इंग्लैंड के खिलाफ शनिवार (11 जुलाई) को टी20 सीरीज के पांचवें एवं आखिरी टी20 मुकाबले से पहले टीम इंडिया को अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा. साउथम्प्टन के रोज बाउल में आयोजित इस मैच में टॉस भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे होना था, लेकिन इसमें 45 मिनट की देरी हुई. टॉस भारतीय समयानुसार शाम 7:15 बजे हो पाया. भारतीय टीम के ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण तय समय पर नहीं हो सका.
टीम इंडिया की बस ट्रैफिक में अटक गई. इसके चलते खिलाड़ी समय पर स्टेडियम नहीं पहुंच सके और टॉस में देरी करनी पड़ी. हालांकि बाद में भारतीय टीम मैदान पर पहुंच गई और मैच शुरू कराने की तैयारियां आगे बढ़ीं. यह मुकाबला भले ही सीरीज का नतीजा नहीं बदल सकता, लेकिन टीम इंडिया के लिए इसका महत्व काफी बड़ा था. पहला टी20 बारिश की भेंट चढ़ गया था, जबकि अगले तीनों मुकाबलों में भारत को हार का सामना करना पड़ा. इसके चलते इंग्लैंड ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली थी.
भारतीय टीम ने पहली बार इंग्लैंड के खिलाफ दो या उससे ज्यादा मैचों की टी20 सीरीज गंवाई है. यह 2019 के बाद इंग्लैंड के खिलाफ भारत की पहली द्विपक्षीय सीरीज हार भी रही. इसके अलावा सात साल बाद टीम इंडिया ने लगातार दो टी20 सीरीज गंवाई है. इससे पहले आयरलैंड ने भी भारत को 2-0 से हराया था.
सीरीज हाथ से निकल गई थी, लेकिन आखिरी मुकाबला भारत के लिए सम्मान बचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा. यह मैच कप्तान श्रेयस अय्यर और हेड कोच गौतम गंभीर के लिए भी बेहद अहम था. सूर्यकुमार यादव की जगह कप्तानी संभालने के बाद श्रेयस अय्यर ने बतौर कप्तान शुरुआती 6 में से 5 मुकाबले गंवाए. जबकि एक मुकाबला बेनतीजा रहा. लगातार खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) टीम के प्रदर्शन की समीक्षा करने की तैयारी में है.
आखिरी मुकाबले में संजू सैमसन, ईशान किशन और तिलक वर्मा के प्रदर्शन पर भी खास नजरें रहीं. हालिया टी20 इंटरनेशनल मैचों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के बाद ये तीनों बल्लेबाजों आलोचकों के निशाने पर हैं. खासकर भारतीय ओपनर्स के बल्लेबाजी रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं. बीसीसीआई इस बात से खुश नहीं है कि बल्लेबाज हर गेंद पर बड़ा शॉट या छक्का लगाने की कोशिश कर रहे हैं और अपने विकेट की अहमियत नहीं समझ रहे.
अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी ने कुछ मौकों पर तेज शुरुआत जरूर की, लेकिन उसे बड़ी और मैच जिताऊ पारी में नहीं बदल सके थे. वहीं तिलक वर्मा पर दबाव और ज्यादा है. उन्हें टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रदर्शन करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है. सीरीज में उनका बल्ला उम्मीदों के मुताबिक नहीं चला.