भारत का क्रिकेट कैलेंडर ठसाठस?... अब यह सवाल नहीं, हकीकत बन चुका है. आने वाले 15 से 18 महीनों में टीम इंडिया का शेड्यूल इतना व्यस्त है कि खिलाड़ियों के पास सांस लेने तक की फुर्सत नहीं दिखती. आईपीएल से लेकर द्विपक्षीय सीरीज, एशियन गेम्स और फिर वर्ल्ड कप- क्रिकेट का यह सिलसिला बिना ब्रेक के चलता नजर आ रहा है.
जून में आयरलैंड दौरे के ऐलान ने इस व्यस्तता पर आखिरी मुहर लगा दी है. दो टी20 मैचों की यह छोटी सी सीरीज भी बड़े कार्यक्रमों के बीच इस तरह फिट की गई है कि खिलाड़ियों के लिए आराम का स्पेस और सिकुड़ गया है.
पैसा, पावर और प्रेशर
भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत उसकी बाजार वैल्यू है. यही वजह है कि दुनिया भर के क्रिकेट बोर्ड भारत के साथ सीरीज खेलने को प्राथमिकता देते हैं. हर कोई चाहता है कि टीम इंडिया उनके देश आए, क्योंकि इससे प्रसारण और कमाई दोनों बढ़ती है.
लेकिन इस ‘डिमांड’ का सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ता है. लगातार क्रिकेट, लंबी यात्राएं और अलग-अलग फॉर्मेट- यह सब मिलकर मानसिक और शारीरिक थकान को बढ़ाते हैं.
बीसीसीआई ने इस दबाव को कम करने के लिए तीन अलग-अलग टीमों का फॉर्मूला अपनाया है- टेस्ट, वनडे और टी20 के लिए अलग खिलाड़ी. इससे कुछ हद तक राहत जरूर मिलती है, लेकिन पूरी तरह नहीं.
स्टार खिलाड़ी, खासकर ऑल-फॉर्मेट प्लेयर्स, अब भी सबसे ज्यादा दबाव में रहते हैं. उन्हें एक सीरीज खत्म होते ही दूसरी के लिए तैयार रहना पड़ता है.
IPL से शुरू होगा मैराथन
28 मार्च से शुरू होने वाला आईपीएल इस मैराथन की शुरुआत है. 65 दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट का सिलसिला शुरू हो जाएगा.
जून में अफगानिस्तान सीरीज, फिर आयरलैंड, उसके बाद इंग्लैंड दौरा... हर महीने टीम मैदान पर होगी. अगस्त-सितंबर में बांग्लादेश और श्रीलंका दौरे की संभावना है. फिर एशियन गेम्स और उसके बाद न्यूजीलैंड का लंबा दौरा.
साल के अंत में घरेलू सीरीज और 2027 की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज- यह सब मिलकर कैलेंडर को पूरी तरह भर देते हैं.
इन सभी सीरीज का असली मकसद 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी है. उससे पहले एशिया कप भी खेला जाना है. यानी टीम इंडिया के पास प्रयोग करने के मौके तो होंगे, लेकिन आराम के नहीं.
सबसे बड़ा सवाल
इतने व्यस्त शेड्यूल के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या खिलाड़ी इस दबाव को झेल पाएंगे? वर्कलोड मैनेजमेंट, रोटेशन पॉलिसी और बेंच स्ट्रेंथ अब सिर्फ रणनीति नहीं, मजबूरी बन चुके हैं.
भारत का क्रिकेट कैलेंडर अब सिर्फ भरा हुआ नहीं, बल्कि ठसाठस है. मैदान पर रोमांच बढ़ेगा, रिकॉर्ड बनेंगे, लेकिन इसके पीछे खिलाड़ियों की थकान और दबाव की कहानी भी उतनी ही बड़ी होगी.