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'SIX मशीन' वैभव... पहले दिग्गजों के पैर छुए, फिर दिखा IPL में महा...महाभारत

आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने ऐसा तूफान मचाया कि सनराइजर्स हैदराबाद की पूरी रणनीति बिखर गई. न्यू चंडीगढ़ में खेले गए मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स के इस युवा बल्लेबाज ने सिर्फ 29 गेंदों पर 97 रन ठोक दिए. मैच से पहले सुनील गावस्कर के पैर छूने वाला यह विनम्र लड़का मैदान पर उतरते ही गेंदबाजों के लिए डर का दूसरा नाम बन गया.

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पहले सम्मान, फिर प्रलय…
पहले सम्मान, फिर प्रलय…

टॉस में अभी एक घंटा बाकी था. न्यू चंडीगढ़ का महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था. ग्राउंड स्टाफ पिच पर आखिरी काम कर रहे थे. ब्रॉडकास्ट कैमरों के तार बाउंड्री लाइन के किनारे बिछ रहे थे. राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाड़ी धीरे-धीरे वॉर्म-अप के लिए बाहर निकल रहे थे.

इन्हीं सबके बीच गुलाबी जर्सी पहने एक लड़का मैदान पर आया.

न कोई हड़बड़ी.न चेहरे पर दबाव...न एलिमिनेटर का बोझ. जैसे दुनिया में उससे ज्यादा जरूरी कोई काम ही न हो. वह था- 15 साल का वैभव सूर्यवंशी.

ओपनर की तरह पिच देखने आया. ब्रॉडकास्टर्स से बात की. कोचिंग स्टाफ से कुछ चर्चा की. फिर टीममेट्स के साथ फुटबॉल खेलने लगा. ऐसे दौड़ रहा था जैसे IPL प्लेऑफ नहीं, मोहल्ले की शाम हो. जैसे खेल उसके लिए जिम्मेदारी नहीं, सिर्फ आनंद हो.

फिर उसकी नजर बाउंड्री लाइन के पास खड़े सुनील गावस्कर पर पड़ी.

वैभव दौड़कर गया. झुककर उनके पैर छुए. संजय बांगड़ को भी वही सम्मान मिला. जब वह एंकर जतिन सप्रू की तरफ बढ़ा, तो सप्रू खुद पीछे हट गए- 'अरे नहीं-नहीं…' लेकिन वैभव नहीं माना.

कुछ ही मिनटों में वीडियो वायरल हो गया. लोग 15 साल के इस लड़के की विनम्रता पर मोहित थे. संस्कारों की तारीफ हो रही थी. बिहार के इस बच्चे की तहजीब पर सोशल मीडिया झूम रहा था.

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लेकिन किसी ने ये नहीं देखा कि उस शाम मैदान पर वैभव सूर्यवंशी ने आखिरी बार किसी को सम्मान दिया था.उसके बाद अगले 8 ओवरों में उसने सिर्फ तबाही की.

29 गेंद… और क्रिकेट का संतुलन हिल गया

97 रन, 12 छक्के, रिकॉर्ड टूटे, गेंदबाज टूटे, रणनीतियां टूट गईं. और एक 15 साल के लड़के ने IPL के सबसे बड़े मंच पर खेल को अपनी मर्जी से मोड़ा.

जब प्रफुल्ल हिंगे ने आखिरकार उसे डीप थर्ड पर कैच कराया, तब भी प्रेस बॉक्स में बैठे अनुभवी पत्रकारों के चेहरों पर वही भाव था- स्तब्धता.

शोर नहीं था. बस एक अजीब-सी खामोशी. जैसे सबके भीतर एक ही सवाल घूम रहा हो- क्या हमने अभी सच में ये देखा?.

राजस्थान रॉयल्स ने 243 रन बनाए. 47 रनों से मैच जीता. क्वालिफायर-2 में पहुंच गई. लेकिन आने वाले सालों में कोई स्कोरकार्ड याद नहीं रखेगा.

लोग सिर्फ वो एहसास याद रखेंगे-  जब वैभव बल्लेबाजी कर रहा था और पूरा स्टेडियम सांस रोककर बैठा था. यह लड़का सामान्य नहीं है.

जिस उम्र में बच्चे स्कूल की टीम में जगह बनाने का सपना देखते हैं, उस उम्र में वैभव बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी खेल रहा था.

- 12 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट.

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- 14 साल की उम्र में IPL डेब्यू की पहली गेंद पर छक्का.

- फिर गुजरात टाइटन्स के खिलाफ 38 गेंदों में 101 रन - IPL इतिहास का सबसे युवा शतकवीर.

- अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में 80 गेंदों पर 175 रन. प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट.

अब हालत ये है कि रिकॉर्ड भी उसके बारे में पर्याप्त नहीं लगते.

SRH की सारी प्लानिंग 3 ओवर में खत्म

मैच से पहले सनराइजर्स हैदराबाद के पास योजना थी. और वह खराब योजना नहीं थी. पैट कमिंस और ईशान मलिंगा फुल लेंथ रखेंगे. लेग साइड पर फील्ड जमाई जाएगी. शॉर्ट बॉल सरप्राइज के तौर पर इस्तेमाल होगी. वैभव को हवा में शॉट खेलने से रोका जाएगा.

कागज पर सब सही था. लेकिन क्रिकेट कागज पर नहीं खेला जाता. और वैभव सूर्यवंशी तो बिल्कुल भी नहीं.

- जरा-सी छोटी गेंद - पुल.
- हल्की-सी ओवरपिच- सीधा साइटस्क्रीन के पार.
- लाइन इधर गई, गेंद उधर गई.

कमिंस - 4 ओवर, 64 रन.
मलिंगा- सीजन के सबसे किफायती गेंदबाजों में से एक, लेकिन यहां बेबस.

कुछ ओवर बाद SRH की रणनीति नहीं बची थी. सिर्फ प्रार्थना बची थी. 'वो गेंदबाज को नहीं, सिर्फ गेंद को देखता है. ध्रुव जुरेल ने मैच के बाद वैभव के बारे में जो कह, शायद वही उसकी असली कहानी है.

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उन्होंने कहा, 'हम बचपन से सुनते हैं - गेंद देखो, गेंदबाज नहीं. लेकिन जब सामने बड़ा नाम होता है, तो नजर गेंदबाज पर चली जाती है. वैभव अलग है. उसे फर्क ही नहीं पड़ता सामने कौन है.'

यही अंतर है. पैट कमिंस उसके लिए सिर्फ एक गेंद फेंकने वाला खिलाड़ी है. जसप्रीत बुमराह सिर्फ एक रिलीज पॉइंट.मिचेल स्टार्क सिर्फ एक रन-अप. नामों का दबाव वहां खत्म हो जाता है, जहां वैभव की नजर गेंद पर टिकती है.

और शायद यही चीज उसे बाकी पीढ़ी से अलग बनाती है.

97 पर आउट… लेकिन असर अनंत

आठवें ओवर तक वह 88 पर पहुंच चुका था. सामने थे प्रफुल्ल हिंगे. पहले मुकाबले में हिंगे ने उसे पहली गेंद पर आउट किया था. इस बार वैभव हिसाब बराबर कर रहा था.

- फुल टॉस- छक्का
- ओवरपिच- फिर छक्का.
- 29 गेंदों में 97.

क्रिस गेल का सबसे तेज IPL शतक सिर्फ एक शॉट दूर था.

फिर हिंगे ने शॉर्ट और वाइड गेंद डाली. वैभव अपरकट खेलने गया. एज लगा. कैच हो गया. पारी खत्म.

... लेकिन सच कहें तो, उस समय तक मैच क्रिकेट से आगे जा चुका था. वो एक अनुभव बन चुका था।

मैच के बाद SRH के बॉलिंग कोच जेम्स फ्रैंकलिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए थे अपनी टीम के एलिमिनेशन पर बात करने. लेकिन कमरा सिर्फ एक नाम सुनना चाहता था- वैभव सूर्यवंशी.

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फ्रैंकलिन ने तकनीकी बातें करने की कोशिश की. फील्ड सेटिंग समझाई. मार्जिन की बात की. पावरप्ले प्लान समझाया.फिर अचानक शब्द खत्म हो गए;

उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता क्रिकेट ने इससे पहले ऐसा टैलेंट देखा है. जो वह कर रहा है, वो अस्वाभाविक है… और डरावनी बात ये है कि उसके करियर में अभी 25 साल बाकी हैं.'

एक बॉलिंग कोच, जिसकी टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई, प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी बल्लेबाज की प्रतिभा पर मोहित बैठा था. यही वैभव सूर्यवंशी का असर है. राजस्थान रॉयल्स की सबसे बड़ी रणनीति? उसे बिल्कुल अकेला छोड़ देना.

रियान पराग से पूछा गया- 'एलिमिनेटर जैसे बड़े मैच से पहले आप वैभव से क्या बात करते हैं?'

पराग हंस पड़े. 'कुछ नहीं.' बस खेलने दो? 'हां… बस खेलने दो.'

कभी-कभी महान प्रतिभाओं को कोचिंग नहीं चाहिए होती. उन्हें सिर्फ जगह चाहिए होती है.

वैभव के साथ राजस्थान रॉयल्स ने शायद IPL की सबसे समझदार मैनेजमेंट की है-  उसे बदलने की कोशिश नहीं की.

और अब डरिए… क्योंकि यह सिर्फ शुरुआत है. उसके इस सीजन में 65 छक्के हो चुके हैं. वह अभी 16 साल का भी नहीं हुआ. अगले मार्च में होगा. मैदान के बाहर वही लड़का है जो बड़ों के पैर छूता है. संस्कारों से भरा हुआ. शांत... संकोची... लेकिन जैसे ही वह बाउंड्री लाइन पार करता है, कुछ बदल जाता है.

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फिर वह सिर्फ गेंद देखता है. और गेंदबाजों के लिए भगवान से प्रार्थना करने का समय शुरू हो जाता है. ईश्वर गेंदबाजों की रक्षा करे.
 

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