scorecardresearch
 

राजस्थान: भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 और बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, जयपुर से एक्सपर्ट टीम जांच को रवाना

राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 और बांसवाड़ा में 4 महिलाओं की मौत के बाद विशेषज्ञ टीम जांच करेगी.

Advertisement
X
राजस्थान में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट.(Photo:ITG)
राजस्थान में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट.(Photo:ITG)

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा से सामने आए मामलों ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है. भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (MCH) में पिछले छह दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में चार दिनों के भीतर एक नाबालिग समेत 4 प्रसूताओं की जान चली गई.

दरअसल, भीलवाड़ा एमसीएच में जिन पांच महिलाओं की मौत हुई, उनमें सभी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी. ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

शुक्रवार को पोटला निवासी 32 वर्षीय संगीता जीनगर की सिजेरियन डिलीवरी के बाद हालत बिगड़ी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इससे पहले 5 जुलाई को शिमला गुर्जर, 7 जुलाई को फोरी देवी, 8 जुलाई को ईशा पांडे और 9 जुलाई को दिव्या की भी प्रसव के बाद मौत हो चुकी है. सभी मामलों में परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं.

मार्च से अब तक महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा नौ पहुंच चुका है, जिनमें से पांच मौतें सिर्फ जुलाई के पहले 11 दिनों में हुई हैं.

Advertisement

30-40 सिजेरियन, लेकिन सिर्फ 8 सर्जिकल सेट

अस्पताल में रोजाना 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जबकि नियमित और इमरजेंसी उपयोग के लिए कुल आठ सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं. एक सेट को दोबारा इस्तेमाल से पहले करीब तीन घंटे की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ऐसे में क्षमता से अधिक ऑपरेशन होने के कारण संक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है.

अस्पताल ने संक्रमण से किया इनकार

ऑपरेशन थिएटर की कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संक्रमण को लेकर सवाल उठे हैं. हालांकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने कहा कि मौतों का कारण संक्रमण नहीं बल्कि मेडिकल कॉम्प्लिकेशन है. उन्होंने बताया कि जिस ऑपरेशन थिएटर का सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतरा, उसे तीन दिन से बंद कर स्टरलाइजेशन और फ्यूमिगेशन किया जा रहा है. नई रिपोर्ट नेगेटिव आने तक वहां कोई ऑपरेशन नहीं होगा.

भीलवाड़ा जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने भी निरीक्षण के बाद कहा कि शुरुआती रिपोर्ट में मौतों का कारण संक्रमण नहीं पाया गया है और सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं.

बांसवाड़ा में 4 दिन में 4 प्रसूताओं की मौत

उधर, बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में 7 से 10 जुलाई के बीच एक नाबालिग सहित चार प्रसूताओं की मौत हुई है.

Advertisement

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाबालिग की मौत गंभीर हालत में अस्पताल लाए जाने के बाद हुई. वहीं दो महिलाओं की मौत गंभीर एनीमिया और एक महिला की मौत ऑपरेशन के दौरान उच्च रक्तचाप के कारण होने की बात सामने आई है. इनमें दो मामलों में सिजेरियन डिलीवरी हुई थी.

जयपुर से विशेषज्ञ टीम करेगी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जयपुर से दो सदस्यीय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भीलवाड़ा रवाना की है. डॉ. पवन और डॉ. अभिनव पूरे मामले की गहन जांच करेंगे.

संयुक्त शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. हर मौत की मेडिकल हिस्ट्री, उपचार प्रक्रिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी. ऑपरेशन थिएटर से लिए गए सैंपलों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही मौतों के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे. यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

कोटा और बीकानेर के बाद फिर उठे सवाल

राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. मई में कोटा के सरकारी अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी, जबकि जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी, जिनमें दो की मौत हो गई. अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा की घटनाओं ने प्रदेश की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement