Will Virat Kohli- Rohit Sharma Ranji Trophy: क्या विराट कोहली और रोहित शर्मा का टेस्ट क्रिकेट में फ्यूचर बचा हुआ है? यह सवाल हेड कोच गौतम गंभीर से पूछा गया था. इस इस पर गंभीर ने कहा, 'यह उन पर निर्भर करता है'. वहीं गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में खेलने वाले खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट को गंभीरता से लें और अगर वे कहीं और खेलने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं तो रणजी ट्रॉफी खेलें. यानी एक बात तो साफ है कि इशारों- इशारों में हेड कोच गौतम गंभीर ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि कोहली और रोहित को घरेलू क्रिकेट में, खास तौर पर रेडबॉल क्रिकेट खेखेलने के लिए उतरना होगा. भारत के कई सुपर स्टार क्रिकेटर घरेलू क्रिकेट के रेड बॉल फॉर्मेट (फर्स्ट क्लास क्रिकेट) से लंबे समय से दूर हैं.
विराट कोहली (2 से 5 नवंबर) ने आखिरी बार 2012 में घरेलू लाल गेंद क्रिकेट खेला था, रोहित शर्मा ने 2015 (7 से 10 नवंबर) में खेलते हुए दिखे थे. कोहली ने यह मुकाबला गाजियाबाद में यूपी के खिलाफ खेला, जहां उन्होंने दोनों पारियों में 14 और 43 रन बनाए. वहीं रोहित आखिरी बार फर्स्ट क्लास मैच यूपी के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में खेलते दिखे थे, जहां उन्होंने 113 रनों की शानदार पारी खेली.
पिछले चार वर्षों में शुभमन गिल, रवींद्र जडेजा , मोहम्मद सिराज और केएल राहुल ने कुल मिलाकर सिर्फ चार लंबे फॉर्मेट वाले घरेलू मैच खेले हैं. आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां कर रहे हैं. भारत की टेस्ट टीम के मुख्य खिलाड़ी बमुश्किल ही घरेलू मैदानों पर खेलते हैं, और लाल गेंद से मैच खेलने का अभ्यास न होने का असर इंटरनेशनल नतीजों पर पड़ रहा है.

रोहित शर्मा की अगुआई वाली भारतीय टीम ने एक दशक बाद बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) गत रविवार को ऑस्ट्रेलिया के सामने सरेंडर कर दी. इससे पहले टीम इंडिया को न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर 0-3 से हार का सामना करना पड़ा था. इन दो झटकों के कारण ही भारत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल खेलने से चूक गया.
कोहली ने BGT के 5 टेस्ट मैचों में 190 रन 23.75 के एवरेज से बनाए. वहीं रोहित शर्मा का तो बल्ले से बहुत ही बुरा हाल रहा. रोहित शर्मा ने 3 मैचों में महज 31 रन 6.20 के एवरेज साथ बना पाए. वहीं कई दिग्गज क्रिकेटर भी रोहित शर्मा और कोहली को घरेलू क्रिकेट खेलने की सलाह दे चुके हैं.
When legends falter, questions arise.
— Star Sports (@StarSportsIndia)
A stint in domestic cricket could be the spark Rohit needs to rediscover his hunger and bounce back stronger.
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गावस्कर ने कहा गंभीर को कड़े कदम उठाने की जरूरत
चूंकि भारत के स्टार खिलाड़ी घरेलू स्तर पर टेस्ट क्रिकेट खेलने से बचते हैं, इस पर दिग्गज क्रिकेटर और कमेंटेटर सुनील गावस्कर ने भी सवाल उठाए. गावस्कर ने हाल में कहा था कि भारत के नियमित खिलाड़ियों को खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करना चाहिए. उन्होंने कहा- 23 जनवरी को रणजी ट्रॉफी का अगला दौर है, देखते हैं कि इस टीम के कितने खिलाड़ी खेलते हैं? अगर आप उन मैचों में नहीं खेलते हैं, तो मैं कहता हूं कि गौतम गंभीर को कुछ कड़े फैसले लेने होंगे.
emphasizes this strict criteria for selecting players to the National Test team after ’s loss in the series for the first time in a decade. 🏏
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जय शाह ने दी थी चेतावनी, श्रेयस-ईशान को हुआ नुकसान
पिछले साल अगस्त में बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव जय शाह ने टीम इंडिया के खिलाड़ियों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने घरेलू क्रिकेट की जगह टी20 इंडियन प्रीमियर लीग ( आईपीएल ) को प्राथमिकता दी तो उन्हें 'गंभीर परिणाम' भुगतने पड़ेंगे. उन्होंने तब अनुबंधित खिलाड़ियों को लिखे पत्र में कहा था घरेलू क्रिकेट हमेशा से भारतीय क्रिकेट की नींव रहा है और खेल के प्रति हमारे दृष्टिकोण में इसे कभी कम करके नहीं आंका गया है. इसके बाद श्रेयस अय्यर और ईशान किशन पर एक्शन हुआ और उन्होंने बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को खो दिया था.
इरफान पठान ने दिया तेंदुलकर का उदाहरण
स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में पूर्व भारतीय खिलाड़ी इरफान पठान ने इस समस्या को हल करने के लिए 'कल्चरल चेंज' की मांग की. उन्होंने कहा था कि हमें संस्कृति बदलनी होगी. महान सचिन तेंदुलकर ने भी रणजी ट्रॉफी तब खेली जब उन्हें इसकी जरूरत नहीं थी, उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह पिच पर ज्यादा समय बिताना चाहते थे.
Time to shift the spotlight! 🌟 calls for an end to the superstar culture, emphasizing the importance of building a strong team-first mentality in Indian cricket💬🇮🇳
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बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में दिखी टीम की कमजोरियां
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ BGT में 3-1 से मिली हार में एक चीज तो साफ तौर पर नजर आई कि भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी 'रेड बॉल' के आगे कमजोर पड़ जाते हैं. शॉट सेलेक्शन लापरवाही बरती गई, नतीजतन ऋषभ पंत बार-बार जोखिम भरे स्ट्रोक खेलकर आउट हो रहे थे. बल्लेबाज बार-बार एक ही गलती कर रहे थे.
कोहली ऑफ-स्टंप के बाहर की गेंदों को नहीं खेल पा रहे थे. गेंदबाज लंबे स्पैल फेंकने के लिए तैयार नहीं थे. सिराज अक्सर लय खो रहे थे और हर्षित राणा तेजी बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे थे. कुल मिलाकर खिलाड़ियों में टेस्ट को नेचर का अपनाने की कमी नजर आई. गिल क्रीज से बाहर निकलकर कोशिश करते दिखे. वहीं रोहित शर्मा अपनी पारी की शुरुआत में स्ट्रोक लगाते दिखे.