आईपीएल 2026 के फाइनल में जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने गुजरात टाइटन्स (GT) को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता, तो सबसे ज्यादा चर्चा बड़े नामों की हुई. लेकिन इस जीत की कहानी में एक ऐसा किरदार भी था, जिसने चुपचाप अपना काम किया और मैच का रुख बदल दिया. वह नाम था- रसिक सलाम डार.
फाइनल में रसिक ने 3 विकेट लेकर गुजरात की बल्लेबाजी को झकझोर दिया. आईपीएल 2026 में उन्होंने 12 मैचों में 19 विकेट लिए और आरसीबी के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज रहे. लेकिन उनकी यह सफलता रातोरात नहीं आई. इसके पीछे संघर्ष, असफलता, बैन, चोट और लगातार खुद को साबित करने की जिद की लंबी कहानी छिपी है.
2018 में श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर टीम के चयन ट्रायल चल रहे थे. साल भी उन दर्जनों खिलाड़ियों में शामिल थे, जो अपनी किस्मत आजमाने आए थे. उनके लिए यह कोई नया अनुभव नहीं था. वह हर साल ट्रायल में आते थे और हर साल निराश होकर लौट जाते थे. इस बार भी उन्हें लगा कि नतीजा वही रहेगा.
कुछ गेंदें फेंकने के बाद उन्हें किनारे खड़ा रहने को कहा गया. साल ने समझा कि शायद फिर चयन नहीं हुआ है और वह अपने भाई के साथ वापस जाने लगे. तभी पीछे से आवाज आई कि उन्हें रोका जाए. यह आवाज थी इरफान पठान की, जो उस समय जम्मू-कश्मीर क्रिकेट सेटअप के मेंटर थे.
इरफान ने साल की गेंदबाजी में कुछ खास देखा था. वह बहुत लंबे कद के नहीं थे, गेंदबाजी एक्शन में भी तकनीकी खामियां थीं और उनका शरीर भी किसी पारंपरिक तेज गेंदबाज जैसा नहीं था. लेकिन उनकी गेंद में गति थी और सबसे खास थी उनकी बैक-ऑफ-द-हैंड स्लोअर बॉल. इरफान समझ गए कि यह खिलाड़ी सामान्य नहीं है. उन्होंने रसिक को सीनियर टीम में शामिल कर लिया.
हालांकि यह फैसला आसान नहीं था. चयन के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया. कुछ लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए, लेकिन इरफान अपने निर्णय पर कायम रहे. उनके लिए प्रतिभा किसी भी राजनीति से बड़ी थी.
इसके बाद रसिक के करियर का एक अहम मोड़ मुंबई एयरपोर्ट पर आया. इरफान की मुलाकात राहुल संघवी (मुंबई इंडियंस के स्काउटिंग प्रमुख) से हुई. बातचीत के दौरान उन्होंने अपने मोबाइल में रसिक की गेंदबाजी का वीडियो दिखाया. वीडियो में नई गेंद से स्विंग, विकेट और एक हैट्रिक थी. मुंबई इंडियंस के स्काउट्स प्रभावित हुए और रसिक को ट्रायल का मौका मिला. नेट्स में प्रदर्शन के बाद उन्हें आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट मिल गया.
ऐसा लग रहा था कि सपना पूरा होने जा रहा है, लेकिन तभी एक बड़ा झटका लगा. 2019 में उम्र से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी के मामले में बीसीसीआई ने कई खिलाड़ियों पर कार्रवाई की और रसिक को भी दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया.
करियर की शुरुआत में ही लगा यह झटका किसी भी युवा खिलाड़ी को तोड़ सकता था. आईपीएल छूट गया, प्रतिस्पर्धी क्रिकेट छूट गई और भविष्य अनिश्चित हो गया. लेकिन रसिक ने हार नहीं मानी. उन्होंने अभ्यास जारी रखा और खुद को तैयार रखा. बाद में इरफान पठान ने भी कहा कि यह दो साल का बैन ही था जिसने एक लड़के को मानसिक रूप से मजबूत इंसान बना दिया.
बैन खत्म होने के बाद भी चुनौतियां खत्म नहीं हुईं. कोलकाता नाइट राइडर्स में उन्हें मौका मिला, लेकिन चोटों ने परेशान किया. वह नियमित रूप से नहीं खेल सके और करियर फिर से रुकता हुआ नजर आने लगा. इसी दौरान इरफान ने उन्हें बेंगलुरु में एक फिजियोथेरेपिस्ट के पास भेजा, जहां उन्होंने करीब छह महीने मेहनत की. फिटनेस सुधरी तो प्रदर्शन भी बेहतर होने लगा.
इसके बाद रसिक ने धीरे-धीरे वापसी की. दिल्ली कैपिटल्स के लिए उन्होंने उपयोगी प्रदर्शन किया और फिर आरसीबी ने उन पर भरोसा जताते हुए मेगा ऑक्शन में 6 करोड़ रुपये खर्च किए. पहले सीजन में ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन टीम का विश्वास बना रहा.
आईपीएल 2026 में जब मौका मिला तो रसिक ने उसे पूरी तरह भुना दिया. उन्होंने न सिर्फ विकेट लिए, बल्कि डेथ ओवरों में अपनी स्लोअर गेंदों और यॉर्कर से बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया. उनकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के लगातार असर डाला. वह उन खिलाड़ियों में से हैं जो सुर्खियों से ज्यादा स्कोरकार्ड पर नजर आते हैं.
आज रसिक सलाम डार की कहानी सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं है. यह उस खिलाड़ी की कहानी है, जिसने बार-बार मिले रिजेक्शन को अपनी पहचान नहीं बनने दिया. जिसने बैन, चोट और अनिश्चितता के दौर में भी उम्मीद नहीं छोड़ी और जिसने साबित कर दिया कि प्रतिभा को अगर सही मार्गदर्शन और धैर्य मिल जाए, तो वह किसी भी मंजिल तक पहुंच सकती है.
फाइनल की ट्रॉफी जीतने के बाद भी शायद उनकी यात्रा का सबसे दिलचस्प हिस्सा अभी बाकी है. क्योंकि जिस खिलाड़ी को कभी ट्रायल छोड़कर वापस लौटना पड़ता था, आज वही भारतीय क्रिकेट के भविष्य के संभावित सितारों में गिना जा रहा है.