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ट्रांजिशन, वर्कलोड मैनेजमेंट और इंजरी... T20 की वर्ल्ड चैम्पियन टीम इंडिया कहां कर रही चूक?

आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन के लिए किसी एक खिलाड़ी, कप्तान या रणनीति को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा. ट्रांजिशन, वर्कलोड मैनेजमेंट, प्रमुख खिलाड़ियों की चोट और नए चेहरों को आजमाने की प्रक्रिया ने टीम के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.

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श्रेयस अय्यर की कप्तानी कुछ खास नहीं रही है. (Photo: X/@BCCI)
श्रेयस अय्यर की कप्तानी कुछ खास नहीं रही है. (Photo: X/@BCCI)

दो साल तक टी20 क्रिकेट में दबदबा, वर्ल्ड कप और एशिया कप का खिताब... लेकिन अब अचानक क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में टीम इंडिया की जीत की गाड़ी पटरी से उतरती दिखाई दे रही है. आयरलैंड के खिलाफ सीरीज गंवाने के बाद भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ भी उतना अच्छा खेल नहीं दिखा पाई है. नए कप्तान, बड़े खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी और युवा चेहरों को आजमाने के बीच सवाल उठने लगा है कि आखिर टीम इंडिया से चूक कहां हो रही है?

भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक का मानना है कि कुछ मुकाबलों में मिली हार के बाद जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी जा रही हैं. उनके मुताबिक टीम की रणनीति और खेलने का तरीका नहीं बदला है, बल्कि भारतीय टीम फिलहाल ट्रांजिशन के दौर से गुजर रही है. कप्तान बदला है, कुछ प्रमुख खिलाड़ी चोटिल या रेस्ट पर हैं. साथ ही भविष्य को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका दिया जा रहा है.

नॉटिंघम में मीडिया से बात करते हुए सितांशु कोटक ने टीम इंडिया की लगातार हार, आलोचना, ट्रांजिशन और बड़े खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी पर खुलकर अपनी बात रखी. भारतीय टीम पिछले टी20 वर्ल्ड कप तक शानदार फॉर्म में थी. टीम ने लंबे समय तक कोई टी20 सीरीज नहीं गंवाई और वर्ल्ड कप के साथ-साथ एशिया कप का खिताब भी अपने नाम किया. लेकिन अब तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है.
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हालांकि सितांशु कोटक का मानना है कि दो-तीन मुकाबलों में हार के बाद पूरी टीम की क्षमता और रणनीति पर सवाल खड़े करना सही नहीं है. उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में लगातार सुधार करना है. पिछले वर्ल्ड कप के बाद से हम अगले स्तर पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि बाकी टीमें भी बेहतर होना चाहती हैं. हम सिर्फ एक मैच के नतीजे के बारे में नहीं सोचते.'

क्या ट्रांजिशन के चलते बिगड़ी स्थिति?
भारतीय टीम की मौजूदा स्थिति की सबसे बड़ी वजह ट्रांजिशन को माना जा सकता है. श्रेयस अय्यर ने करीब 30 महीने बाद टी20 टीम में वापसी की और उन्हें सीधे कप्तानी की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई. सूर्यकुमार यादव की जगह कप्तान बने श्रेयस के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं.

उन्हें लंबे समय बाद टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में खुद को स्थापित करना है, अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देना है और साथ ही युवा खिलाड़ियों से सजी टीम की कमान भी संभालनी है. कप्तानी में बदलाव के साथ प्लेइंग कॉम्बिनेशन भी लगातार बदल रहा है. नए खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है और टीम मैनेजमेंट भविष्य के लिए विकल्प तैयार करने में जुटा है.
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सितांशु कोटक ने कहा, 'हम ट्रांजिशन के दौर से गुजरे हैं. कप्तान बदला गया है. हार्दिक यहां नहीं हैं और हम नए खिलाड़ियों को मौका दे रहे हैं, ताकि उन्हें अगले दो साल के लिए तैयार किया जा सके.' टीम इंडिया की मौजूदा मुश्किलों की एक बड़ी वजह प्रमुख खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी भी है. लगातार क्रिकेट और व्यस्त कार्यक्रम के चलते कई खिलाड़ियों को आराम दिया जा रहा है.

बुमराह-हार्दिक की कमी खल रही
जसप्रीत बुमराह जैसे प्रमुख गेंदबाज टीम का हिस्सा नहीं हैं. वर्कलोड मैनेजमेंट के साथ खिलाड़ियों की चोट ने भी टीम इंडिया की परेशानी बढ़ाई है. हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे ऑलराउंडर की गैरमौजूदगी में टीम को संतुलन बनाने में मुश्किल होती है. गेंदबाजी में अनुभव की कमी नजर आ रही है और दबाव के पलों में युवा खिलाड़ी गलतियां कर रहे हैं. मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 में भी यही देखने को मिला. भारत ने 190 रनों का मजबूत स्कोर बनाया और शुरुआती विकेट भी हासिल किए, लेकिन अहम मौकों पर गेंदबाज दबाव नहीं झेल सके और इंग्लैंड ने मुकाबला अपने नाम कर लिया.

भारतीय टीम मैनेजमेंट की नजरें सिर्फ मौजूदा सीरीज पर नहीं, बल्कि अगले टी20 वर्ल्ड कप पर भी है. यही वजह है कि प्रिंस यादव और सूर्यांश शेडगे जैसे नए खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है. युवा खिलाड़ियों को इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए तैयार करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ नतीजे हासिल करने का दबाव भी बना रहता है. यहीं टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. एक तरफ भविष्य की टीम तैयार करनी है और दूसरी तरफ लगातार मुकाबले भी जीतने हैं.

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अगर एक साथ बहुत ज्यादा बदलाव किए जाते हैं तो टीम के संतुलन और निरंतरता पर असर पड़ सकता है. लगातार हार के बाद भारतीय टीम के आक्रामक खेलने के तरीके पर भी सवाल उठने लगे हैं. हालांकि सितांशु कोटक ने साफ किया कि टीम की रणनीति में कोई बदलाव नहीं आया है.

उन्होंने कहा, 'कई बार जब आप एक मैच जीतते हैं तो लोग आपकी तारीफ करते हैं. फिर अगला मुकाबला हार जाएं और दो कैच छूट जाएं तो लोग कहते हैं कि आपने अच्छी फील्डिंग नहीं की. हमने दो साल तक कोई सीरीज नहीं गंवाई, वर्ल्ड कप जीता और एशिया कप भी अपने नाम किया. तब सभी कह रहे थे कि टीम बहुत अच्छा खेल रही है. अब दो मैच हारने के बाद इतने सारे लोग कह रहे हैं कि टीम लगातार हार रही है. यह खेल है.'

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