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3 मैच, 36 करोड़… न रन, न इम्पैक्ट, वर्ल्ड कप के हीरो संजू सैमसन कैसे बन गए CSK के लिए सिरदर्द

टी20 वर्ल्ड कप में लगातार मैच जिताने वाले संजू सैमसन का आईपीएल 2026 में आगाज पूरी तरह उलट रहा है, जहां उनकी तीन पारियां (6, 7, 9) सिर्फ खराब फॉर्म नहीं, बल्कि शॉट चयन और ऑफ स्टंप के बाहर अधीरता का पैटर्न भी उजागर करती हैं.चेन्नई सुपर किंग्स ने 36 करोड़ का बड़ा दांव सैमसन और ऋतुराज गायकवाड़ (18+18 करोड़) पर लगाया, लेकिन टीम की लगातार हार और अस्थिर कॉम्बिनेशन ने इस रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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संजू सैमसन... एक भरोसेमंद नाम को आईपीएल में क्या हो गया? (Photo, PTI)
संजू सैमसन... एक भरोसेमंद नाम को आईपीएल में क्या हो गया? (Photo, PTI)

टी20 क्रिकेट का सबसे बड़ा सच यही है कि यहां फॉर्म, फैसले और फ्रेंचाइजी- तीनों का गणित बेहद क्रूर होता है. जो खिलाड़ी कल तक मैच विनर था, वही आज सवालों के घेरे में होता है... और इस वक्त इस कठोर सच्चाई के केंद्र में खड़े हैं संजू सैमसन. वो खिलाड़ी जिसने अभी कुछ ही हफ्ते पहले टी20 वर्ल्ड कप में भारत को लगातार तीन पारियों में जीत दिलाकर हीरो का दर्जा हासिल किया था.

... लेकिन आईपीएल 2026 शुरू होते ही कहानी पलट गई. तीन पारियां- 6, 7, 9... आंकड़े छोटे हैं, लेकिन सवाल बड़े.

यह वही सैमसन हैं, जिनकी बल्लेबाजी में लय, टाइमिंग और आत्मविश्वास का अनोखा मेल दिखता है. वर्ल्ड कप में उन्होंने जिस तरह दबाव में रन बनाए, उसने उन्हें 'बिग मैच प्लेयर; की श्रेणी में खड़ा कर दिया. लेकिन आईपीएल में आते ही उनका बैट खामोश हो गया.

यहां समझने वाली बात ये है कि टी20 फॉर्मेट में 'कॉन्टेक्स्ट' बदलते ही खिलाड़ी का प्रदर्शन भी बदल जाता है. वर्ल्ड कप में राष्ट्रीय जिम्मेदारी, सीमित मैच और साफ रोल होता है. आईपीएल में हर मैच एक ऑडिशन है- नई टीम, नया कॉम्बिनेशन, और अलग मानसिक दबाव.

36 करोड़ का कॉम्बिनेशन- फ्लॉप शो?

चेन्नई सुपर किंग्स ने एक बड़ा दांव खेला था. सैमसन को 18 करोड़ में ट्रेड कर लाया गया और कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ को भी 18 करोड़ में रिटेन किया गया. सोच साफ थी- दो क्लासी भारतीय बल्लेबाज, जो पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर्स तक विपक्षी टीमों पर दबाव बना सकें. लेकिन अभी तक यह जोड़ी 'पेपर प्लान' ही साबित हुई है.

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तीन मैच- तीनों में हार. पॉइंट टेबल में नीचे. और सबसे बड़ी बात- इन दोनों में से कोई भी मैच को नियंत्रित करता नजर नहीं आया.सवाल ये नहीं कि खिलाड़ी खराब हैं, बल्कि ये है कि टीम ने उन्हें सही रोल दिया है या नहीं.

आईपीएल 2026 ऑक्शन में सीएसके ने सिर्फ सैमसन पर ही नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों पर भी जमकर पैसा लुटाया. कार्तिक शर्मा और प्रशांत वीर- दोनों पर 14.20-14.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए. कुल मिलाकर 28.40 करोड़ दो अनकैप्ड/कम अनुभवी खिलाड़ियों पर लुटा दिए.

सीएसके जैसी टीम, जो अपने 'अनुभव और स्थिरता' के लिए जानी जाती है, उसने अचानक हाई-रिस्क, हाई-इन्वेस्टमेंट मॉडल क्यों अपनाया? क्या यह 'युवा खून' पर भरोसा था या ऑक्शन टेबल पर जल्दबाजी?

अब जब टीम हार रही है, तो यह निवेश और भी भारी लगता है...

इस आईपीएल में संजू सैमसन के तीनों आउट होने के तरीकों को ध्यान से देखें, तो समस्या सिर्फ 'फॉर्म' नहीं, बल्कि डिसिप्लिन और शॉट चयन की भी नजर आती है.

RCB के खिलाफ (9 रन)

बैक ऑफ लेंथ गेंद, ऑफ स्टंप के बाहर- सैमसन ने शरीर से दूर ढीला शॉट खेला और स्लिप में कैच दे बैठे.
यहां बल्लेबाज गेंद को छोड़ भी सकता था.

पंजाब किंग्स के खिलाफ (7 रन)

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गेंद पूरी तरह ड्राइव करने लायक नहीं थी, लेकिन सैमसन ने शॉट खेलने की कोशिश की- नतीजा, एज और विकेटकीपर के हाथों कैच.
- यहां भी समस्या गेंद की लेंथ को गलत पढ़ने और जल्दबाजी की थी.

राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ (6 रन)

140 किमी/घंटा की सीम मूवमेंट वाली गेंद- सैमसन बिना फुटवर्क के across-the-line शॉट खेलने गए और बोल्ड हो गए.
- यहां साफ दिखता है कि उन्होंने गेंद की लाइन-लेंथ के हिसाब से खुद को एडजस्ट ही नहीं किया.

यह वही सैमसन हैं जो जब सेट हो जाते हैं, तो मैच को अकेले खत्म कर सकते हैं. लेकिन अभी वो हर पारी में 'इम्पैक्ट' बनाने की जल्दी में अपना विकेट दे रहे हैं.

यही आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट का सबसे बड़ा अंतर है- यहां आपको हर मैच में खुद को साबित करना होता है, और यही दबाव कई बार खिलाड़ियों को उनकी नैचुरल गेम से दूर ले जाता है.

क्या कप्तानी का असर भी है?

हालांकि सैमसन इस टीम के कप्तान नहीं हैं, लेकिन एक सीनियर खिलाड़ी होने के नाते उन पर जिम्मेदारी कम नहीं है. दूसरी तरफ गायकवाड़ पहली बार फुल-टाइम कप्तानी कर रहे हैं.

ऐसे में टीम का बैटिंग कोर- सैमसन और गायकवाड़... अगर क्लिक नहीं करता, तो पूरी टीम का संतुलन बिगड़ जाता है.

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CSK का असली संकट: पहचान का संकट

सीएसके हमेशा से एक 'सिस्टम टीम' रही है- जहां खिलाड़ी आते-जाते रहते हैं, लेकिन सिस्टम चलता रहता है. लेकिन इस सीजन में वह सिस्टम ही नजर नहीं आ रहा.

- ओपनिंग कॉम्बिनेशन अस्थिर
- मिडिल ऑर्डर अनिश्चित
- युवा खिलाड़ियों पर ज्यादा निर्भरता
- सीनियर खिलाड़ियों का आउट ऑफ फॉर्म होना

यह सब मिलकर टीम को 'पहचान के संकट' में डाल रहा है.

आगे का रास्ता क्या?

अब सवाल ये है कि क्या यह सिर्फ तीन मैचों की खराब शुरुआत है या एक बड़ी समस्या का संकेत?

सैमसन के लिए:

- उन्हें खुद को थोड़ा समय देना होगा
- हर गेंद पर 'मैच विनर' बनने की कोशिश छोड़नी होगी
- अपने नैचुरल गेम पर वापस लौटना होगा

आईपीएल लंबा टूर्नामेंट है. तीन मैच बहुत होते हैं चर्चा के लिए, लेकिन फैसला करने के लिए नहीं. संजू जैसे खिलाड़ी एक पारी में नैरेटिव बदलने की क्षमता रखते हैं. और चेन्नई जैसी टीम एक सीरीज में सीजन पलटने का इतिहास रखती है. फिलहाल, सवाल ज्यादा हैं और जवाब कम.
... लेकिन अगर टी20 क्रिकेट ने हमें कुछ सिखाया है, तो वो यही है- यहां कहानी हर मैच के साथ बदलती है. और शायद, अगली ही पारी में सैमसन फिर से हीरो बन जाएं.
 

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