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₹15,660 करोड़ की डील पर घमासान, राजस्थान रॉयल्स की बिक्री जांच के घेरे में, सोमानी ग्रुप करेगा कानूनी वार

राजस्थान रॉयल्स की ओनरशिप डील अब सिर्फ एक व्यावसायिक सौदा नहीं रह गई है, बल्कि यह संभावित कानूनी विवाद का रूप लेती दिख रही है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह मामला अदालत तक पहुंचता है या नहीं...

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राजस्थान रॉयल्स की ओनरशिप डील पर संकट... (Photo: PTI)
राजस्थान रॉयल्स की ओनरशिप डील पर संकट... (Photo: PTI)

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स (RR) की ओनरशिप डील अब विवादों में घिरती नजर आ रही है. हाल ही में मित्तल फैमिली और अदार पूनावला ने करीब ₹15,660 करोड़ में राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी खरीदी थी. अब काल सोमानी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं और कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है.

क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, सोमानी ग्रुप इस डील के अंतिम चरण में हुए घटनाक्रम से असंतुष्ट है. कंसोर्टियम, जो पहले राजस्थान रॉयल्स के अधिग्रहण की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा था, अब इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है.

सूत्रों ने कहा, 'हमने अमेरिका में अपनी लीगल और पीआर टीम के साथ चर्चा की है. हम अपनी रणनीति तय कर रहे हैं और जल्द ही कानूनी नोटिस भेजा जाएगा.' यह कंसोर्टियम अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े निवेशकों से मिलकर बना था, जिसमें वॉलमार्ट के उत्तराधिकारी रॉब वाल्टन और डेट्रॉइट लायंस से जुड़ा हैम्प परिवार भी शामिल था. बताया जा रहा है कि यह समूह करीब ₹15,300 करोड़ की डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुका था.

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सोमानी ग्रुप ने उन रिपोर्ट्स को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि वे तय समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं कर सके. समूह का दावा है कि वे डील को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई. सूत्रों ने कहा, 'हम पिछले 10 दिनों से डील क्लोज करने के लिए तैयार थे. बातचीत आखिरी समय तक ईमानदारी से जारी रही, लेकिन जानबूझकर देरी की गई और समानांतर बातचीत भी चलती रही.'

कंसोर्टियम का यह भी कहना है कि उन्होंने फ्रेंचाइजी से जुड़े कई अहम सवाल उठाए थे. इनमें बकाया भुगतान, लंबित कानूनी मामले, भविष्य की संचालन संरचना जैसे मुद्दे शामिल थे. इन सवालों पर स्पष्टता नहीं मिलने से दोनों पक्षों के बीच भरोसे में कमी आई.

क्यों टूटी सोमानी ग्रुप संग डील?
रिपोर्ट के मुताबिक, डील टूटने की एक बड़ी वजह फ्रेंचाइजी के भविष्य के मैनेजमेंट ढांचे को लेकर मतभेद भी रहा. खासतौर पर मनोज बडाले की भूमिका को लेकर सहमति नहीं बन सकी. जहां मौजूदा डील में बडाले को फ्रेंचाइजी के भविष्य का अहम हिस्सा माना जा रहा है, वहीं सोमानी कंसोर्टियम उनकी भूमिका को सीमित करना चाहता था. यह अंतर दोनों प्रस्तावों के बीच निर्णायक साबित हुआ.

विवाद के बावजूद मित्तल फैमिली और अदार पूनावला के साथ हुई डील फिलहाल ट्रैक पर बनी हुई है. इस समझौते के तहत मित्तल परिवार करीब 75% हिस्सेदारी लेगा. वहीं पूनावाला के पास करीब 18% हिस्सेदारी होगी. शेष 7% हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास रहेगी, जिनमें मनोज बडाले भी शामिल हैं.

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फ्रेंचाइजी के साथ-साथ पार्ल रॉयल्स और बारबाडोस रॉयल्स जैसी टीमें भी इस वैल्यूएशन में शामिल हैं, जिससे कुल मूल्य करीब 1.65 बिलियन डॉलर (₹15,660 करोड़) आंका गया है. यह डील अभी अंतिम रूप से पूरी नहीं हुई है. इसे भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI), कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल से मंजूरी मिलनी बाकी है.

डील के 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है. हालांकि, सोमानी ग्रुप की संभावित कानूनी कार्रवाई इस प्रक्रिया को जटिल बना सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंसोर्टियम बीसीसीआई को औपचारिक शिकायत भेजने और सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे को उठाने पर भी विचार कर रहा है.

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