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रेट्रो टेक: Samsung ने 16 साल पहले लॉन्च किया था धूप से चार्ज होने वाला फोन

सैमसंग ने लगभग दो दशक पहले एक ऐसा मोबाइल फोन लॉन्च किया था जो धूप से चार्ज हो सकता था. 16 साल बाद अब कई कंपनियां सोलर पावर्ड फोन लॉन्च करने की तैयारी में हैं. लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है.

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सैमसंग ने 16 साल पहले पेश किया था धूप से चार्ज होने वाला फोन
सैमसंग ने 16 साल पहले पेश किया था धूप से चार्ज होने वाला फोन

आज स्मार्टफोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 200MP कैमरा और 100W फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स मिलते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि करीब 16 साल पहले सैमसंग ऐसा मोबाइल फोन लेकर आया था, जिसे सूरज की रोशनी से भी चार्ज किया जा सकता था?

साल 2009 में सैमसंग ने Solar Guru E1107 लॉन्च किया था. उस समय इसे दुनिया का पहला बड़े पैमाने पर एवेलेबल सोलर पावर्ड मोबाइल फोन बताया गया था. यह फोन खास तौर पर भारत जैसे देशों को ध्यान में रखकर बनाया गया था, जहां कई इलाकों में बिजली की सुविधा लिमिटेड थी. 

इमरजेंसी के लिए बेहतरीन फीचर

इस फोन का सबसे खास हिस्सा इसकी बैक साइड थी. पीछे एक छोटा सा सोलर पैनल लगा हुआ था. अगर बिजली उपलब्ध नहीं होती, तो यूजर फोन को धूप में रखकर बैटरी में थोड़ी चार्जिंग कर सकता था. यह पूरी तरह सोलर एनर्जी पर चलने वाला फोन नहीं था, बल्कि जरूरत पड़ने पर एक्स्ट्रा चार्ज देने वाला सॉल्यूशन था. 

सैमसंग के मुताबिक, अगर फोन को करीब एक घंटे तक तेज धूप में रखा जाए, तो उससे लगभग 5 से 10 मिनट तक बात की जा सकती थी. कंपनी ने यह भी कहा था कि पूरी बैटरी सिर्फ सोलर चार्जिंग से भरने में करीब 40 घंटे की तेज धूप लग सकती है. इसलिए इसका मकसद रोजाना चार्जर की जगह लेना नहीं था, बल्कि बिजली न होने पर फोन चालू रखने में मदद करना था. 

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समय से आगे के फीचर्स

उस दौर में यह फीचर काफी अलग था. खासकर गांवों और दूर-दराज के इलाकों में, जहां बिजली बार-बार चली जाती थी, वहां यह फोन उपयोगी माना गया. सैमसंग ने लॉन्च के समय साफ कहा था कि यह डिवाइस भारतीय कस्टमर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

हालांकि सोलर चार्जिंग के अलावा यह एक नॉर्मल फीचर फोन था. इसमें लगभग 1.5 इंच की स्क्रीन, FM रेडियो, टॉर्च, MP3 रिंगटोन, गेम्स और मोबाइल ट्रैकर जैसे फीचर दिए गए थे. मोबाइल ट्रैकर की मदद से अगर कोई फोन में SIM बदलता था, तो पहले से तय नंबर पर अलर्ट भेजा जा सकता था. फोन में SOS मैसेज जैसी सुविधा भी थी. 

फोन का वजन करीब 77 ग्राम था और इसमें 800mAh बैटरी दी गई थी. नॉर्मल यूज में कंपनी ने लगभग 8 घंटे तक टॉक टाइम और 570 घंटे तक स्टैंडबाय का दावा किया था. 

कीमत भी ज्यादा नहीं... अभी के हिसाब से

भारत में लॉन्च के समय Samsung Solar Guru E1107 की कीमत करीब 2,799 रुपये रखी गई थी. उस समय यह कीमत एक एंट्री-लेवल फीचर फोन के हिसाब से थोड़ी ज्यादा थी, लेकिन इसकी सोलर चार्जिंग तकनीक इसे अलग बनाती थी. 

लेकिन सवाल यह है कि इतनी अलग तकनीक होने के बावजूद यह फोन सक्सेस क्यों नहीं हो पाया? 

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सबसे बड़ी वजह थी कि फोन के पीछे लगा छोटा सोलर पैनल बहुत कम बिजली बना पाता था. एक घंटे की धूप में सिर्फ कुछ मिनट की कॉल मिलती थी. दूसरी तरफ यूजर को फोन काफी देर तक धूप में रखना पड़ता था, जो हर बार मुमकिन नहीं था. जैसे-जैसे बिजली की उपलब्धता और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ, लोगों की जरूरत भी बदल गई. 

सक्सेसफुल क्यों नहीं हो पाया?

इसके बाद स्मार्टफोन का दौर शुरू हुआ. बड़ी स्क्रीन, ज्यादा प्रोसेसिंग पावर और बड़ी बैटरियों की वजह से इतनी छोटी सोलर सेल से पर्याप्त चार्जिंग मिलना लगभग नामुमकिन हो गया. यही वजह है कि कंपनियों ने इस टेक को आगे नहीं बढ़ाया और फास्ट चार्जिंग, बड़ी बैटरी और पावर बैंक जैसे ऑप्शन्स पर ज्यादा ध्यान दिया.

दिलचस्प बात यह है कि आज, 2026 में भी कई कंपनियां सोलर चार्जिंग पर रिसर्च कर रही हैं. हाल के सालों में कुछ ब्रांड्स ने सोलर चार्जिंग वाले कॉन्सेप्ट फोन और एक्सेसरी दिखाए हैं, लेकिन अभी तक कोई मॉडर्न स्मार्टफोन इस टेक को बड़े स्तर पर बाजार में नहीं ला पाया है. यानी सैमसंग का 2009 का यह एक्सपेरिमेंट अपने समय से काफी आगे था. 

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