फ्रांस ने फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बना ली है. सेमीफाइनल में उसने बेल्जियम को 1-0 से मात दी. दोनों टीमों ने तेजतर्रार फुटबॉल का नजारा पेश किया, लेकिन मध्यांतर तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी. हाफ टाइम के बाद 51वें मिनट में फ्रांस को सैम्युएल उमटिटी ने 1-0 की बढ़त दिला दी. आखिरकार यह गोल निर्णायक साबित हुआ.
फ्रांस की टीम अब 15 जुलाई को होने वाले फाइनल में इंग्लैंड और क्रोएशिया के बीच कल (बुधवार को) होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से भिड़ेगी.
बेल्जियम के खिलाफ विश्व कप के तीन मैचों में यह फ्रांस की तीसरी जीत है. इससे पहले फ्रांस ने 1938 में पहले दौर का मुकाबला 3-1 से जीतने के बाद 1986 में तीसरे दौर के प्ले आफ मैच में 4-2 से जीत दर्ज की.
इसके साथ ही बेल्जियम का 24 मैचों का अजेय अभियान भी थम गया. इस दौरान उसने 78 गोल किए और इस मैच से पहले सिर्फ एक मैच में टीम गोल नहीं कर पाई. बेल्जियम की टीम हालांकि विश्व कप में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ विदा हुई और अपने प्रदर्शन से लोगों का दिल जीतने में सफल रही.
Il fait du bien celui-là !!!!!
1-0
— Equipe de France (@equipedefrance)
बेल्जियम की टीम ने थामस म्यूनियर के निलंबन के कारण उनकी जगह मूसा डेम्बले को उतारा, जबकि फ्रांस ने निलंबन के बाद वापसी कर रहे ब्लेस मातुइदी को कोरेनटिन टोलिसो की जगह शुरुआती एकादश में शामिल किया.
इस विश्व कप में इससे पहले तक बेल्जियम ने दमदार प्रदर्शन किया. एडन हेजार्ड की कप्तानी में टीम ने पहले मुकाबले में पनामा को 3-0 से शिकस्त दी. अगले दो मैचों में भी बेल्जियम को कोई खास परेशानी नहीं हुई और ट्यूनिशिया को 5-2 एवं इंग्लैंड को 1-0 से हराकर टीम ने नॉकआउट दौर में प्रवेश किया.
प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेल्जियम को जापान ने कड़ी टक्कर दी और एक समय एशियाई देश ने 2-0 की बढ़त बना ली. हालांकि, बेल्जियम ने हार नहीं मानी और मैच में शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज की. क्वार्टर फाइनल में उसका सामना पांच बार की विजेता ब्राजील से हुआ.
ब्राजील के खिलाफ शुरू से ही बेल्जियम ने आक्रामक खेले दिखाया और मैच को 2-1 से अपने नाम किया. मैनचेस्टर यूनाइटेड से खलने वाले स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकु ने इस टूनार्मेंट में अपने देश के लिए कमाल का प्रदर्शन करते हुए कुल चार गोल दागे हैं.
लुकाकु के अलावा हेजार्ड और केविन डे ब्रूने ने भी अपने दमदार प्रदर्शन से फॉरवर्ड लाइन के मजबूती प्रदान की है. टीम का डिफेंस भी इस विश्व कप में बेहतरीन रहा और गोलकीपर तिबाउट कोर्टुआ ने अहम मौकों पर शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम की जीत में अहम योगदान दिया है.
दूसरी ओर फ्रांस की टीम 1998 के बाद पहली बार खिताब जीतने के इरादे से मैदान में उतरी. जर्मनी में 2006 में हुए विश्व कप में फ्रांस फाइनल तक पहुंचा था, लेकिन इटली से पेनल्टी शूटआउट में हार के बाद उसे खिताब से महरूम रहना पड़ा था.
फ्रांस की शुरुआत धीमी रही थी, उसने अपने पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को 2-1, जबकि दूसरे मैच में पेरू को 1-0 से हराया था. अंतिम ग्रुप मैच में फ्रांस को डेनमार्क से गोल रहित ड्रॉ खेलना पड़ा था. नॉकआउट स्तर में फ्रांस ने आक्रमक खेल दिखाते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना पर 4-3 और क्वार्टर फाइनल में उरुग्वे पर 2-0 से आसान जीत दर्ज की.