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AI के नाम पर कंपनियां लोगों को नौकरी ने नहीं निकाल सकती, चीनी कोर्ट का बड़ा फैसला

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम के बाद से दुनिया भर की टेक कंपनियां लाखों लोगों को जॉब से निकला रही हैं. चीन की एक अदालत ने कहा है कि AI कर्मचारियों को फायर करने का फ्री पास नहीं है.

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लोगों को जॉब से निकालने की वजह नहीं बन सकता AI: कोर्ट
लोगों को जॉब से निकालने की वजह नहीं बन सकता AI: कोर्ट

AI आएगा तो नौकरी जाएगी. ये डर अब तक सिर्फ बहस में था, लेकिन अब इस पर एक बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. चीन की एक अदालत के फैसले ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आ जाने से किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला नहीं जा सकता है.

इस फैसले के बाद टेक कंपनियों की स्ट्रैटिजी और कर्मचारियों की सुरक्षा, दोनों पर नई चर्चा शुरू हो गई है. पूरा मामला चीन के हांगझोउ शहर की एक कंपनी से जुड़ा है. गौरतलब है कि हांगझोउ चीन का वही शहर है जहां से दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां निकली हैं. अली बाबा और डीपसीक जैसी कंपनियां भी इसी शहर से निकली हैं.

परेशान हो कर इंप्लॉइ ने किया मुकदमा

इसी शहर में एक कर्मचारी का काम धीरे-धीरे AI टूल्स और बड़े लैंग्वेज मॉडल्स की वजह से कम हो गया. कंपनी ने सोचा कि अब इंसान की जगह मशीन से काम लिया जा सकता है. इसके बाद उस कर्मचारी को दूसरी पोस्ट ऑफर की गई, लेकिन उस नए रोल में सैलरी काफी कम थी और काम की शर्तें भी अलग थीं.

कर्मचारी ने इसे मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया. मामला कोर्ट पहुंचा और यहीं से कहानी पलट गई. अदालत ने साफ कहा कि कंपनी का ये कदम सही नहीं था. सिर्फ इस आधार पर कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वही काम कर सकता है, किसी को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जा सकता.

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AI के नाम पर ना हों जॉब कट

कोर्ट ने अपने फैसले में एक अहम बात कही, टेक्नोलॉजी बदलना कंपनी का हक है, लेकिन कर्मचारियों के अधिकार उससे खत्म नहीं हो जाते. अगर कंपनी ऑटोमेशन या AI अपना रही है, तो उसे लेबर कानूनों का भी पालन करना होगा. यानी कंपनी सीधे-सीधे ये नहीं कह सकती कि 'अब AI आ गया है, तुम्हारी जरूरत नहीं है'

इस फैसले का मतलब ये भी है कि कंपनियों को कर्मचारियों के साथ सही तरीके से व्यवहार करना होगा. अगर रोल बदलना है, तो जायज सैलरी और शर्तें देनी होंगी. अगर नौकरी खत्म करनी है, तो उसके लिए वैलिड वजह और प्रक्रिया जरूरी होगी. सिर्फ AI सस्ता है ये वजह काफी नहीं मानी जाएगी.

दिलचस्प बात ये है कि अदालत ने कर्मचारियों के लिए भी एक संदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि बदलती टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट करना जरूरी है. यानी AI को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि इंसानों को बिना वजह बाहर कर दिया जाए.

गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है. इससे पहले 2024 में गुआंझु की एक अदालत ने इसी तरह के एक केस में कहा था टेक्नोलॉजी अपग्रेड किसी की जॉब खत्म करने की वजह नहीं बन सकता है. चीन फिलहाल कई अलग अलग फ्रंट पर प्लान कर रहा है. इसमें अलग प्रोविजन बनाए जा रहे हैं जिससे AI बूम के बावजूद लोगों की जॉब्स पर ज्यादा असर नहीं पड़़ेगा.

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इस फैसले की चर्चा अब चीन तक सीमित नहीं है. दुनिया भर में Microsoft, Google, Amazon जैसी कंपनियां AI पर तेजी से काम कर रही हैं. कई जगहों पर लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है. ऐसे में चीन की अदालत का ये रुख कर्मचारियों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है.

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या दूसरे देशों में भी ऐसा ही रुख देखने को मिलेगा? क्या भविष्य में AI और नौकरियों को लेकर नए कानून बनेंगे? क्योंकि आने वाले समय में AI का असर हर सेक्टर, मीडिया, टेक, कस्टमर सपोर्ट, यहां तक कि क्रिएटिव फील्ड्स पर पड़ने वाला है.

AI बनाम नौकरी की ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. लेकिन चीन के इस फैसले ने इतना जरूर तय कर दिया है कि टेक्नोलॉजी की दौड़ में इंसानों के अधिकारों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

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