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मेरा लक्ष्‍य सिर्फ राष्ट्रमंडल खेल: अखिल

मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाने वाले अखिल कुमार पिछले कुछ समय से चोटों से जूझ रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि वह इस साल अक्‍टूबर में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में सफल रहेंगे.

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मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाने वाले अखिल कुमार पिछले कुछ समय से चोटों से जूझ रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि वह इस साल अक्‍टूबर में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में सफल रहेंगे.

अखिल पैर की चोट के कारण हाल में समाप्त हुई राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में दूसरे राउंड में हट गये थे. उन्हें पहले दौर में वाकओवर मिला था. अब उनकी निगाहें दिल्ली में तीन से 14 अक्‍टूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भी मेलबर्न जैसा प्रदर्शन को दोहराने पर लगी हैं.ओलंपियन अखिल ने कहा, ‘‘मेरे पैर में अब सिर्फ हल्की सी सूजन है. पूरा कोर ग्रुप अब 20 जुलाई से विशेष ट्रेनिंग में जुटेगा जिसके लिये मैं तैयार हूं.’’

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इस बैंथमवेट मुक्केबाज ने कहा, ‘‘चोटें खिलाड़ी की जिंदगी का हिस्सा होती हैं, लेकिन इनका असर खेल पर नहीं पड़ना चाहिए. मेरी कलाई की चोट ठीक है. पैर भी लगभग ठीक है, जिससे कड़ी ट्रेनिंग शुरू हो जायेगी.’’लोगों को राष्ट्रमंडल खेलों में इस अनुभवी मुक्केबाज से काफी उम्मीदे हैं क्योंकि उन्होंने 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में मोहम्मद अली कमर (फ्लाईवेट 48 किग्रा) के बाद देश को दूसरा स्वर्ण दिलाया था.

अखिल ने कहा, ‘‘अर्जुन की तरह मेरा लक्ष्य सिर्फ एक ही चीज राष्ट्रमंडल खेलों पर लगा है. अर्जुन ने चिड़िया की आंख को निशाना बनाया था, इसी तरह फिलहाल मेरा लक्ष्य इन खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है.’’अखिल ने 57वीं राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में 60 किग्रा वर्ग में भाग लिया था तो क्या वह अपने वर्ग में बदलाव करेंगे. इस पर उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय चैम्पियनशिप से पहले मुझे पैर की चोट के कारण आराम करने की सलाह दी गयी थी, जिससे मेरा वजन बढ़ गया था लेकिन मैं राष्ट्रमंडल खेलों में अपने 54 किग्रा वर्ग में ही शिरकत करूंगा.’’

बीजिंग ओलंपिक में क्वार्टरफाइनल तक पहुंचने वाले इस मुक्केबाज को पता है कि उन्हें दिल्ली में अफ्रीका के कई धुरंधर मुक्केबाजों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि घाना, कीनिया, नाईजीरिया और तंजानिया ने पूरी 10 सदस्यीय टीम भेजने का फैसला किया है. इस बैंथमवेट मुक्केबाज ने कहा, ‘‘चुनौती कठिन होगी, लेकिन भारत के सभी मुक्केबाज अपनी सरजमीं पर पदक जीतने के लिये बेताब हैं. मुक्केबाजी को मिल रही मीडिया कवरेज से भी सभी के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई है जो देश के लिये फायदेमंद साबित होगी.’’

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