भारतीय क्रिकेट में ग्रेग चैपल का कार्यकाल आज भी विवादों के लिए याद किया जाता है. अब पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने उस दौर पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने चैपल को भारतीय टीम का कोच बनाने के फैसले को बड़ी गलती बताते हुए आरोप लगाया कि उनकी नीतियों ने खिलाड़ियों के बीच की एकता खत्म कर दी थी.
एक पॉडकास्ट में हरभजन सिंह ने कहा कि ग्रेग चैपल के आने से पहले भारतीय टीम का ड्रेसिंग रूम मजबूत था, लेकिन उनके कार्यकाल में खिलाड़ियों के रिश्तों में खटास आ गई. हरभजन के मुताबिक, टीम के भीतर ऐसा माहौल बन गया था कि साथ खेलने वाले खिलाड़ी एक-दूसरे से बात करने से भी कतराने लगे थे.
हरभजन कहते हैं, 'दादा (सौरव गांगुली) के साथ चैपल ने जिस तरह का व्यवहार किया और भारतीय टीम के साथ उन दिनों जो कुछ हुआ, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे काले और खराब अध्यायों में से एक था. उन्हें हेड कोच बनाना भारतीय क्रिकेट प्रबंधन के सबसे खराब फैसलों में से एक था. उन्होंने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई.'
जून 2005 में भारतीय टीम के मुख्य कोच बने ग्रेग चैपल का तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के साथ विवाद जल्द ही सार्वजनिक हो गया. जिम्बाब्वे दौरे पर गांगुली को एक मैच से बाहर बैठने का सुझाव दिए जाने के बाद तनाव बढ़ा. इसके बाद चैपल ने BCCI (भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड) को ईमेल भेजकर गांगुली की फिटनेस और कप्तानी पर सवाल उठाए.
यह भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में मचा हड़कंप, स्टार गेंदबाज मेगन शूट पर लगा 2 मैचों का बैन, खुद मांगी माफी
ईमेल लीक होने से भारतीय क्रिकेट में हलचल मच गई और टीम के भीतर चल रहे मतभेद चर्चा का विषय बन गए. हरभजन ने इस पूरे दौर को भारतीय क्रिकेट के सबसे खराब अध्यायों में से एक करार दिया. उन्होंने कहा कि 2003 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल तक पहुंचने वाली टीम में शानदार तालमेल था, लेकिन चैपल के कार्यकाल में वह एकजुटता बिखर गई.
सचिन संग भी हुआ तनाव
ग्रेग चैपल के कार्यकाल में सिर्फ सौरव गांगुली के साथ ही तनाव नहीं रहा. सचिन तेंदुलकर ने भी बाद में खुलासा किया था कि क्रिकेट वर्ल्ड कप 2007 से कुछ महीने पहले चैपल ने उन्हें राहुल द्रविड़ की जगह कप्तानी संभालने का सुझाव दिया था. सचिन के अनुसार, चैपल ने उनके सामने भारतीय क्रिकेट को मिलकर नियंत्रित करने की बात रखी थी.
यह भी पढ़ें: 7017 गेंदों में 200 विकेट... कगिसो रबाडा ने रच दिया इतिहास, डेल स्टेन का रिकॉर्ड भी छूटा पीछे
हरभजन सिंह ने यह आशंका भी जताई कि ग्रेग चैपल की रणनीति भारतीय खिलाड़ियों के बीच मतभेद पैदा करने की थी, ताकि मैदान पर टीम एकजुट होकर प्रदर्शन न कर सके. हालांकि, उन्होंने इसे अपनी निजी राय के तौर पर पेश किया, ना कि किसी साबित तथ्य के रूप में.
ग्रेग चैपल के कार्यकाल का अंत क्रिकेट वर्ल्ड कप 2007 में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हुआ. भारतीय टीम ग्रुप स्टेज में तीन में से सिर्फ एक मैच जीत सकी. बरमूडा के खिलाफ जीत के बावजूद बांग्लादेश और श्रीलंका से हार ने भारत का सफर पहले ही दौर में खत्म कर दिया. इस नतीजे ने टीम के प्रदर्शन और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए. बाद में चैपल की टीम इंडिया से विदाई हो गई.