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बैन से बचे, लेकिन बढ़ी और मुश्किलें! रियान पराग पर अब जांच की मांग, वेपिंग वीडियो नहीं थम रहा बवाल

राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग पर वेपिंग जैसे दिखने वाले वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. BCCI ने पहले ही जुर्माना लगाया, लेकिन अब मदर्स अगेन्स्ट वेप‍िंग नामक समूह ने जांच की मांग की है. उनका कहना है कि इससे युवाओं में गलत संदेश जा सकता है और यह कानून का उल्लंघन भी हो सकता है.

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ड्रेसिंग रूम में ‘वेप’ विवाद: पराग पर फिर घिरा IPL, उठे बड़े सवाल (Photo: ITG)
ड्रेसिंग रूम में ‘वेप’ विवाद: पराग पर फिर घिरा IPL, उठे बड़े सवाल (Photo: ITG)

राजस्थान रॉयल्स के कप्तान र‍ियान पराग (Riyan Parag) एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. IPL मैच के दौरान सामने आए एक वीडियो ने उनके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) ने उन्हें बैन से राहत दी है, लेकिन मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है.

28 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान लाइव प्रसारण में एक वीडियो सामने आया, जिसमें 24 वर्षीय पराग ड्रेसिंग रूम में एक वेप डिवाइस (ई स‍िगरेट) का इस्तेमाल करते हुए नजर आए. इस घटना के बाद BCCI ने IPL आचार संहिता के लेवल-1 उल्लंघन के तहत पराग पर मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया और एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा.

लेकिन मामला यहीं नहीं थमा. मदर्स अगेन्स्ट वेप‍िंग (Mothers Against Vaping) नामक महिला समूह ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए जांच की मांग कर दी है. समूह का कहना है कि इस तरह के दृश्य राष्ट्रीय प्रसारण पर दिखना युवाओं के बीच बैन किए गए उत्पादों को सामान्य बना सकता है.

समूह ने Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 का हवाला देते हुए कहा कि भारत में ई-सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, विज्ञापन ही नहीं, बल्कि उसका इस्तेमाल (possession) भी गैरकानूनी है. उन्होंने यह भी साफ किया कि 'इंडोर वेपिंग ग्रे जोन में है' जैसी बातें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं.

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अपने बयान में समूह ने कहा कि इस कानून के तहत उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल या 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. वहीं गंभीर मामलों में एक साल की सजा या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

महिला समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2019 के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ई-सिगरेट को 'नशे का नया तरीका' बताया था और इसे फैशन ट्रेंड के रूप में पेश किए जाने पर चिंता जताई थी.

समूह ने सवाल उठाया कि क्या यह सिर्फ एक गलती थी या फिर किसी तरह से बैन उत्पादों को चर्चा में लाने की कोशिश. उन्होंने BCCI से इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने और पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग की.

साथ ही, समूह ने यह भी कहा कि अगर पराग की मंशा गलत नहीं थी, तो उन्हें खुद सामने आकर सफाई देनी चाहिए और जांच में सहयोग करना चाहिए. मह‍िला समूह के बयान में कहा गया कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह सेलिब्रिटी हो या आम नागरिक.  समूह ने चेतावनी दी कि क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में इस तरह के विवाद बच्चों और युवाओं पर गलत असर डाल सकते हैं, क्योंकि वे अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को देखकर उनकी नकल करते हैं. अब देखना होगा कि BCCI इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या रियान पराग खुद इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं.

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