स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से मात देकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली. फाइनल का यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा. 105 मिनट तक दोनों टीमों में से कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी थी. स्पेन के खिलाड़ी फेरन टोरेस ने मैच के 106वें मिनट में गोल दागकर अपनी टीम को बढ़त दिला दी. यह बढ़त आखिरी तक कायम रहा और स्पेन ने अर्जेंटीना को हराकर फीफा वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया.
चकनाचूर हुआ अर्जेंटीना का फिर से वर्ल्ड चैम्पियन बनने का सपना
लियोनेल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना की टीम लगातार दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप जीतने के बेहद करीब थी. फाइनल मुकाबले में करोड़ों फैन्स उम्मीद कर रहे थे कि मेसी अपने जादू से एक बार फिर अर्जेंटीना को चैम्पियन बनाएंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका, मेसी ने वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना के लिए शानदार खेल दिखाया. हालांकि, फाइनल में वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके.
A passionate rendition of Argentina’s national anthem before the @FIFAWorldCup Final 👏🇦🇷 pic.twitter.com/Bbpm0EL40G
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आखिर इस हार का जिम्मेदार कौन?
अगर हम इस हार की वजह देखने की कोशिश करें तो बड़ा कारण टीम का एज फैक्टर और जरूरत से ज्यादा वरिष्ठ खिलाड़ियों पर निर्भरता नजर आती है. अपना छठा वर्ल्ड कप खेल रहे लियोनेल मेसी ने इस टूर्नामेंट में अपना सब कुछ झोंक दिया. लेकिन फाइनल मैच में जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी तब वह गोल करने में नाकाम रहे. निकोलस ओटामेंडी और निकोलस टगलियाफिको जैसे अनुभवी डिफेंडरों ने सालों तक अर्जेंटीना की दीवार बनकर काम किया है.
What it means to see your nation score in a @FIFAWorldCup Final! 🇪🇸 pic.twitter.com/tlML6zMOH9
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युवा खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना पड़ा भारी?
हार की एक बड़ी जिम्मेदारी टीम मैनेजमेंट पर भी जाती है. साल 2022 वर्ल्ड कप और 2024 कोपा अमेरिका जिताने वाले इस स्क्वाड पर जरूरत से ज्यादा भरोसा जताया गया. गेरोनिमो रुली जैसे 34 वर्षीय बैकअप गोलकीपर और अनुभवी खिलाड़ियों को बनाए रखने के चक्कर में अर्जेंटीना युवा खिलाड़ियों को समय रहते बदलाव के दौर में शामिल करने में चूक गया.
अर्जेंटीना को बदलनी होगी रणनीति
इस हार के साथ ही मेसी, ओटामेंडी, टगलियाफिको और रुली जैसे दिग्गजों का इंटरनेशनल करियर अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. इन खिलाड़ियों ने अर्जेंटीना को साल 2022 में वर्ल्ड चैम्पियन बनाया और देश को सालों बाद खुशी के पल दिए. स्पेन के खिलाफ यह हार दर्दनाक जरूर है, लेकिन यह अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के लिए एक बड़ा सबक भी है. अब बिना मेसी के साल 2030 के लिए एक नई और युवा टीम खड़ी करने का समय आ गया है. जिसकी तैयारी टीम मैनजमेंट को अभी से शुरू करनी पड़ेगी.