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वैभव को खिलाएं तो किसे बिठाएं...? आयरलैंड में गंभीर-अय्यर के सामने करोड़ों का सवाल

आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा सवाल वैभव सूर्यवंशी बन चुके हैं. महज 15 साल की उम्र में आईपीएल और इंडिया ए के लिए तूफानी बल्लेबाजी करने वाले वैभव इंटरनेशनल डेब्यू के दरवाजे पर खड़े हैं, लेकिन उनकी एंट्री आसान नहीं है...

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वैभव का तूफान या चैम्पियंस पर भरोसा? (Photo, Getty)
वैभव का तूफान या चैम्पियंस पर भरोसा? (Photo, Getty)

आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज से भारत के नए युग की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन सबसे बड़ी चर्चा 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लेकर है. आईपीएल और इंडिया ए के लिए धमाकेदार प्रदर्शन के बाद उनके अंतरराष्ट्रीय डेब्यू की मांग जोर पकड़ रही है. ऐसे में गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर को तय करना होगा कि भविष्य के इस सितारे को तुरंत मौका दिया जाए या फिर वर्ल्ड चैम्पियन संयोजन पर भरोसा बनाए रखा जाए.

शुक्रवार को जब भारत आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला खेलने उतरेगा, तब निगाहें सिर्फ कप्तान श्रेयस अय्यर या भारत की जीत पर नहीं होंगी. सबसे बड़ा सवाल होगा- क्या 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को इंटरनेशनल डेब्यू मिलेगा?

वैभव इन दिनों सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक सनसनी हैं. आईपीएल में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से चर्चा में आए इस किशोर बल्लेबाज ने हाल ही में दांबुला में श्रीलंका ए के खिलाफ सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन ठोककर फिर साबित कर दिया कि उनकी प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखना सिर्फ प्रतिभा का सवाल नहीं होता, टीम संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है.

यहीं से शुरू होती है गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर की सबसे बड़ी दुविधा.

आखिर जगह बने तो किसकी कीमत पर?

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भारत की मौजूदा टी20 टीम में ओपनिंग स्लॉट लगभग तय माने जाते हैं. संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन शीर्ष क्रम का हिस्सा हैं. खास बात यह है कि ये तीनों खिलाड़ी हालिया टी20 विश्व कप जीत के अहम किरदार रहे हैं.

विश्व कप फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ सैमसन, अभिषेक और किशन तीनों ने अर्धशतक जमाए थे. ऐसे में सिर्फ लोकप्रियता या उत्साह के आधार पर इनमें से किसी एक को बाहर करना आसान फैसला नहीं होगा.

सबसे ज्यादा दबाव शायद संजू सैमसन पर

सैमसन के टी20 अंतरराष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि वह ओपनर के तौर पर सबसे खतरनाक बल्लेबाज हैं. ओपनिंग करते हुए उनका स्ट्राइक रेट 181 से ज्यादा है, जबकि मध्यक्रम में उतरने पर यह काफी गिर जाता है. यानी अगर वैभव को ओपनिंग में खिलाया जाता है और सैमसन को नीचे भेजा जाता है, तो भारत अपने सबसे प्रभावी हथियार को कमजोर भी कर सकता है.

अभिषेक शर्मा को हटाना लगभग नामुमकिन

दूसरी तरफ अभिषेक शर्मा दुनिया के नंबर-1 टी20 बल्लेबाज हैं. उनका स्ट्राइक रेट 190 से ऊपर है और पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार मैच जिताऊ पारियां खेली हैं. ऐसे में वैभव को मौका देने के लिए अभिषेक को बाहर बैठाना शायद टीम प्रबंधन के लिए सबसे कठिन फैसला होगा.

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यानी वैभव की राह सिर्फ प्रतिभा से नहीं, बल्कि आंकड़ों और प्रदर्शन की मजबूत दीवार से भी टकरा रही है.

क्या सैमसन नंबर-6 पर खेल सकते हैं?

कागज पर यह समाधान आसान दिखता है. सैमसन पहले नंबर-4 और नंबर-5 पर बल्लेबाजी कर चुके हैं. लेकिन मौजूदा टीम में ये दोनों स्थान कप्तान श्रेयस अय्यर और उपकप्तान तिलक वर्मा के लिए लगभग तय हैं.

ऐसे में नंबर-6 ही एकमात्र विकल्प बचता है. समस्या यह है कि यह स्थान आमतौर पर ऑलराउंडर का होता है. शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर और सूर्यांश शेडगे जैसे खिलाड़ी इसी भूमिका के दावेदार हैं. अगर सैमसन वहां खेलते हैं तो भारत को अतिरिक्त गेंदबाज की कीमत चुकानी पड़ सकती है.

वैभव भले खेलें या नहीं, दबाव बना चुके हैं

दिलचस्प बात यह है कि वैभव को डेब्यू मिले या न मिले, उन्होंने टीम के स्थापित बल्लेबाजों पर दबाव जरूर बना दिया है. हर बड़ी प्रतिभा ऐसा ही करती है. जब कोई 15 साल का बल्लेबाज लगातार सुर्खियां बटोर रहा हो, तब शीर्ष क्रम के खिलाड़ियों को पता होता है कि खराब फॉर्म की गुंजाइश अब पहले जैसी नहीं रही. चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की निगाहें लगातार वैभव पर टिकी रहेंगी.

श्रेयस अय्यर के लिए भी परीक्षा

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यह सीरीज सिर्फ वैभव की नहीं, बल्कि श्रेयस अय्यर की भी परीक्षा है. पहली बार उन्हें भारत की टी20 टीम की पूर्णकालिक कप्तानी मिली है. आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स को चैम्पियन बनाने और पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करनी है.

उनका पहला बड़ा फैसला शायद यही होगा- क्या भविष्य को मौका दिया जाए या वर्तमान की जीतने वाली टीम को बरकरार रखा जाए?

गेंदबाजी भी कम चुनौती नहीं

भारत की तेज गेंदबाजी भी नए चेहरों से भरी हुई है. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और वरुण चक्रवर्ती जैसे बड़े नाम मौजूद नहीं हैं. ऐसे में हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा और प्रिंस यादव जैसे गेंदबाजों के लिए यह सीरीज खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर है.

खासतौर पर प्रसिद्ध कृष्णा हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे में 5  विकेट लेकर शानदार फॉर्म में हैं.

आयरलैंड को हल्के में नहीं ले सकते 

आयरलैंड भले ही जोश लिटिल, मार्क अडायर, पॉल स्टर्लिंग और कर्टिस कैंफर जैसे खिलाड़ियों की चोटों से जूझ रहा हो, लेकिन अपने घरेलू मैदान पर वह हमेशा खतरनाक टीम साबित हुई है.

नए कप्तान लॉर्कन टकर के अलावा हैरी टेक्टर, जॉर्ज डॉकरेल, गैरेथ डेलानी और भारतीय मूल के जय मूंदड़ा जैसे खिलाड़ी भारत को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं.

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फैसला जो सुर्खियां बनाएगा

कई बार मैच शुरू होने से पहले ही सबसे बड़ी कहानी लिखी जा चुकी होती है. बेलफास्ट में भी कुछ ऐसा ही है. भारत जीतेगा या आयरलैंड चौंकाएगा, इसका जवाब बाद में मिलेगा. लेकिन टॉस से पहले ही एक सवाल पूरे क्रिकेट जगत को बेचैन कर रहा है...

क्या 15 साल का वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के नए टी20 युग का पहला चेहरा बनने जा रहा है? 

- या फिर टीम प्रबंधन फिलहाल वर्ल्ड चैम्पियन संयोजन पर ही भरोसा जताएगा? इस सवाल का जवाब सिर्फ प्लेइंग इलेवन नहीं बताएगी, बल्कि भारतीय क्रिकेट की आने वाली दिशा भी तय कर सकता है.

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