशन का पता लगाता है. ढेर सारे स्मार्टफोन से डेटा इकट्ठा होता है और सिस्टम एनालाइज करता है कि भूकंप है या नहीं. भूकंप का पता चलते ही गूगल अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर अलर्ट भेजता है.
दो तरह से भेजता है अलर्ट
गूगल के पास करीब 2 बिलियन एंड्रॉयड फोन है, जो इस नेटवर्क का हिस्सा हैं. गूगल का भूकंप अलर्ट सिस्टम दोनों सामान्यतः दो तरह के अलर्ट भेजता है, जिसमें एक हल्के भूकंप और दूसरा तीव्र भूकंप को लेकर बताते हैं.
कुछ सेकेंड पहली ही आता है मैसेज
गूगल ने भूकंप से पहले अलर्ट भेजा था तो फिर सवाल आता है कि आखिरकार लोग खुद को बचा क्यों नहीं पाए हैं. इसका जवाब है कि गूगल का भूकंप वाला अलर्ट सिस्टम कुछ सेकेंड पहले ही आता है. वक्त रहते जो लोग एक्शन लेते हैं वे सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाते हैं.